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होमर युगीन सभ्यता पर निबन्ध

होमर युगीन सभ्यता पर निबन्ध 

1. समाज का संगठन-होमर के काव्यों में उन संस्थाओं व संगठनों का प्रारम्भिक चित्रण मिलता है जिन्हें आगे चलकर चूनानियों, रोमनों व जर्मनों ने प्रहण किया, अर्थात् शासनाध्यक्ष राजा परामर्थ के लिये समुदाय के प्रमुखजनों की परिषद बूले (Boule) व जनसभा अगोरा (Agora) थी। परन्तु प्राचीन काल में जिसका होमर के काव्यों में वर्णन है, समय की शक्ति राज्य में निहित ने होकर वस्तुतः परिवार में निहित थी। ग्रामीण एवं स्थानीय समाज अभी अपनी प्रारम्भिक अवस्था में थे। 


2. सामाजिक व्यवस्था-समाज रूढ़िवादी था। होमर की कथा राजाओं, सरदारों व सामन्तों की कथा है। इलियड के विषय में कहा गया है कि वह 'बलिष्ठतम जनों की सरलतम कथा है। इस प्रकार के समाज को विल करंट ने क्रीट व माइसानी के समाजों की अपेक्षा प्राथमिक एवं विधि विहीन समाज कहा है। वित दुरेन्ट के ही शब्दों में, "होमरयुगीन जीवन कला की दृष्टि से विपन्न व सक्रियता की दृष्टि से सम्पन्न हैं। उनके शिष्टाचार व दर्शन का उल्लेख करना उपयुक्त प्रतीत नहीं होता। वे योद्धा थे तथापि उनमें स्नेहभाव भी विद्यमान था। खेलकूद के प्रति उनमें असीम उत्साह था। परन्तु उसका विकृत पक्ष भी विद्यमान था। यह एक ऐसा अव्यवस्थित, उलझनपूर्ण, अस्त एवं क्षुब्ध समाज था जहाँ प्रत्येक व्यक्ति स्वयं अपना रक्षक था, धुनष-बाण व बळे आदि से युक्त था और शांतचित होकर रक्त प्रवाह देखने की क्षमता रखता था।" 

यहाँ की सामाजिक व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ निम्न थीं -

(क). पिता परिवार का मुखिया होता था, (ख). सबके सुख-दुःख का दायितव वहन करता था, (ग). इसका पद वंशानुगत होता था, (घ). यही राजा के सलाहकार समिति का सदस्य बनता था। 


3. सामाजिक वर्गीकरण-तत्कालीन समाज चार वर्गों में विभाजित था। 


(क). राजा व उसके सामंत सरदार आदि कुलीन जन, (ख), पुरोहित, गायक, चिकित्सक व कलाकार आदि, (ग), कृषक और (घ). दास। 


यह वर्गीकरण जन्मानुसार नहीं वरन कर्मानुसार था।

होमर ने स्त्री व पुरूषों को अतुलनीय शारीरिक सौन्दर्य, स्वास्थय एवं सौष्ठव से युक्त बताया है। प्रत्येक पुरुष को स्वस्थ, सुगठित बलिष्ठ देह वाला तथा प्रत्येक स्त्री को सीन्दर्य साकार प्रतिमा के रूप में निर्विष्ट किया है साथ ही उनके सौन्दर्य प्रेमी होने का भी उल्लेख मिलता है। सौन्दर्य वर्द्धन के लिये इत्र व सुगन्धित तेल आदि का प्रयोग किया जाता था। वे गुलाब के सुगन्धित तेल से शरीर को महकाते थे। सौन्दर्य वर्द्धन में केशों का विशेष महत्व था। पुरूष लम्बे केश व धनी दाढ़ियां रखते थे। केश अंत्यन्त मूल्यवान निधि समझे जाते थे। प्रिय मित्र की चिता पर केशों की लट अर्पित करना स्नेह का सूचक था। स्त्री-पुरूष दोनों ही आभूषण धारण करते थे।

