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सोमवार, 6 जुलाई 2020

रूस के विकास के लिए स्टालिन द्वारा किए गये प्रयास

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रूस के विकास के लिए स्टालिन द्वारा किए गये प्रयास 

जोजफ स्टालिन (जोजफ विजरिमोनविच जुगाशवली) मार्क्स एवं लेनिन के विचारों का पक्षधर था लेनिन की मृत्यु के पश्चात् सत्ता प्राप्त करने के बाद उसके सामने कठिन समस्या देश के आर्थिक पुनर्निर्माण की थी। स्टालिन का विश्वास था कि रूस का पिछड़ापन योजनाबद्ध विकास द्वारा ही दूर हो सकता है, इसीलिए उसने 1925 ई० में योजना आयोग की नियुक्ति की जिसके द्वारा पंचवर्षीय योजनाओं (पायातिलेतफा) की शुरुआत हुई। स्टालिन के नेतृत्व में से 1936 से रूस का नया संविधान शुरू हुआ जो आज तक लागू है रूस के विकास के लिए गृहनीति के क्षेत्र में स्टालिन ने निम्नलिखित उल्लेखनीय कार्य किये

1.पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत-रूस में प्रथम पंचवर्षीय योजना 1928 ई० से 1934 ई०,द्वितीय 1934 ई० से 1939 ई० तक तथा तृतीय योजना 1939 ई० में शुरू हुई थी कि तभी द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया। इन्ही पंचवर्षीय योजनाओं ने रस को यूरोप का सर्वोत्कृष्ट देश बना दिया।

 (A) प्रथम पंचवर्षीय योजना -कृषि के क्षेत्र में खाद्य और कृषि उत्पादन को बढ़ाना तथा सामूहिक खेती तथा राजकीय फामों को संख्या में वृद्धि कर कृषि का समाजीकरण करना दो उद्देश्य थे लेकिन कुलकों (धनिक कृषकों) की तीव्र प्रतिक्रिया के कारण आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिल सकी। जहाँ तक औद्योगिक क्षेत्र का सवाल है तो उसमें आश्चर्यजनक सफलता मिली।

(B) द्वितीय पंचवर्षीय योजना-द्वितीय पंचवर्षीय योजना प्रथम योजना से अधिक युक्तिसंगत थी। इस योजना के अन्त तक 93% किसानों ने सामूहिक प्रणाली को अपना लिया। अब रोटी की समस्या का अन्त होने के कारण 1935 ई० ने राशनिंग प्रणाली समाप्त हो गई। 1935 ई० में कृषि संगठन में समानता, एकरूपता और नियन्त्रण लाने के लिए स्टालिन ने कृषि आर्टल के आदर्श नियम बनाये, जो स्टालिन की महत्ता और दूरदर्शिता का प्रतीक थी। आर्टेल कृषि सहकारिता की तरह थी। इसकी भूमि को राजकीय सम्पत्ति घोषित किया गया जिस पर सभी व्यक्तियों का समान अधिकार था। यह उद्देश्य पूर्णता सफल रहे। द्वितीय पंचवर्षीय योजना के काल में आयोग प्रगति भी प्रशंसनीय थी लेकिन जर्मनी में हिटलर के अभ्युदय के कारण सुरक्षा की दृष्टि से वस्त्र निर्माण में विनियोग की मात्रा की वृद्धि की गयी। (C) तृतीय पंचवर्षीय योजना-तृतीय पंचवर्षीय योजना के काल में 1941 में रूस पर जर्मनी ने आक्रमण कर दिया। अब युद्ध हो जाने से शत्र का सामना करने की दृष्टि से यह योजना युद्ध सामग्री योजना में परिवर्तित हो गई।

2. शिक्षा एवं सांस्कृतिक प्रसार-बोल्शेविक शासन में रूस साहित्यिक शिक्षा तकनीकी शिक्षा का विशेष प्रसार हुआ। वैज्ञानिक क्षेत्र में तथा मनोरंजन एवं खेलकूद के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगति हुई।

3. स्त्रियों की स्थिति में सुधार-स्टालिन के शासनकाल में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार मिल गये तया वेश्यावृत्ति का अन्त कर दिया गया।

4. चर्च का अंत-मार्क्सवादी सिद्धांतों के अनुसार साम्यवादी दल वालों में धर्म तथा चर्च के प्रति कोई श्रद्धान थी। अतः अब स्टालिन ने इस धर्म के प्रभाव को शासन से समाप्त कर दिया। पार्टियों के प्राचीन अधिकारों को समाप्त कर दिया गया तथा सम्पत्ति जब्त कर ली गयी धार्मिक सम्प्रदाय भी प्रायः नष्ट कर दिये गये।

5. क्रान्ति विरोधियों का सफाया-स्टालिन ने क्रान्ति के विरोधियों का सफाया करवा दिया परिणामस्वरूप रूस में साम्यवादी व्यवस्था स्थायी और सुदृढ़ हो गयी।

