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विश्व की सांस्कृतिक प्रदेशों में विभाजन तथा प्रमुख विशेषताए

विश्व की सांस्कृतिक प्रदेशों में विभाजन तथा प्रमुख विशेषताए 


विश्व के आधुनिक सांस्कृतिक परिमंडल (Modern Cultural Realms of the World)

स्पेंसर और थामस द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक परिमंडल अधिक स्पष्ट और वास्तविक जगत के निकट है यद्यपि इसमें ध्रुवीय क्षेत्र को पृथक स्थान नहीं प्रदान किया गया है। रसेल एवं निफेन ने स्पेंसन एवं थामस के कई परिमंडलों को मंडलों (worlds) के रूप में और कुछ क्षेत्रों (sectors) को परिमंडल माना है। इसमें परिमंडलों तथा उनके उपविभागों (प्रदेशों) की संख्या बहुत अधिक हो गयी है जिसके कारण वास्तविक स्थिति प्रकट नहीं हो पाती है। ब्रोयक द्वारा कई सुस्पष्ट सांस्कृतिक परिमंडलों को पाश्चात्य सांस्कृतिक परिमंडल का अंग ही बताया गया है। वास्तव में पाश्चात्य आवश्यकता है ऐसे वर्गीकरण की जो भौगोलिक विस्तार तथा सामान्य सांस्कृतिक विशेषता दोनों ही दृष्िकोण से पूर्ण, स्पष्ट और तार्किक हो। इसी दृष्टिकोण से किये गये वर्गीकरण के अनुसार विश्व के प्रमुख सांस्कृतिक परिमंडल निम्नलिखित हैं

1. आंग्ल अमेरिकी परिमंडल (Anglo American Reaim),

2. लैटिन अमेरिकी परिमंडल (Latin American Realm),

3. उत्तरी-पश्चिमी यूरोपीय परिमंडल (N.W. European Reaim).

4 . पूर्वी यूरोपीय रूसी परिमंडल (East European-Russian Realm)

5. भूमध्य सागरीय परिमंडल (Mediterranian Reaim)

6. शुष्क मुस्लिम परिमंडल (Dry Muslim Realm)

7. नीग्रो-अफ्रीकी परिमंडल (Negro-Alnico Realm)

8.दक्षिण एशियाई परिमंडल (South Asian Realm)

9.पूर्वी एशियाई परिमंडल (East Asian Realm)

10. दक्षिण-पूर्व एशियाई परिमंडल (S.E.Asian Realm)

11. आस्ट्रेलियाई प्रमंडल (Australian Realm)

