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लार्ड सभा के कार्य एवं अधिकार

 लार्ड सभा के कार्य एवं अधिकार 

 ब्रिटिश संसद सम्राट लोक सदन और लार्ड सभा का सम्मिलित रूप है। लोक सदन ब्रिटेन की संसद का प्रथम और दूसरा सदन लार्ड सभा है। ब्रिटिश के संवैधानिक इतिहास का अवलोकन करें तो ज्ञात होता है लोकसभा दोनों सदनों प्राचीन सदन है। लार्ड सभा की इंग्लैण्ड की लोकतन्त्रात्मक प्रणाली में एक कुलौन तन्त्रीय कहा जा सकता है, क्योंकि इसकी सदस्यता का मूल आधार वंशानुगत प्रणाली है। बीसवीं शताब्दी के अन्त तक इंग्लैण्ड की राजनीति में लार्ड सभा को लोक सदन से अधिक महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त था। किन्तु वर्तमान समय में स्थिति में परिवर्तन अ गया है और लार्ड सभा न केवल द्वितीय वरन् द्वितीय महत्त्व का सदन हो गया है। लार्ड सभा की संरचना (संगठन)

लार्ड सभा कामन सभा के समान निर्वाचित सदन नहीं है। इसके लगभग 85% सदस्य वंशानुगत होते हैं इसके सदस्यों की संख्या निश्चित नहीं है। यह घटती-बढ़ती रहती है। वर्तमान में इसकी संख्या 1080 है।

अत: इस प्रकार इसके सदस्यों में निम्न प्रकार के सदस्य होते हैं। लार्ड सभा के सदस्यों को निम्नलिखित सात वर्गों में बांटा जाता है।

1. राजवंश का राजकुमार-राजवंश के कुछ राजकुमारों को उसकी सदस्यता प्रदान की जाती है। बर्ग इस के सदस्यों की संख्या किसी भी एक समय तीन या चार होती है। 

2. बारात-लार्ड सभा के लगभग 85% लोग इस प्रकार के हैं। पीयर पद प्राप्त किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका ज्येष्ठ पुत्र उत्तराधिकारी के रूप में यह पद प्राप्त कर लेता है।

3. स्कॉटलैण्ड के प्रतिनिधि पीयर-सन् 1963 में पियरेज एवं के पास होने से पूर्व स्कॉटलैण्ड के  16 निर्वाचित प्रतिनिधि लार सभा में बैठते थे। परन्तु अब पीयरेज एक्ट के स्कॉटलैंड ने सब पीरों के लाई सभा में बैठने का अधिकार दे दिया। 

4. आजीवन पीयर-ये आयरलैण्ड के प्रतिनिधि पीयर है, जो आजीवन सदस्य रहते हैं। सन् 1922 में आयरलैण्ड स्वतन्त्र हुआ, तब वे नवीन पितरों का मनोनयन बन्द हो गया।

5. आध्यात्मिक लार्ड-इस वर्ग में 26 घूम के प्रतिनिधि पीयर होते हैं। सभी आध्यात्मिक पीयर अपने पदों के कार्यकाल में लाई सभा के सदस्य बने रहते है। 6. विधि लगाई-इस वर्ग में 9 विधि लाए हैं जिन्हें अपील के ला्ड भी कहा जाता है। लार्ड सभा इंग्लैंड का सर्वोच्च न्यायालय है, अतः विधिक लाखों का होना आवश्यक हैं। इसके अतिरिक्त सन् 1958 के लाइफ पीयरेज एक्ट के अनुसार लार्ड सभा के जीवन पर्यन्त पीयर नियुक्त किए जाते हैं। इसके अन्तर्गत वरिष्ठ नेताओं की नियुक्ति की जाती है।

लार्ड सभा की शक्तियाँ अधिकार एवं कार्य- लाई सभा की शक्तियाँ सदैव परिवर्तित होती रही हैं शक्ति की दृष्टि से वर्तमान लाई सभा को1911 के पूर्व की लार्ड सभा की छाया मात्र ही कहा जा सकता है। लेकिन वर्तमान में लार्ड रंभा को जो शक्तियाँ प्राप्त है। वे निम्न रूप में है-

(1)विधायी शक्तियों-वित्त विधेयक के अतिरिक्त अन्य सभी विधेयक ब्रिटिश संसद के किसी भी सदन में प्रस्तावित किये जा सकते हैं अनेक अवसरों पर अवित्तीय विधेयक लार्ड सभा में पहले प्रस्तावित भी किये गये और इस सभा ने उन पर बड़ा उपयोगी कार्य किया है। लोकसदन में पारित होने के बाद भेजे गये विधेयकों पर भी लार्ड सभा पूर्ण रूपेण विचार करती और इसमें वह अनेक ऐसे संशोधन करती है जिन्हें लोकसदन औचित्य के कारण स्वीकार कर लेता है किन्तु विधेयकों के सम्बन्ध में अंतिम निर्णय की शक्ति लोकसदन को ही प्राप्त है। इस प्रकार लाई सभा विधेयकों को प्रस्तावित करने एक वर्ष की अवधि के लिए उन्हें रोके रखने और अपने विचारों के आधार पर सरकार तथा जनता को प्रभावित करने का कार्य करती है। 