स्त्री-पुरुष दोनों चौकोर वस्त्र धारण करते थे. जो पुटने सक लटकता था और कन्धो पर मोड़कर पिन या ब्रोच से अटका लिया जाता था पुरूष लुंगी पहन लेते थे और स्त्रियाँ नकाब व कमरपट्टा धनिक वर्ग के लोग बहुमूलय परिधान धारण करते थे। 


4. खान-पान -निर्धनों के भोजन में अन्न, मछली व सब्जियाँ शामिल थीं। वे राठी के स्थान पर लम्बे पतले केक का प्रयोग करते थे, जो तवे या गर्म पत्थर पर तैयार किये जाते थे। धनिक जन सामिष भोजन व मदिरा-पान करते थे। चीनी के स्थान पर शहद, मक्खन के स्थान पर वसा तथा पीने के लिए हल्की मंदिरा का प्रयोग किया जाता था। भोजन मेज पर, परन्तु चम्मचों के बजाय, हाथों से करना परन्द किया जाता था। 


5. निवास-गृह -प्रायः पत्थरों की नींव पर धूप में सुखाई गई ईटों से भवनों का निर्माण होता था। फर्श मिट्टी का होता था व छत नरकुल की जिस पर मिट्टी थोपी जाती थी। दरवाजे एक या दो पल्लों वाले होते थे। उनमें ताले की भी व्यवस्था थीं। अच्छे घरों में अन्दर दीवारों पर अलंकारिक चित्र सज्जा भी की जाती थी। रसोई में चिमनी व खिड़कियों का प्रायः अभाव था। धुयें के निकास के लिय छत में छिद्र होत थे। समृद्ध गृहों में स्नानागार व टव आदि अवश्य होते थे। फर्नीचर भारी लकड़ी का होता था जिसमें नक्काशी का काम भी होता था। भवन निर्माण में मन्दिरों की अपेक्षा राजप्रासादों पर विशेष ध्यान दिया जाता था। राजप्रसादों का निर्माण माइसीनी व टाइरोन्स प्रासादों के नमूने पर हुआ था। 


6. स्त्रियों की दशा -होमरकालीन समाज में स्वियों की दशा अच्छी थी। स्वियाँ प्रेरणा की स्रोत मानी जाती थी। सुन्दर स्त्रियों के लिये लोग युद्ध या संघर्ष तक करने को प्रस्तुत रहते थे। यूनानी नायक इस प्रकार संघर्ष कर नारियों को पुरस्कार के रूप में प्राप्त करने का प्रयास करते थे। ट्राय का युद्ध ट्राय की सुन्दरी तथा स्पाटो नरेश मेनोलोस की पत्नी हेलन के लिये किया गया था। ट्राय के राजकुमार ने उसका अपहरण किया था परिवार में नारियों का प्रमुख कार्य गृहकार्य था। गृहस्थी का संचालन करना बच्चों की देख-भाल करना उनका प्रमुख कार्य माना जाता था। पर नारियों का जीवन केवल परिवार की चहर- दीवारी तक ही सीमित नहीं था। उन्हें समाज के सार्वजनिक जीवन में भाग लेने की पूरी स्वतन्त्रता थी। समाज में वे गृह-लक्ष्मी के रूप में समादृत्त होती थीं। 


7. विवाह संस्कार-जहाँ तक विवाह का प्रश्न है होमर काल में विवाह वर-कन्या के पिता और वर द्वारा तय किये जाते थे। वर कन्या के पिता को मुँह माँगा मूल्य देकर कन्या को प्राप्त करने का अधिकारी हो जाता था होमरकालीन यूनान में स्त्रियों के क्रय-विक्रय की प्रथा प्रचलित थी। 


8. मृतक संस्कार दाह संस्कार किया जाता था। जलाकर दाह देते थे। कहीं-कहीं भूमि समाधि का भी ज्ञान मिलता है। ये अपने मृतकों को गाड़ते भी थे।

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