12. प्रशांत परिमंडल (Pacific Realm) लैटिन अमेरिकी सांस्कृतिक परिमंडल (Latin American Cultural Realm)- लैटिन अमेरिका के अंतर्गत मैक्सिको और मध्य अमेरिका सहित सम्पूर्ण दक्षिणी अमरिका महाद्वीप सम्मिलित है। इस व्यापक प्रदेश में दक्षिणी-पश्चिमी यूरोपीय देशों से आये हुए लोग बस गये हैं जिनकी भाषा लैटिन है। इसीलिए इसे लैटिन अमेरिका के नाम से जाना जाता है । भूमध्य रेखा इसके लगभग मध्य से गुजरती है। इस प्रकार केवल दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी भाग को छोड़कर अधिकांश लैटिन अमेरिका उष्ण तथा उपोष्ण कटिबंध में स्थित है जहां गर्मी अधिक पड़ती है। लैटिन अमेरिका परिमंडल अन्य भौगोलिक दशाओं की भांति मानव निवास के विषय में विविधताओं का महाद्वीप है। लगभग 150-200 वर्ष पूर्व इस सम्पूर्ण क्षेत्र में अमेरिका के मूल आदिवासी रहते थे। यद्यपि वे यत्र-त्र बिखरे हुए क्षेत्रों में और कम संख्या में थे उस समय मध्य अमेरिका और मैक्सिको के निवासी स्थायी कृषि और पशुपालन करते थे। इन्हें अमेरिकी इंडियन या रेड इंडियन के नाम से जाना जाता है।ये मंगोलाइड और नीग्रो या नीग्रिटो की मिश्रित प्रजाति के बताये जाते हैं। अमेजन के सघन वनों में आज भी बोरोनामक आदिवासी आखेट तथा जंगली वस्तुओं का संग्राह करके जीवन बिताते हैं। जब यूरोपीय देशों से आने वाले लोगों ने यहां अपने उपनिवेश स्थापित करना आरंभ किया, तब यहाँ के आदिवासियों को मार डाला अथवा दास बनाया बचे हुए लोग भागकर दुर्गम जंगलों और पहाड़ियों में शरण लिए और आज भी आदिवासी जीवन बिता रहे हैं। सत्रहवीं से उन्नीसवीं शताब्दी तक यूरोपीय प्रवास का मुख्य उद्देश्य नवीन क्षेत्रों में उपनिवेश स्थापित करना था। अंग्रेजों ने उत्तरी अमेरिका तथा आस्ट्रेलिया के शीतोष्ण भागों को प्राथमिकता दी क्योंकि यहाँ की जलवायु अंग्रेजो के निवास योग्य थी। दक्षिण-पश्चिमी यूरोप के देशों ने उपनिवेश स्थापना के लिए उष्ण एवं उपोष्ण कटिबंधीय अमेरिकी क्षेत्रों को चुना। स्पेन, पुर्तगाल, फ्रांस, इटली आदि देशों ने अलग-अलग प्रदेशों में अपने-अपने उपनिवेश स्थापित किये। उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ तक यूरोप में जनसंख्या का दबाव बहुत अधिक नहीं था जिसके कारण बहुत से परिवार समुद्र पार प्रवास के लिए तैयार नहीं थे। किन्तु उन्नीसवीं में प्रवास की लहर हो गयी और उत्तरी तथा दक्षिणी दोनों अमेरिकाओं पर यूरोपीय साम्राज्य का विस्तार हो गया। इस प्रकार 20वीं शताब्दी तक सम्पूर्ण दक्षिणी एवं मध्य अमेरिका यूरोपीय लोगों से भर गया। आज के लगभग 90 प्रतिशत लैटिन अमेरिकी लोगों के पूर्वज यहाँ यूरोपीय देशों से आये थे। अधिकांश जनसंख्या सागर तटीय भागों में पायी जाती है। मैक्सिको सहित लैटिन अमेरिका के सभी देश विकाशील देशों की श्रेणी में आते हैं इन देशों में पूँजी अभाव, शक्ति संसाधनों की कमी, कुशल श्रमिकों की कमी और पिछड़ी प्रौद्योगिकी के कारण संसाधनों के विदोहन तथा विकास की दर अत्यंत निम्न है। मध्य अमेरिका तथा उत्तरी पश्चिमी दक्षिण अमेरिका के देश आकार में छोटे हैं और जनसंख्या का घनत्व अधिक है।
 यहाँ की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था प्रायः अकाल, बाद, निर्धनता, बेरोजगारी आदि के दुष्चक्र में फसा रहता है। ब्राजील, अर्जेंटीना, पैराग्वे, उरुग्वे जैसे बड़े देशों में संसाधन अधिक है किन्तु कुशल श्रम तथा प्रौद्योगिकी के अभाव में यथोचित उन्नति नहीं हो पा रही है। यद्यपि कुछ भागों में औद्योगीकरण हुआ है किन्तु अधिकांश देश कृषि प्रधान हैं। पश्चिमी द्वीप समूह में क्यूबा तथा कुछ मध्य अमेरिकी देश भी कृषि प्रधान हैं। क्यूबा गन्ना उत्पादन के लिए विश्वख्यिात है। मैक्सिको, मध्य अमेरिका तथा उत्तरी दक्षिण अमेरिका में उष्ण कटिबंधीय फसलें जैसे चावल, गन्ना, चाय, कहवा, रबड़, मसाले आदि उत्पन्न होती है जबकि शीतोष्ण कटिबंधीय घास प्रदेशों (पम्पास) में गेहूँ की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इसके साथ ही मैक्सिको, ब्राजील. इक्वेडोर, चिली, अर्जेंटीना आदि देशों के सागर तटीय भागों में कई प्रकार के औद्योगिक केन्द्र भी विकसित हैं। यहाँ के उद्योगों में सीमेंट, वस्र, खाद्य पदार्थ, चमड़ा, मोटरगाड़ी, रसायन, चीनी आदि के उद्योग प्रमुख हैं।
नाम से ही स्पष्ट है कि सम्पूर्ण लैटिन अमेरिका में लैटिन भाषा की प्रमुखता है। लैटिन एक भाषा समूह का नाम है जिसे रोमांस भाषा (Romance Language)भी कहते हैं। लैटिन भाषा समूह के अंतर्गत सम्मिलित प्रमुख भाषाएं हैं फ्रेंच, इतालवी (इटैलियन), स्पेनी, पुर्तगाली, रूमानियन,प्रोवेन्कल, केटेलन आदि। लैटिन भाषा दक्षिणी-पश्चिमी यूरोपीय देशों-स्पेन,पुर्तगाल, फ्रांस, इटली आदि के उपनिवेश मैक्सिको से लेकर दक्षिण अमेरिका के अधिकांश भागों पर थे। इसके कारण इस सम्पूर्ण भूमि पर लैटिन भाषा की प्रमुखता है यद्यपि किसी देश की आधिारिक भाषा फ्रेंच है तो किसी की स्पेनी या पूर्तगाली। मैक्सिको, पनामा, होंडुरास, अर्जेंटीना, कोलम्बिया, ग्वाटेमाला, वेनेजुएला, इक्वाडोर, उरुग्वे, पराग्वे, कोस्टारिका, क्यूबा, जमैका, एल सल्वाडोर आदि देशों की प्रमुख भाषा स्पेनी है। ब्राजील की मुख्य भाषा पुर्तगाली है। फ्रेंच गुयाना और हैटी में फ्रांसीसी (फ्रेंच), सूरीनाम और अरूबा में डच और ब्रिटिश गाना में अंग्रेजी भाषा का प्रमुख स्थान हैं । सामान्यतः लैटिन अमेरिका के सभी देशों में इसाई धर्मावलम्बियों का प्रभुत्व है। लैटिन अमेरिका में लगभग 40 करोड़ लोग ईसाई धर्म को मानने वाले हैं। इसाई धर्म वर्तमान समय में कई शाखाओं (सम्प्रदायों)में विभक्त है जिन्हें रोमन कैथोलिक, पूर्वी कट्टरपंथी (Eastern Arthodox) तथा प्रोटेस्टेंट प्रमुख हैं। लैटिन अमेरिका में अधिकांश ईसाई रोमन कैथोलिक (Roman Catholic) सम्प्रदाय के हैं। इस सम्प्रदाय के लोग चर्च को अधिक महत्व देते हैं। ईसाई धर्म के कैथोलिक सम्प्रदाय की क्षेत्रीय संस्तरण व्यवस्था अन्य की तुलना में अधिक विकसित है।

