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पेराक्लीज कालीन विज्ञान एवं साहित्य की उपलब्धिया

पेराक्लीज कालीन विज्ञान एवं साहित्य की उपलब्धिया


1. चिकित्सा शास्त्र -पेरिक्लीज-काल के यूनानियों में चिकित्सा-शास्त्र में सर्वाधिक प्रगति की। 425 ई.पू. में एकरागास के एम्पिडोक्लीज से इस शास्त्र का इतिहास प्रारम्भ होता है। उसने यह प्रमाणित किया कि त्वचा के सूक्ष्म छिद्र श्वास प्रक्रिया में पूरक होते हैं तथा रक्त हृदय से उसकी ओर प्रवाहित होता है। यूनानी चिकित्सा शास्त्र में जन्मदाता क्रोटोन ने मस्तिष्क को विचारों का केन्द्र बताया। उसने निद्रा-प्रक्रिया का अनुसाधान किया, 'ऑण्टिक नर्व' की खोज की तथा ओन नेचर' नामक पुस्तक की रचना की। उसने पशुओं की शल्य-चिकित्सा भी प्रारम्भ की। सम्भवतः उसी युग में यूराईफ्रोन ने एशिया माइनर में फेफड़ों की बीमारी का कारण प्लूरिसी बताया और कब्ज को अनेक रोगों का मूल बताया। हिप्पोक्रेटिज इस युग का सबसे बड़ा चिकित्साशास्त्री था। यह काँस का निवासी था तथा गणीतज्ञ हिप्पोकेटिज से भिन्न था। इसमें धर्म एवं दर्शन से चिकित्सा-शास्व को अलग किया। उसने दैवी शक्तियों के स्थान पर रोगों का मूल-प्राकृतिक कारणों को बताया, शल्य चिकित्सा का विकास किया तथा संक्रामक रोगों का पता लगाया। इसने चिकित्सकों के लिये एक व्यवासायिक शपथ भी प्रचलित की। 


2. वीजगणित -थेलिज ने बीजगणित का आविष्कार 'थ्योरम' का प्रारम्भ करके किया था। संभवतः पाइथागोरस ने उससे अधिक महत्वपूर्ण आविष्कार किये थे। इस विद्या को 440 ई.पू. में कियोस के हिप्पोक्रेटिज ने एक पुस्तक लिख कर स्वतन्त्र आधार प्रदान किया। उसके पश्चात् इसको विकसित करने में 420 ई. पू. में एलिया के हिप्पियास तथा अब्देरा के डेमोक्रेटिज ने 410 ई.पू. में. योगदान दिया। 


3. ज्योतिष विद्या -यूनानियों ने ज्योतिष विद्या में विशेष प्रगति की [एम्बिडोक्लीन नामक चिकित्साशास्त्री ने इस बात का अन्वेषण किया कि विश्व चार तत्वों (जन. अग्नि, वायु, एवं पृथ्वीद्ध से बना है। उसने यह भी बताया कि प्रकाश को एक बिन्दे से दूसरे बिन्दु तक पहुंचने में समय लगता है। पामेनिडिज नामक दार्शनिक ने यह प्रमाणित किया कि चन्द्रमा सूर्य द्वारा प्रकाशित होता है तथा पृथ्वी गोलाकार है। डेमोक्रिटिस ने आकाश गंगा को अनन्त विश्वों का समूह बताया तथा फालीलोंस ने पृथ्वी को विश्व के केन्द्र के स्थान पर पर एक ग्रह-मात्र घोषित किया। एनेक्जेगोरस ने यह घोषित किया कि पृथ्वी के निकटतम चन्द्रमा है एवं उस पर मैदान तथा पर्वत आदि हैं। उसने पार्मेनिडिज की इस घोषणा का समर्थन किया कि चन्द्रमा सूर्य द्वारा प्रकाशित होता है। उसने यह भी पता लगाया कि सूर्य अथवा चन्द्र ग्रहण क्यों होते हैं? उसने डार्विन से तेईस सौ वर्ष पूर्व घोषित किया कि पशुओं से मनुष्य का विकास हुआ है तथा विश्व पाँच तत्वों (आकाश, जल, अग्नि, पृथ्वी एवं वायु) से बना है। 


साहित्य -पेरिक्लीज युग में साहित्य के क्षेत्र में अनेक नवीन प्रयोग किये गये। इस काल की साहित्यिक निधि का वर्णन निम्नलिखित है- 


