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श्वेतवसन अपराध के कारण एवं स्वरूप (प्रकार)

 श्वेतवसन अपराध के कारण एवं स्वरूप (प्रकार) 

श्वेतवसन अपराध के कारण - श्वेतवसन अपराध अलग-अलग समाज में अलग-अलग होते हैं, जिसके पीछे कई कारण मौजूद होते हैं। इन कारणों में प्रमुख हैं। 

(1) कानून की जटिलता - कानून की जटिलता का लाभ सफेदपोश अपराधी उठाते रहते हैं और कानून के शिकंजे से बचते रहते हैं। सामान्य व्यक्ति इन कानूनों को समझता नहीं। वह लोगों की चतुराई का शिकार होता है। श्वेतवसन अपराधी साधन सम्पन्न होते हैं बड़े-बड़े नेता, वकील, अधिकारी, उनकी सहायता करते हैं। इस तरह दण्ड से बचते रहते हैं। 


(2) पूँजीवादी व्यवस्था - श्वेतवसन अपराध पंजीवादी व्यवस्था की देन है। भौतिक सुख सुविधा को खोज में हर प्रकार का अनैतिक व अवैधानिक कार्य करने में संकोच नहीं होता। जैसे तैसे धन कमाना श्वेतवसन अपराध को प्रोत्साहित करता है। पूँजीपति धन के कारण अनेक हथकण्डे अपनाकर लाभ कमाने में सफल होते हैं। 


(3) कानून की जानकारी न होना - कानून जटिल होते हैं और सामान्य व्यक्ति को इनकी जानकारी कम होती है। इसका लाभ मालिक, महाजन और अधिकारी उठाते हैं। कोरे कागजों में हस्ताक्षर प्राप्त कर लिए जाते हैं। रसीदें लिखवा ली जाती हैं। फीस के नाम पर लम्बी रकमें वसूल की जाती हैं। कम से कम मुआवजे की रकम श्रमिकों को दी जाती है। 


(4) लापरवाही व अज्ञानता - सेठ, साहूकार बड़े चतुर होते हैं। वे लेन-देन सम्बन्धी इकरारनामों को पूरी तरह स्पष्ट नहीं करते तथा लोगों के हस्ताक्षर प्राप्त कर लेते हैं। अधिकांश लोग सहज विश्वासी होते हैं। अज्ञानता के कारण चतुर चालों और थोखे-धड़ी को नहीं समझ पाते। अतः वे इनके शिकार होते हैं। 


(5) दण्ड की कमी - श्वेतवसन अपराधी प्रायः दण्ड से बच निकलते हैं इन पर विधायक, मंत्री व प्रभावशाली लोगों का हाथ रहता है। इसलिए मनमाने काम करने पर भी ये कानून की गिरफ्त में नहीं आते। अपनी सम्मानित स्थिति का बे पूरा-पूरा लाभ उठाते हैं और लोगों की आंखों में धूल झोंकने में समर्थ होते हैं। 


(6) प्रभावशाली और पर्याप्त कानून न होना - श्वेतवसन अपराधी नये-नये अपराधिक कार्य करते हैं। इनसे निबटने के लिए पहले तो कानून ही नहीं होते और होते भी तो मे इतने प्रभावशाली नहीं होते कि इन्हें दण्डित किया जा सके। इसका लाभ इन अपराधियों को मिला है। वह अपराध पर अपराध करते रहते हैं और कानून से भी बचते रहते हैं। 


(7) धनी लोगों का सम्मान - समाज में धन का महत्व बढ़ा है। धन चाहे जैसे कमाया गया हो उसका समाज में सम्मान है। इसीलिए पैसा कमाने की होड़ बढ़ी है। धन अनेक बुराइयों पर पर्दा डाल देता है। अनुचित, अन्यायपूर्ण, अवैधानिक कार्य करने पर भी धनी लोग दण्ड से बचे रहते हैं। 


(8) गोपनीयता-श्वेतवसन अपराध इसलिए भी होते हैं कि इनकी प्रकृति बहुत गुप्त रहती है। ऐसे अपराध जनसाधारण के सामने तब तक स्पष्ट नहीं हो पाते जब तक उनकी सीमा बहुत अधिक नहीं बढ़ जाती। ऐसे अपराधों की प्रक्रिया तथा कार्य-प्रणाली भी बहुत गुप्त होती हैं। 


(9) व्यापार सम्बन्धी नैतिकता-व्यापार के क्षेत्र में नैतिकता व ईमानदारी का रतर गिरा है। जैसे-तैसे लाभ कमाना व्यापारियों का मुख्य उद्देश्य है। अपना उल्लू सीधा करने के लिए व्यापारी हर तरह के हथकण्डे अपनाता है। रिश्वत देता है राजनैतिक दबाव डालता है। फर्जी हिसाब-किताब रखता है। दो नम्बर की कमाई करता है। अपने को दिवालिया घोषित कर दायित्वों से बचता है। 


(10) लापरवाही-समाज में अनेक लोगों की लापरवाही के कारण भी समाज के सफेदपोश अपराधियों को अपराध करने का अवसर मिलता है और वे लोगों के साथ विश्वासघात करके सफेदपोश अपराध करते हैं, जैसे-बिना पढ़े और समझे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर देना पद के दायित्व को न सम्भालना आदि के कारण सपोदपोश अपराध को बढ़ावा मिलता है। 


