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श्वेतवसन अपराध अर्थ एवं परिभाषा, विशेषता

श्वेतवसन अपराध अर्थ एवं परिभाषा, विशेषता

श्वेतवसन अपराध अर्थ एवं परिभाषा - सामान्य तौर पर श्वेतवसन अपराधी वे होते हैं जो श्वेत अथवा अच्छे वस्त्र धारण किये होते हैं और अपनी उच्च आर्थिक स्थिति की आड़ में अपने द्वारा किये गये अपराधों को छिपाने में सफल हो जाते हैं और अधिकांश कानून की पकड़ में नहीं आ पाते हैं। धर्म की आड़ में किये जाने वाले अपराध भी इस वर्ग में आते हैं। जहाँ निर्धन व्यक्ति अपराध किये जाने के बाद शीघ्र ही पकड़ लिया जाता है वहीं दूसरी ओर श्वेतवसन अपराधी धन के बल पर अपने हथकण्डों द्वारा लम्बे समय तक कानून के शिकंजे में नहीं आ पाते हैं। श्वेतवसन अपराध की अवधारणा डॉ. सदरलैण्ड ने विकसित की । इसके कई नाम है जैसे अभिजात्य अपराध, भद्रवर्गीय अपराध या सफेद पोश व उच्च वर्गीय अपराध। दरलैण्ड के अनुसार, "श्वेतवसन अपराध ऐसे अपराध के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो सम्मानित व उच्च सामाजिक स्थिति वाले व्यक्ति द्वारा व्यवसाय के दौरान किया जाता है। अर्थात् 'श्वेतवसन अपराध एक ऐसा अपराध है जो सुप्रतिष्ठित व उच्च सामाजिक स्थिति वाले व्यक्ति द्वारा अपने व्यवसाय के दौरान किया जाता है। उपरोक्त परिभाषा से स्पष्ट है कि, 'श्वेतवसन अपराध सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक आदि क्षेत्रों में उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त व्यक्ति द्वारा किया जाता है और जो सामान्यतया व्यक्ति की उच्च प्रतिष्ठा व पद के कारण कानून की पकड़ से बाहर होता है।' 


टैफ्ट ने श्वेतवसन अपराध की व्याख्या निम्न प्रकार की है-"श्वेतबसन अपराध उच्च वर्गों द्वारा किया गया एक प्रकार का अपराध है।" 


श्वेतवसन अपराध की विशेषताएँ - श्वेतवसन अपराध की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं - 


1. श्वेतवसन अपराधी उच्च एवं सम्मानित सामाजिक व आर्थिक वर्ग के सदस्य होते हैं जो व्यवसाय के कार्यकाल में अनेक अपराधी कानुनों का उल्लंघन करते हैं।

2. श्वेतवसन अपराधी इतने सम्मानित होते हैं कि इन पर सामान्यतः मुकदमा नी चलाया जाता है। यदि चलाया भी जाता है तो फौजदारी अदालत के स्थान पर दीवानी अदालत में इन पर मुकदमा चलाया जाता है। ये अपराधी प्राय: जुर्माना देकर अपराध मुक्त हो जाते है। कानून 

3. उच्च स्थिति व प्रभावशीलता के कारण श्वेतवसन अपराधी अपने विरुद्ध कोई पारित नहीं होने देते हैं ये लोग अदालत को भी अपने पक्ष में प्रभावित कर लेते हैं 4. खेतवसन अपराधी समाज सेवा व जनकल्याण में विशेष रूचि दर्शाते हैं। अनेक संस्थाओं को काफी धन व चन्दा देते हैं जिससे लोगों का मुह बन्द रहे। 

5. इस प्रकार के अपराध की प्रकृति मुख्यतः आर्थिक होती है। यह उच्चवर्गीय सदस्यों के व्यवसाय का एक अंग होता है। इनका उद्देश्य अवैधानिक तरीके से लाभ कमाना होता है। 

6. श्वेतवसन अपराध में विश्वासघात किया जाता है।

7. श्वेतवसन अपराधी प्रभावशाली लोग होते हैं । राजनैतिक क्षेत्र में इनका दखल होता है। अफसरों, नेताओं, जजों तक उनकी पहुँच होती है। 

8. श्वेतवसन अपराधी अपने धन बें पद के कारण न्यायाधीशों को अपने पक्ष में कर लेते हैं उनसे सम्पर्क रखते हैं, उन्हें भेंट देते रहते हैं ताकि अवसर आने पर उनसे अपने पक्ष में निर्णय करा सके। 

9. श्वेतवसन अपराध समाज के उच्च सामाजिक-आर्थिक वर्ग के सदस्यों द्वारा किया जाता है। 

10. श्वेतवसन अपराध आर्थिक प्रकृति के होते हैं जिनका उद्देश्य अधिकाधिक लाभ कमाना और भौतिक सुख-सुविधाएँ आप्त करना होता है।