1. नाट्य रचनाएं -एथेन्सवासियों की साहित्यिक प्रतिभा की सर्वोत्कृष्ट अभिव्यक्ति दुखान्त नाटकों की रचना में हुई है। वसन्त एवं सुरा के देवता डायोनाइसिस के सम्मान में वह उत्सव मनाते थे। उक्त उत्सव में एक व्यक्ति कथा का पाठ करता था तथा कुछ व्यक्ति बकरे का रूप धारण करके एक वेदी के चारों ओर नाचत-गाते तथा गीत में वर्णित घटनाओं को अपने हावभाव से अभिव्यक्त करते थे। कालान्तर में इस प्रकार के प्रदर्शनों में नृत्य-गान गौण हो गया और संवाद के रूप में व्यक्ति कथा का पाठ करने लगे। शनैः-शनैः इन्हीं संवादों से नाटक अस्तित्व में आये। यूनानी नाटक कई बातों पर भिन्न थे यूनानी नाटक आदर्शवादी न होकर यथार्थवादी होते थे उनमें दुष्टात्माओं को दण्डित एवं पुण्यात्माओं को पुरस्कृत करके सत्य की विजय दिखाने की परम्परा थी।

यूनानी नाटकों में नारी प्रेम वर्जित था। इसलिये केवल अपवाद रूप में ही इनमें प्रणयिनी नारी के चरित्र को स्थान मिला है इसमें बहुत कम दृश्य रंगमंच पर प्रदर्शित किये जाते थे। अधिकांशतः पात्र घटनाओं का वर्णन अपने मुख से करते थे। प्राचीन संस्कृत नाटकों के समान ये कथानक लोकप्रिय धर्म- कथाओं पर आधारित होते थे। 


2. दुखान्त नाटक-तत्कालीन नाटककारों में एस्काइलस प्रमुख था यद्यपि उसके केवल सात नाटक ही उपलब्ध हैं, जबकि उसने 80 नाटकों की रचना की थी इनमें 'दि पार्शियन', 'ओरोस्टिया' तथा 'सेवेन अगेन्सट थी बीज विशेष उल्लेखनीय हैं तथा 'प्रोमेथियस बाउन्ड' सर्वोत्कृष्ट है। 'प्रोमेथियस बाउन्ड' की प्रशंसा गेटे, शैली तथा बायरन ने मुक्तकण्ठ से की है। श्लेगिल ने इसे 'दुखान्त नाटक का मूर्तिमान रूप' कहा है। अनेक विद्वानों ने उसकी 'ओरेस्टिया' नामक कृति की भी प्रसंशा की है। इसमें रूढ़िवादी भावनाओं की प्रधानता है। एस्काइलास भाग्यवादी तथा आस्तिकता में विश्वास करने वाला था। उसने अपनी रचनाओं से सांसारिक जीवन की सत्यता में अप्रीति एवं अविश्वास प्रकट करके सदाचार का पक्ष लिया है। उसने नाटकों को अनेक बार पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था। पेरिक्लीज युग का दूसरा प्रमुख यूनानी नाटककार 499-406 ई.पू. में साफोक्लीज हुआ था। साहित्य के साथ-साथ संगीत, मल्ल युद्ध तथा सामरिक जीवन में भी वह रूचि रखता था। एक बार सेनापति बनाकर उसे सेमोस के विरुद्ध भेजा गया था। यद्यपि उसके सात नाटक ही उपलब्ध हैं, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि उसने 113 दुखान्त नाटकों की रचना की थीं इनमें 'ओयडियस रेक्स', 'एण्टिगोन' तथा 'एलेक्ट्रा' विशेष उल्लेखनीय हैं। उसे 18 बार अपनी रचनाओं पर पुरस्कार प्राप्त हुआ था, जिनमें प्रथम पुरस्कार 15 वर्ष की आयु में तथा अन्तिम पुरस्कार 55 वर्ष, की आयु में मिला था। वह समन्वय का प्रेमी, मानवीय दुर्वलताओं पर उदारता से विचार करने वाला तथा प्रजातन्त्र का समर्थक 


