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शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

राजनीतिक प्रदेशों के आधार तथा विशेताएं

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राजनीतिक प्रदेशों के आधार तथा विशेताएं 

राजनीतिक प्रदेशों के सीमांकन के आधार (Criteria of Delimitation of Political Regions) राज्य या देश विश्व स्तरीय राजनीतिक प्रदेश का सर्वाधिक स्पष्ट और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय इकाई है। एक क्रियाशील क्षेत्रीय इकाई होने के कारण इसका सुस्पष्ट सीमांकन इसकी प्राथमिक आवश्यकता है। प्रत्येक राज्य की अपनी सीमाएं होती हैं जो उसके प्रभुत्व तथा क्षेत्रीय विस्तार निर्धारण करती हैं। यहाँ राज्य की सीमा से तात्पर्य पूर्ण प्रभुतासम्पन्न राज्यों की अन्तर्राष्ट्रीय सीमाआ से हे जो पड़ोसी राज्यों (देशों) की राजनीतिक प्रभुसत्ता, क्षेत्रीय विस्तार की विभाजक रेखाओं के में मान्य होती है किसी राज्य के बाह्य विस्तार की सीमाएं दो प्रकार की होती हैं-) सीमा (bondra के रूप में, और (i) सीमान्त क्षेत्र (frontier zone) के रूप में। पहले जब उपांतीय क्षेत्र के अल्प आर्थिक महत्व तथा निर्जन क्षेत्र होने के कारण पड़ोसी दे अपने राज्य के अधिकार क्षेत्र प्रति प्रायः उदासीन थे तब दो पड़ोसी राज्यों के मध्य विस्तृत क्षेत्री घटिया सीमान्त क्षेत्र (frontier zone) के रूप में होती थी जो दोनों राज्यों के अधिकार क्षेत्र से मुक्त होती थीं। किन्तु आज (द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात) विश्व के प्रायः सभी भागों में राजनीतिक इकाईयों के प्रायः सभी भागों में राजनीतिक इकाईयों के अधिकार क्षेत्र रेखीय सीमाओं (Linear boundary) द्वारा निर्धारित हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात आर्थिक तथा राजनीतिक कारणों से जैसे-जैसे संबंधित राज्य सीमांत प्रदेश के संसाधनों के दोहन तथा वहाँ बसाव की आवश्यकता का अनुभव करने लगे, दोनों ओर से बढ़ते प्रसार के परिणामस्वरूप सीमांत प्रदेश धीरे-धीरे संकरे होते गये और अंततः वे रेखीय सीमाओं के रूप में परिवर्तित हो गये। राजनीतिक प्रदेशों (राज्यों) के सीमांकन हेतु प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक मापदण्डों का सहारा लिया जाता है प्राकृतिक मापदण्ड के अंतर्गत उच्चावच, जलाशय, मरूभूमि, दलदल, घने वन आदि प्रमुख हैं। सांस्कृतिक मापदण्ड के रूप में भाषा, धर्म, प्रजाति, जाति, संस्कृति आदि को आधार बनाया जा सकता है।