6.1936 ई० में संविधान का लागू करना-1936 ई० में एक संविधान लागू किया गया, जो स्टालिन संविधान के नाम से जाना जाता है। यह संविधान आज भी थोड़े बहुत संसोधनों के पश्चात शासन को संचालित कर रहा है। 1936 ई० के संविधान में रूस में संघ राज्य स्थापित किया गया रूस को इस संविधान में 'समाजवादी सोवियत गणराज्य संघ कहा गया। संघीय संसद में दो सदन 'कौन्सिल ऑफ यूनियन' तथा 'काउन्सिल ऑफ नैशनलटीज' हैं। शासन का प्रमुख राष्ट्रपति होता है। रूस में सर्वोच्च न्यायालय का स्थान सर्वोच्च है तथा नागरिकों को मूल अधिकार भी प्रदान किये गये हैं। रूस में साम्यवादी दल का कठोर नियन्त्रण भी है इन्हीं गुणों के कारण बहुत शीघ्र उन्नति कर यूरोप का ही नहीं अपना संसार की महान शक्तियों में गिना जाता है। स्टालिन की विदेश नीति-जोजफ स्टालिन ने रूस को चारों ओर से सरक्षा प्रदान करने तथा सुदृढ़ करने की नीति अपनाई। जर्मनी के तानाशाह हिटलर के उदय के साथ 1934 से 1938 ० के दौरान महत्त्वपूर्ण परिवर्तन किया। यह परिवर्तन यह या कि उसने पश्चिम के साथ सहयोग की नीति अपनाई क्योंकि हिटलर अपने को साम्यवाद का सबसे बड़ा शत्रु कहता था। अब स्टालिन ने रूस की सुरक्षा की दृष्टि से निम्नलिखित कदम उठाये

(1) अनाक्रमण समझौते-अपनी सीमाओं को सुदृढ़ करने के लिए स्टालिन ने टर्की से 1925 ई० में 1935 ई०, जर्मनी से 1926 ई०, अफगानिस्तान से 1926 ई०, लिथुआनिया से 1926 ई० ईरान से 1927 ई०, फिनलैण्ड, इस्टोनिया, पोलैण्ड से 1931 ई०, लेटविया एवं चेकोस्लोवाकिया से 1933 ई० तथा यूगोस्लाविया और इटली से 1933 ई० अनाक्रमण समझौते किये। हिटलर के उत्कर्ष से भयभीत होकर जर्मनी के कट्टर शत्रु फ्रांस के साथ भी स्टालिन ने 1932 ई० में तटस्थता की सन्धि सम्पन्न की। (2) अमेरिका के साथ सम्बन्धों में सुधार-अमेरिका 1933 ई० में रूस को वैधानिक मान्यता नहीं दी थी लेकिन जापान के साथ बढ़ती प्रतिद्वन्द्विता तथा रूस के शक्तिशाली राज्य के रूप में उभरकर आने के कारण अमेरिका ने रूस के साथ मैत्री उचित समझी। फलस्वरूप

1932 ई० में दोनों देशों के मध्य कूटनीतिक सम्बन्ध स्थापित हो गये। जिसके बाद दोनों में एक संधि हुई कि वे एक-दूसरे की प्रादेशिक अखण्डता की सुरक्षा का तथा विरोधी प्रचार रोकने का वचन दिया। अब इस तरह रूस की साम्यवादी सरकार को संसार की सभी महान शक्तियों ने मान्यता दे दी। (3) राष्ट्र संघ से सहयोग-रूस 1934 ई० में राष्ट्र संघ का सदस्य बन गया। उसे स्था सदस्यता प्राप्त हुई लेकिन 1940 ई० में फिनलैण्ड आक्रमण के कारण उसे राष्ट्र संघ से निष्काषित कर दिया गया जो राष्ट्र संघ के पतन का प्रमुख कारण बना। (4) फ्रांस के साथ मैत्री सम्बन्ध-रूस ने 2 मई 1935 ई० में समय की मांग को देखते हुए फ्रांस के साथ भी अनाक्रमण एवं सैनिक समझौता किया। (5) अन्य राज्यों से मैत्री सम्बन्ध-रूस ने तुर्की, ग्रेट ब्रिटेन तथा चकोस्लोवाकिया के साथ मैत्री सम्बन्ध स्थापित किये। मंगोलिया के साथ भी एक पारस्परिक संधि की गई। (6) जर्मनी की पराजय-जर्मनी और रूस का समझौता सितम्बर 1939 ई० में हुआ लेकिन दोनों एक-दूसरे के प्रति अविश्वास करते रहे। अन्ततोगत्त्वा हिटलर ने 22 जून 1941 को रूस पर आक्रमण कर दिया जिसमें रूस विजयी हुआ। इस प्रकार स्पष्ट है कि स्टालिन ने रूस का नवनिर्माण किया, उसे अन्तर्राष्ट्रीय जगत में ख्याति प्रदान करवाई तथा स्टालिन ने रूस को लेनिन के सपनों का आदर्श साम्यवादी देश बन दिया। इसलिए रूस के इतिहास में स्टालिन का नाम स्वर्णक्षरों में अंकित है।

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