3. सुखान्त नाटक - एरिस्टोफेनीज-यूनानी सुखांत नाटक दुखान्त नाटकों की बराबरी न कर सके। सुखान्त नाटककारों के विषय में हमें बहुत कम सूचनाएँ भी हैं इस दृष्टि से सर्वप्रथम ऐरिस्टोफिनीज (Aristophanes 448-380 B.C.) का उल्लेख किया जा सकता है इसका सम्बन्ध एक सुसंस्कृत एवं सुसम्पन्न परिवार से था। ईजाइना में इसकी अपनी जागीर थी। पेलोपोनेशियन युद्ध के आरम्भ के समय यह नवयुवक ही था। इस घटना से इसके नाटकों की विषय-सामग्री मिली। यद्यपि व्यक्तिगत जीवन में इसके आचरण में दोष दिखायी पड़ते हैं किन्तु सार्वजनिक मंच से इसने सच्चरित्र बनने की शिक्षा दी। एरिस्टोफेनीज की कृतियों द्वारा तत्कालीन यूनानियों के विषय में बहुत जानकारी मिलती हैं जीवन की साधारण पटनाओं से लेकर राजनीतिक, धार्मिक तथा सामाजिक कुरीतियों पर इसने लेखनी उठायी। एक राजनीतिक चिंतन की दृष्टि से यह राजतन्त्र का विरोधी था। स्वार्थ लोलुप राजनीतिक, दम्भी दार्शनिक तथा मूर्ख जनता तीनों इसके लिए उपहास के विषय थे। कहा जाता है कि इसने कुत 42 नाटकों की रचना की थी कित्तु उनमें से अब कैवल।1 उपलब्ध हैं जिनमें 'द फ्रांस (The Froges), 'द बईस (The Birds ), 'द क्लाउड्ज' (The Clouds), 'द वास्पस" (Tch Wasps), 'द लाक्षसिस्ट्रेटा' (The Lysistrata)ए तथा 'द पीस (Th. Peace), विशेष प्रसिद्ध हैं। 


काव्य रचनाएँ -पेरिक्लीज युग में पिण्डार यूनान का सबसे बड़ा कवि था। यद्यपि वह श्रीविज का रहने वाला था, परन्तु यूनान के अनेक राज्यों मेडसकी राजकवि के रूप में बड़ी प्रतिष्ठा थी। वह एक कुशल गायक तथा वीणा बजाने में भी निपुण था। उसकी रचनाओं में भी उसके संगीत प्रेम की छाप झलकती है। उसकी मृत्यु के पश्चात एथेन्सवासियों ने उसकी मूर्ति स्थापित करायी थी। उसकी कुछ पंक्तियाँ स्वाक्षरों में देवालयों पर अंकित करायी गई थीं। 


1. इतिहास -पेरिक्लीज युग में इतिहास की दशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई थी। यूनानी इतिहास का जन्मदाता हेरोडोटस इसी युग में हुआ था हेरोडोटस को इतिहासशास्त्र का पिता कहा जाता है। (Herodotus was tha father of history) । इस युग का दूसरा प्रसिद्ध इतिहासकार थ्यूसीडिडीज था। ध्यूसीडिडीज को वैज्ञानिक इतिहास का पिता कहा जाता है। हेरोडोटस की प्रसिद्ध रचना 'हिस्टरीज' है। इस ग्रन्थ में ईरान-यूनान के संघर्ष के इतिहास के साथ ही निकटवर्ती देशों के इतिहास का वर्णन तथा साहित्य, कला, विज्ञान, वेश-भूषा, धर्म तथा श्रृंगार-प्रसाधन जैसी बातों का भी विवरण है। इसी आधार पर इस ग्रन्थ को विश्व इतिहास की कोटि में रखा गया है इतिहासकार ध्युसीडिडीज का प्रसिद्ध ऐतिहासिक, प्रन्थ पेलोपोनिशियन वार' है। इसमें उसने स्पार्टा और एथेन्स का वर्णन किया है। मैकाज ने थ्यूसोडिडीज को महानतम इतिहासकार कहा है। 