राज्यों की सीमाएं दो प्रकार की हो सकती हैं: (1) प्राकृतिक सीमा, और (2) कृत्रिम या मानवकृत सीमा प्राकृतिक सीमाएं प्रायः क्षेत्रीय पट्टी या सीमांत क्षेत्र के रूप में होती हैं और प्राकृतिक तथ्यों जैसे स्थलाकृति, जलाशय आदि द्वारा निर्धारित होती हैं। कृत्रिम सीमाएं मानव निर्मित होती है और सामान्यतः एक निश्चित रेखा के रूप में होती हैं जिनको भाषा, धर्म, संस्कृति आदि किसी सांस्कृतिक तथ्य द्वारा अथवा ज्यामितीय रेखा द्वारा निर्धारित किया जाता है राज्यों के सीमांकन हेतु प्रयुक्त प्रमुख आधार (मापदण्ड) निम्नलिखित हैं स्थलाकृति (Topography) - दो राज्यों के मध्य स्थित उच्च पर्वत श्रेणियों (प्रायः दुद्धी पर्वतों) को प्रायः उनके मध्य रेखा के रूप में स्वीकार किया जाता रहा है सीमा रेखा के निर्धारण हेतु पर्वत के शीर्षों को जोइने वाली रेखा, जल विभाजक रेखा अथवा श्रेणियों की तलहटी रेखा का प्रयोग किया जाता है। कभी-कभी दो राज्यों के मध्य पर्वतीय सीमा आवश्यक रूप से शीर्ष रेखा न होकर तलहट्टी रेखा भी होती है जिससे सम्पूर्ण पर्वतीय क्षेत्र तथा उसके दोनों ढाल क्षेत्र एक ही राज्य के अंतर्गत आ जाते हैं। इसे ग्लेसिस के नाम से जाना जाता है। पर्वतीय सीमा रेखाएं पूर्ण स्पष्ट या सुनिश्चित नहीं होती हैं जिसके कारण कालान्तर में ये विवाद रास्ता बन जाती हैं। पर्वत श्रेणियों के आधार पर निर्धारित अंतरराष्ट्रीय सीमाएं विश्व के प्रायः सभी भागों में पायी जाती हैं जिसके सर्वाधिक उदाहरण यूरोप में मिलते हैं। अर्जेंटीना एवं चिली, भारत एवं चीन, भारत एवं म्यांमार, नॉर्वे एवं स्वीडेन, फ्रांस एवं स्पेन, फ्रांस एवं इटली, इटली एवं स्विटजरलैण्ड, जर्मनी एवं चेक गणराज्य, चेक गणराज्य एवं पोलैण्ड आदि देशों के मध्य सीमाएं अधिकतर पर्वतीय हैं। भारत- चीन की सीमा रेखा मैक मोहन के नाम से जलाशय (water Bodies) - सुपरिचित है। नदियाँः राज्य के सीमा निर्धारण में नदियों, झीलों, सागरों आदि का महत्वपूर्ण स्थान पाया जाता है। पर्वत क्षेणियों की भांति नदियां भी धरातल की स्पष्ट आकृति होती है अतः अनेक देशों की अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं का निर्धारण नदियों के प्रवाह मार्ग के आधार पर किया गया है नदियों के बदले मार्ग आदि के कारण अनेक बार नदी-आधारित सीमाएं विवादग्रस्त बन जाती हैं। नदी सीमा से संबंधित अनेक समस्याओं के होते हुए भी विश्व के अनेक देशों या राज्यों के मध्य नदी सीमां विद्यमान है। उत्तरी अमेरिका में संयुक्त राज्य एवं मैक्सिको के मध्य रियोग्राण्डी नदी, संयुक्त राज्य एवं कनाडा के मध्य सेंट लारेन्स नदी, दक्षिण अमेरिका में अर्जेंटीना एवं उरुग्वे तथा ब्राजील के मध्य युरूावे नदी, कोलम्बिया तथा वेनेजुएला के मध्य ओरिनोको नदी, अफ्रीका में जायरे एवं कांगो गणतंत्र के मध्य कांगो नदी, ज़ाम्बिया तथा लोहिया के मध्य जेम्बेजी नदी, दक्षिण अफ्रीकी गणतंत्र एवं दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका के मध्य ऑरेंज नदी, एशिया में थाईलैंड तथा लाओस के मध्य मीकांग नदी द्वारा निर्धारित अंतर्राष्ट्रीय सीमा उल्लेखनीय है। झीले अंतर्राष्ट्रीय सीमा के निर्धारण हेतु कई देशों के मध्य झीलों का भी प्रयोग किया गया है। धूल पर आधारित सेवाओं के संबंध में एक बड़ी समस्या सीमा का निश्चित रैखिक निर्धारण है। अफ्रीका में तंजानिया तथा युगाण्डा के मध्य स्थित विक्टोरिया झील पर अक्षांश के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय सीमा निर्धारित की गयी है। संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा के मध्य 5 महान झीलों पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय सीमा लगभग 1600 किमी लम्बी है जो झील-आधारित सीमा रेखा का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। अफ्रीका में बोड, अल्बर्ट, टैगनिका, न्यासा आदि झीले विभिन्न देशों के मध्य सीमा निर्धारण के लिए प्रयोग की गयी हैं।.