(2) वित्तीय शक्तियां-वित्तीय क्षेत्र में पार्ट समाज की स्थिति लोकसदन की तुलना में बहुत दुर्बल है वित्त विधेयक न तो पहले लार्ड सभा में प्रस्तावित किये जा सकते हैं और न ही लाई भी विचार करने की प्रक्रिया में उन्हें अनिश्चित काल तक रोके रख सकती है यह वित्त विधेयक को केवल एक माह तक रोके रखने का कार्य कर सकती है। 

(3) कार्यपालिका से सम्बन्धित शक्तियाँ-ब्रिटिश मन्त्रिमण्डल के लगभग चार सदस्य लाई सभा में से लिए जाते हैं और लार्ड सभा का अध्यक्ष, जिसे लार्ड चालसलर कहते हैं, आवश्पक रूप से ब्रिटिश मंत्रिमण्डल का सदस्य होता है। लोकसदन की भौति ही लार्ड सभा को भी अधिकार प्राप्त है कि मंत्रिमण्डल के सदस्यों से प्रश्न पूछ कर प्रशासनिक विषयों के सम्बन्ध में सूचनाएँ प्राप्त कर सके। वह शासन की नीतियों तथा कार्यों पर खुला वाद विवाद तथा आलोचना भी कर सकती है। इसके अतिरिक्त लाई सभा विभिन्न प्राशासनिक विभागों द्वारा किये गये प्रदत्त व्यवस्थापन की जाँच कर सकती है। 

(4) न्यायिक शक्तियाँ- ला् सभा को न केवल व्यवस्थापन वरन् न्याय के क्षेत्र में भी कुछ शक्तियाँ प्राप्त है। न्याय के क्षेत्र में उनकी शक्तियाँ निश्चित रूप से महत्त्वपूर्ण हैं इसके द्वारा ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैण्ड के लिए अपील के उच्चतम न्यायालय के रूप में कार्य न किया जाता है। लाई सभा जब अपील के न्यायालय के रूप में कार्य करती है तब ठसके सब । सदस्य कार्यवाही में भाग नहीं लेते, वरन् उस समय 9 कानुनी लार्ड तथा अन्य न्यायिक विशेषज्ञ, चान्सलर की अध्यक्षता में न्याय समीति के रूप में कार्य करते हैं। लार्ड सभा का निर्णय अंतिम होता है।

लार्ड सभा की आलोचना- यंशानुगत आधार पर संगठित होने के कारण 20वीं सदी के प्रारम्भ से ही लार्ड समा निरन्तर आलोचना की पात्र रही है। और वर्तमान समय में लार्ड सभा की जितनी अधिक आलोचना की जाती है, टोनी ब्रिटिश राजनीतिक व्यवस्था की अन्य किसी भी संस्था की नहीं। लाई सभा की आलोचना के प्रमुख आधार इस प्रकार हैं 

1. लोकतंत्र संस्था-लार्ड सभा के लगभग 10 प्रतिशत सदस्य वंशानुगत आधार पर अपना पद प्राप्त करते हैं, जो लोकतन्त्रीय प्रणाली के पूर्णतया विरुद्ध है। 

2.निहित स्वार्थों का दुर्ग-प्रतिनिधि संस्था के द्वारा समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्त्व किया जाना चाहिए, लेकिन लॉर्ड सभा के एक ही वर्ग (घनीमानी बर्ग) का प्रतिनिधित्व करती है। जबकि अन्य देशों के ठुच्च सदनों के सदस्य विभिन वर्गों और हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

3. अनुदार दल की स्थायी प्रभुता- प्रतिनिधि संस्था को जनभावनाओं की प्रतिबिम्ब होनी चाहिए और जनभावनाओं में परिवर्तन होने के साथ साथ इन संस्थाओं के अन्तर्गत दलीय स्थिति में भी परिवर्तन होना चाहिए, लेकिन लाई सभा के सम्बन्य में ऐसा नहीं है। लार्ड सभा 1080 सदस्यों में से हमेशा अनुदार दल के सदस्य सबसे अधिक रहते हैं। 

4. सदस्यों की उदासीनता- लार्ड सभा के विरुद्ध सबसे बड़ा आरोप यह है कि यह ऐसे व्यक्तियों की संस्था है जिसके अधिकांश सदस्य प्राय: अनुपस्थित रहते हैं और सदन के कार्यों में कोई रुचि नहीं लेते।