11. इस प्रकार के अपराध मुख्यता शिकित्सको, कानून वेत्ताओं, शिक्षा अधिकारियों व्यापारियों, संसद सदस्यों, राजनेताओं, इंजीनियरों एवं उद्योगपतियों, आदि के द्वारा किये जाते हैं। 


भारत श्वेतवसन अपराध की समस्या - भारत में विभिन्न क्षेत्रों में श्वेतवसन अपराध की समस्या को निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है - 


(1) व्यापार के क्षेत्र में - व्यापारी एवं पुंजीपति वर्ग अत्यधिक धन कमाने के लालच में अनेकों प्रकार के अपराध करते हैं । जैसे-झूटा विज्ञापन देना, नकली वस्तुएँ बेचना, पेटेण्ट व ट्रेडमार्क तथा कॉपीराइट का उल्लंघन करना, गलत रिपोर्ट देना, श्रम | सम्बन्धी अनुचित कार्यवाही करना, आयकर की चोरी करना, पैसा छिपाने के लिए अपने आप को दिवालिया घोषित करना, कालाबाजारी, जमाखोरी एवं मिलावट आदि करना। 


(2) शिक्षा के क्षेत्र में - शिक्षा के क्षेत्र में भी अनेकों श्वेतवसन अपराध होते हैं। कुछ अध्यापक व कर्मचारी पैसे लेकर प्रश्न-पत्रों के प्रश्न बता देते हैं और उनके अंक बढ़ा देते हैं। अनेकों गैर-सरकारी शिक्षण संस्थाओं में अध्यापकों से अधिक बेतन में हस्ताक्षर कराकर कम वेतन दिया जाता है। निकों संस्थाओं द्वारा तो जाली प्रमाणपत्र भी जारी किए जाते हैं। 


(3) चिकित्सा क्षेत्र में - इस प्रकार के क्षेत्र में निम्न प्रकार के अपराध किए जाते हैं - 


(क) दवा कम्पनियों से सांठ-गांठ कर मरीजों को उनकी दवाएँ खरीदवाना,

(ख) मारपीट होने पर चोट लगने एवं बीमारी के झूठे प्रमाण- पत्र तैयार करना, 

(ग) परिवार नियोजन हेतु निर्धारित राशि में वृद्धि एवं अयोग्य व्यक्तियों के ऑपरेशन के झूठे आंकड़े देना एवं योजना राशि को हड़प लेना,

(घ) गर्भपात एवं भ्रूण हत्या करना,

(ङ) शराब एवं नींद लाने वाली औषधियों के प्रयोग के लिए प्रमाण-पत्र देना आदि। 


(4) न्याय के क्षेत्र में - इस क्षेत्र में निम्न प्रकार के अपराध होते हैं - 


(क) अपने पक्ष में निर्णय कराने के लिए न्यायाधीशों को रिश्वत देना,

(ख) बकील एवं सलाहकारों के द्वारा कानून की अस्पष्टता का लाभ उठाना, 

(ग) संसद सदस्यों को पेसा व चन्दा देकर अपने हितों के कानून बनवाना, 

(घ) झूठी गवाही देना आदि। 


(5) सरकारी क्षेत्र में - अनेको सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेकर ठेका दिलाने, जुआँ शयावृति करने, शराब पीने, किसी पद पर नियुक्ति करवाने एवं अन्य कानूनोंा मन करने आदि के अपराधी में गल्न होते हैं। 


6) ठेके के क्षेत्र में - ठेकदार अभियन्ताओं एवं ओदरसीयो आदि को रिश्यर बड़े बड़े ठेके प्राप्त कर लेत हैं। ठेकेदार भवन निर्माण एवं सडक निर्माण में ररीमेट के स्थान पर रेत में मिलावट करते हैं तथा सरकार प्राप्त भवन या सड़क निर्माण सामग्री को के बाजार में बेच लेते हैं। इसलिए ठेके पर बनाये गए भवन, महके ब पूल ् हो जाते हैं। ठेके पर किए गये कार्यों को एक बार अभियन्ताओं द्वारा पास कर दिए चार जाने के बाद ठेकेदारों की कोई जिम्मेदारी नहीं रह जाती है और ये ठकेदार अभिषनाओं को रिश्वत देकर अपने कार्य को पास करा लेते हैं। 


(7) श्रम एवं उद्योग के क्षेत्र में - वर्तमान समय में अम एवं उद्योग के क्षेत्र में भी श्वेतवसन अपराधों में वृद्धि हो रही है। चतुर लोग श्रमिक नेता बन जाते हैं। श्रमिक नेता उद्योगपतियों को हड़ताल, आदि का भय दिखाकर ब्लैकमेल करते हैं या फिर उनमें गुज्त समझौता कर लेते हैं। श्रमिक नेता सीधे-सादे श्रमिकों को बहकाकर हड़तालें, तोड़-फोड भेराव एवं प्रदर्शन आदि करवाते हैं। सामान्यतः वे पूंजीपतियों से मिलकर लाभ कमाते हैं और অमिकों के साथ विश्वासघात करते हैं।

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