अधिकांश लैटिन अमेरिकी देश कला तथा प्रौद्योगिकी की दृष्टि से पिछड़े हुए हैं। कई देशों में पर्याप्त भूमि तथा संसाधन विद्यमान होते हुए भी उन्नत प्रोद्योगिकी के अभाव में विकास की गति मन्द्र है। ब्राजील, अर्जेंटीना आदि इसके उदाहरण हैं। मैक्सिको तथा मध्य अमेरिकी देशों में संसाधन तथा प्रौद्योगिकी के साथ ही पूँजी का अभाव भी प्रगति के मार्ग में बाधक है। यहाँ की आधनिक प्रौद्योगिकी सामान्यतः यूरोप से आयातित है जिसका प्रयोग यूरोप के पश्चात यहाँ कुछ देर से हो पाता है। लैटिन अमेरिका में विभिन्न कारणों से औद्योगीकरण कम हुआ है जिसके कारण यूरोप और उत्तरी अमेरिका की भांति नगरीकरण नहीं हो पाया है। किन्तु कई देशों की 75 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या नगरों में निवास करती है और कुछ देशों में नगरीकरण के तीव्र होने की प्रवृत्ति है। युरूग्वे, अर्जेंटीना, वेनेजुएला, चिली और ब्राजील की 75 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या की निवास नगरों में है। पराग्वे, मैक्सिको और कोलम्बिया में नगरीकरण का स्तर 60 प्रतिशत से ऊपर है। सांस्कृतिक प्रदेश (Cultural Regions)- भाषा, अर्थव्यवस्था तथा जीवन पद्धति में अंतर के अनुसार लैटिन अमेरिका को निम्नलिखित उपविभागों में विभक्त किया जा सकता है-

 1. मैक्सिको-कृषि प्रधान तथा स्पेनी भाषा देश।

2. मध्य अमेरिका-लघु संसाधन, अति जनसंख्या, स्पेनी भाषा।

3.क्यूबा एवं कैरीबियन द्वीप-कृषि की प्रमुख तथा स्पेनी के साथ अंग्रेजी भाषा।

4. गुयाना- फ्रेंच और अंग्रेजी भाषा।

5. उत्तरी तट एवं उच्च भूमि-कृषि, पशुचारण तथा स्पेनी भाषा।

6. ब्राजील - विस्तृत क्षेत्र, संसाधन बाहुल्य एवं पुर्तगाल भाषा।

7. चिली अर्जेंटीना-उरुग्वे-गेहूँ प्रधान कृषि, पशुपालन तथा स्पेनी भाषा।

৪. फाकलैण्ड द्वीप समूह-लगभग जन विहीन क्षेत्र।

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