5. दोष पूर्ण प्रक्रिया- लार्ड सभा की प्रक्रिया सम्बन्धी दोषों ने भी इसे एक महत्त्व संस्था बना दिया है। 1000 से अधिक सदस्य संख्या वाले इस सदन में गणपूर्ति संख्या ती जबकि लोक सदन में गणपूर्ति संख्या 40 है। 

6. विधायी और कार्यकारी शक्ति की निरर्थकता- 191। और 1949 के संस अधिनियम के परिणामस्वरूप कानून निर्माण के क्षेत्र में लार्ड सभा की स्थिति बहुत निर्वल गयो है। लार्ड सभा का कार्यपालिका पर कोई नियंत्रण नहीं है, क्योंकि मंत्रिमण्डल लोक के प्रति उत्तरदायी होता है।

यद्यपि शक्तियों की दृष्टि से लार्ड सभा बहुत अधिक निर्भर है और रचना के आधार बहुत अधिक दोपूर्ण कहा जाता है, फिर भी सामान्य विचार यही है कि लार्ड सभा में परिस्थिति के अनुसार आवश्यक सुधार करते हुए इसे बनाए रखा जाये।

लार्ड-सभा का सुधार

सुधार की समस्याएँ-ब्रिटिश राजनीतिज्ञों तथा संविधान नेताओं के समक्ष लाई-सभा के सुधार का प्रश्न एक विकट समस्या है। आज यह दोषपूर्ण तथा प्रभावहीन संस्था हो गयी है। लेकिन इसे समूल नष्ट नहीं किया जा सकता, बल्कि इसमें सुधार कर इसके विभिन्न दोषों को दूर करना होगा जिससे यह जनता के विभिन्न हितों का प्रतिनिधित्व कर सके, उसके बदले लोक-सभा तथा सरकार पर नियन्त्रण रख सके। संसद की द्वितीय स्तरीय तथा सहायक अंग बन सके। इन उद्देशयों की पूर्ति के लिए इसके विभिन्न पहलुओं में सुधार लाना होगा सदस्यों की संख्या में कमी कर इसे छोटा तथा ठोस निकाय का रूप देना चाहिए। सदस्यों की योग्यता में भी वृद्धि होनी चाहिए. जिससे यह गुणवान बुद्धि जनों तथा अनुभव जन-सेवकों की सभा बन जाय। इसके लिए पीयरों की नियुक्ति को प्रणाली में सुधार लाना होगा। इसकी रचना में इस प्रकार का सुधार करना होगा कि इसके सदस्य निष्पक्ष तथा निर्दलीय रूप से विचार-विनिमय कर सके तथा यह सभा न तो निहित स्वारर्थों का गढ रहे और न अनुदार -दल की अन्धी समर्थक तथा मजदूर दल की विरोध ही। किसी भी सरकार के अन्तर्गत इसे एक सहयोगी संस्था का काम करना है संगठन के अतिरिक्त इसके अधिकार और कर्तव्य में भी सुधार लाना होगा। आज इसके अधिकतर सदस्य इसकी कार्यवाहियों में दिलचसपी नहीं लेते। इसके अतिरिक्त लोकसभा की तुलना में इसी निःशक्त तथा प्रभावहीन बना दिया गया साधारणतया धन-विधेयक के सम्बन्ध में इसकी आवाज नहीं के बराबर ही सुनी जाती है। 

अतः इसकी शक्तियों और कार्यों पुनर्विचार कर उन्हें नया कलेवर देना होगा अन्त में इसकी कार्य विधि प्रक्रियाओं आदि पर भी ध्यान देना चाहिए जिससे यह अपनी शक्तियों का प्रयोग प्रभावपूर्ण तरीके से कर सके इन समस्याओं में सबसे मौलिक समस्या इसके संगठन की है। सुधार के मार्ग में कठिनाइयाँ-सुधार सम्बन्धी सुझावों का विश्लेषण करने से पहले हमेइस सम्बन्ध में कुछ कठिनाइयों पर ध्यान देना चाहिए। अंत: मुख्यतः दो कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है-ब्रिटिश जाति की परम्परावादी प्रकृति तथा राजनीतिक दलों को मत-विभिन्नता अंग्रेज स्वभाव से ही परम्परावादी है। वे पुराने विचारों तथा उनकी रक्षा करते हैं जब तक कि वे असह्य न हो जाय इस प्रकार वे क्रान्तिकारी सुधार या समूल विनाश के पक्ष में कभी नहीं रहते अतः लार्ड सभा सुधार का प्रस्ताव प्रस्तुत करने के पहले राजनीतिक दलों को जनता के नाड़ी को पहचानना आवश्यक होगा।

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