2. भाषण लेखन -चौथी शती ई.पू. में यूनान में इतिहास-लेखन के साथ-साथ भाषण-लेखन भी एक व्यवसाय बन गया था। इस दृष्टि से आइसॉक्राटीज (Isocraates, 436-338 B.C.), डिमॉस्थनीज (Demosthenes, 384-322 B.C.) तथा चियोपोम्पस (Theopompus) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। आइसॉक्रटीज का जन्म एक समृद्ध परिवार में हुआ था। एक उद्योग के माध्यम से पिता ने अच्छी-खासी सम्पत्ति अर्जित कर ली थी अतएव, पुत्र की शिक्षा-दीक्षा में कोई कसर न छोड़ी भाषण कला की शिक्षा प्राप्त करने के लिये इसे थेसली-निवासी गॉर्जियस के पास भेजा गया किन्तु विधि के विधान को कौन टाल सकता है। भाग्य ने पलटा खाया और पेलोपोनेशियन युद्ध के परिणामस्वरूप व्यापार में पर्याप्त क्षति उठानी पड़ी। आइसॉक्रटीज के समक्ष लेखनी के अतिरिक्त अन्य विकल्प न था। अतः उसने इसी माध्यम से धन अर्जित करना प्रारम्भ किया। ई.पू. 391 में एथेंस की प्रसिद्ध भाषण-संस्था की स्थापना की। इसके अधिकांश भाषण लेख प्रतीत होते हैं। इसके द्वारा लिखित भाषणों में 'अगेंस्ट द सॉफिस्ट्स ' (Against the Sophistis), 'पैनेजिरिकस' (Panegyricus), आन पीस' (On the Peace), 'एरियोपेगिटिकस' (Areopagiticus), तथा पनैथिनेकस (Panathenaicus) विशेषतः उल्लेखनीय हैं। आइसॉक्रटीज यूनानी संस्कृति की विश्वजनीनता में विश्वास करता था। फारस के विरूद्ध वह यूनान की राष्ट्री एकता का समर्थक था। डिमॉस्थनीज ने मैसीडोन के शासक फिलिप तथा सिकन्दर के कृत्यों का विरोध किया। थियोपोम्पस ने अपने भाषण-ग्रन्थ हेलेनिका (Hellenica) तथा 'फिलिप्पिका' (Phillippica) में बताया कि युनान को यूरोप में अपनी शक्ति का प्रसार करना चाहिए। 


पेरिक्लीज युग का मूल्यांकन -पेरिक्लीज का शासन काल यूनान ही नहीं वरन विश्व-इतिहास में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा सामाजिक सभी दृष्टियों से पेरिक्लीज का युग स्वर्णिम आभार रखता है। राजनीतिक दृष्टि से इस युग में अत्यन्त सुव्यस्थित शासन और परिष्कृत लोकतन्त्र की स्थापना हुई थी। प्रो० बन्स के अनुसार The Athenian Democracy attained its full perfection in the age of pericles पेरिक्लीज का उद्देश्य एथेन्स को यूनान की रानी बनाने का था। अतएव इस दृष्टि से उसने साम्राज्य का विस्तार करने का प्रयास किया था। कोरिथ की खाड़ी के पश्चिमी भाग के उत्तरी तट पर उसने अपना प्रभुत्व स्थापित किया तथा मध्य यूनान तक को अपनी प्रभाव परिधि में ले लिया था। एथेन्स के प्रभुत्व को बनाये रखने के लिये उसने एक प्रकार से शक्ति-संतुलन के सिद्धान्त को अपनाया और अपने चिर-शत्रु स्पार्टा वे शत्रुओं को अपने पक्ष में मिलाकर अपनी स्थिति सुरक्षित रखी। पेरिक्लीज ने अपनी नीति से सामाजिक विषमता को दूर करने का प्रयास किया था। यद्यपि एथेन्स में उस समय निर्धन व्यक्तियों की संख्या अधिक थी, फिर भी उसने आर्थिक विकास को दूर करने का प्रयत्य किया। उसने अपनी आर्थिक नीति से एथेंस की आर्थिक समृद्धि का द्वार खोला था। उसने शिल्पियों को एथेन्स में बसाया था और उद्योग-धन्धों तथा वाणिज्य व्यवसाय के विकास के लिय हर संभव प्रयास किया था।

वास्तु कला और मूर्ति कला की दिशा में पेरिक्लीज युग में यूनान ने महत्वपूर्ण प्रगति की थी। पेरिक्लीज द्वारा निर्मित सभा भवन, संगीत भवन तथा पार्थेनान का भव्य देवालय, फिडियास, पाइथागोरस, माइनर तथा पोलिटिक्लीज जैसे मूति शिल्पियों द्वारा हाथी दाँत सुवर्ण और काँसे तथा संगमरमर की मूर्तियों तथा वास्तु कला की सहायिका के रूप में विकसित चित्र-कला और उसकी तीन प्रतिनिधि शैलियाँ यह सिद्ध कर देती हैं कि पेरिक्लीज एक युग पुरुष था और उसका युग स्वर्ण युग था।

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