(11) व्यापारिक विज्ञापन व्यापार में विज्ञापन का बड़ा महत्व है। इनमें झूठे विज्ञापनों की भरमार होती है जिनके शिकार अनेक भोले भाले लोग होते रहते हैं। इनमें बोगस कम्पनियों के शेयर, झूठे एजेण्टों के जाल, व्यापरियों द्वारा अग्निम धन वसूलना श्वेतवसन अपराध के कुछ उदाहरण हैं। 


श्वेतवसन अपराध के प्रमुख स्वरूप (प्रकार) श्वेतवसन अपराध के प्रमुख स्वरूप निम्नलिखित हैं- 


(1) रिश्वत-वर्तमान समाज में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा है जिसमें रिश्वत या पूस लेकर अनैतिक कार्यों को प्रोत्साहित न किया जाता हो। पुलिस विभाग, विद्युत विभाग दूर संचार विभाग एवं अन्य सभी सरकारी विभागों में बिना रिश्वत लिए कोई कार्य नहीं किया जाता है। अनेकों बार रिश्वत पैसों के रूप में न देकर वस्तुओं के रूप में दी जाती है, जिसे भेंट कहा जाता है। 


(2) पद का दुरुपयोग अनेकों राजकीय एवं गैर राजकीय अपराधियों द्वारा अपने पद का दुरुपयोग किया जाता है जो कि एक गम्भीर अपराध है। यद्यपि ऐसे अपराधों के लिए न तो अपराधी दण्डित हो पाता है और न ही इसे अपराध माना जाता है। (3) जालसाजी-सदरलैण्ड ने श्वेतवसन अपराध का प्रमुख स्वरूप विभिन्न प्रकार 


की जालसाजियों को ही माना है। इसका प्रमुख कारण यह है कि उच्च वर्ग के लोग अपनी 


प्रतिष्ठा की आड़ में जालसाजी के द्वारा लाभ प्राप्त करने में शीघ्र ही सफल हो जाते हैं। उदाहरणार्थ-जाली अंकतालिका या प्रमाण पत्र बनाना, जाली पासपोर्ट बनाना, बैंकों से दूसरों के हस्ताक्षर करके रुपया निकाल लेना, बीमा कम्पनी से झूठा क्लेम करके रूपया ले लेना, नकली दवायें बनाना, नौकरी का झूठा आश्वासन देकर रुपया ले लेना, फर्जी कागजों के आधार पर सरकार से कोई लाइसेंस ले लेना, धर्म के नाम पर चन्दा एकत्र करके अपने स्वार्थ में व्यय 


करना, जाली खाते तैयार करना एवं जालसाजी द्वारा वस्तुओं का आयात करना आदि। (4) गुप्त व्यवहार-अनेकों श्वेतवसन अपराध गुप्त रूप से लेकिन वैयक्तिक आधार पर किए जाते हैं। उदाहरणार्थ-प्रतिबन्धों के बावजूद भी शराब की पार्टियों देना, किसी की आड़ में 


अवैध धन्धे करना, जुओं के अड्डों का संचालन करना, व्यापारिक लाभ के लिए अधिकारियों के लिए वैश्याओं का प्रबन्ध करना एवं अनैतिक व्यापार का संचालन करना आदि। (5) चोरबाजारी एवं मुनाफाखोरी-व्यापारी अपने पास माल जमा करके उसे किसी भी प्राकृतिक संकट के समय जैसे-अकाल, बाढ़, अतिवृष्टि एवं सूखा आदि के समय ऊंची कीमतों पर बेचते हैं। इसी प्रकार कुछ अपना मकान या दुकान अधिक कीमत में बेचकर कम कीमत की रजिस्ट्री कराते हैं और कुछ लोग आयकर की चोरी करके काला धन बढ़ाते हैं। इस प्रकार के अपराध सामान्यतः व्यापारी वर्ग द्वारा ही किए जाते हैं। इन अपराधी के कारण देश की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पंगु होकर रह गयी है यद्यपि साधारण व्यक्ति द्वारा इनकी गम्भीरता का सही ढंग से आकलन नहीं किया जाता है। 


( 6 ) तस्करी-वर्तमान समय में तस्करी एक ऐसा अपराध है जो समाज के अति प्रतिष्ठत तथा सम्पन्न व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। जिन वस्तुओं का विदेशों में सरकार द्वारा आयात निर्यात बन्द कर दिया जाता है, उन्ही वस्तुओं को कुछ लोग विदेशों से आयात-निर्यात करते हैं। यह कार्य चोरी से किया जाता है इस प्रकार ये अत्यधिक मात्रा में धन भी कमाते हैं। तस्करी आर्थिक दृष्टियोण से अत्यधिक लाभपूर्ण कार्य होने के कारण बड़े-बड़े गिरोह द्वारा संचालित होती है। इस कार्य में एक से बढ़कर एक नेता व पूंजीपति भी शामिल होते हैं । 


(7) विश्वासघात तथा पड़यन्त्र-श्वेतवसन अपराधों के अन्तर्गत अनेकों विश्वासघात तथा षड्यन्त्र किए जाते हैं जो कानून की पकड़ से काफी दूर होते हैं। इसके अन्तर्गत निम्न अपराधों को शामिल किया जाता है। सरकार की गुप्त बातों को किसी दूसरे के सामने प्रकट कर देना, मिल-मालिकों द्वारा श्रमिक नेताओं का उत्पीड़न करना, राजनीतिक हत्यायें करवाना, झूठी गवाहियाँ देना, एवं अस्पतालों में नवजात शिशुओं को बदल देना।

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