एशिया में मृत सागर जाईन तथा इजराइल के मध्य सीमा निर्धारित करता है। सागरः विशाल सागर और महासागर देशों की अंतर्राष्ट्रीय सीमा का निर्धारण करते हैं। इनके किनारे स्थित राज्यों की अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं स्थल की बाहा सीमाएं होती हैं अंतर्राष्ट्रीय समझौते के अनुसार राज्य की स्थलीय सीमा से सागर में निश्चित दूरी (वर्तमान में 12 समुद्री मील या 20 किमी तक विधिक अधिकार क्षेत्र माना जाता है। उदाहरण के लिए संयुक्त राज्य तथा कनाडा की पश्चिमी तथा पूर्वी सीभाएं क्रमशः प्रशांत तथा अटलांटिक महासागर द्वारा निर्धारित हैं इसी प्रकार भारत, चीन, मलेशिया,

ब्राजील आदि अनेक देशों की सीमाओं के कुछ भाग सागरों द्वारा निर्धारित है द्वीपीय देशों की सीमाएं पूर्णतः (कुछ अपवादों को छोड़कर) सागरीय तथा महासागरीय जल क्षेत्र द्वारा निर्धारित हैं। अगम्य निर्जन क्षेत्र (Unaccessible Unpopulated Areas) दो राज्यों (देशों) के मध्य घने वन, मरूस्थल, दलदल आदि अगम्य एवं निर्जन क्षेत्र उनके मध्य प्रायः सीमांत के रूप में स्थित होते हैं इन सीमांतों ने अपने दोनों ओर विस्तृत भिन्न क्षेत्रीय सभ्यताओं एवं संस्कृतियों को एक दूसरे को पृथक बने रहने में योगदान दिया है। इनमें वनों तथा स्थानों की तुलना में दलदल की भूमिका कम रही है। वर्तमान समय में इनके मध्य से गुजरने वाली किसी मान्य सरल रेखा (प्रायः अक्षांश या देशान्तर) को अंतर्राष्ट्रीय सीमा मान लिया जाता है। उदाहरण के लिए यूरोप में पोलैण्ड और रूसी गणराज्य की सीमा प्रिपेट दलदल से होकर गुजरती है। सांस्कृतिक मापदण्ड (Cultural Criteria)   वर्तमान समय में विश्व के विभिन्न राज्यों की अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं सामान्यतः मानवकृत या कृत्रिम है। कृत्रिम सीमाएं व्यापक दृष्टिकोण से सांस्कृतिक होती है क्योंकि वे एक से अधिक राष्ट्रीय भारत समूहों को पृथक करती है। इन सीमाओ को भाषा, धर्म, जाति, प्रजाति तथा अन्य सांस्कृतिक लक्षणों के आधार पर निर्धारित किया जाता है। इन सांस्कृतिक तत्वों के आधार पर निर्मित अंतर्राष्ट्रीय सीमा प्रायः सीमांत क्षेत्र (frontier zone) के रूप में होती है यह एक से अधिक सांस्कृतिक क्षेत्र अथवा जनसमूह के मध्य विभाजन रेखा के रूप में न होकर संक्रमण पेटी (tansifion zone) के रूप में होती है जहाँ दो सांस्कृतिक समूहों को पृथक करने के उद्देश्य से किया जाता है, सीमा के अन्तर्त अल्पसंख्यक सांस्कृतिक समूह वाले (exclave) अथवा अतः क्षेत्र (enclave) के रूप में सम्मिलित हो जाता है जिससे कई बार राजनीतिक अस्मिता उत्पन्न हो जाती है।

यूरोपीय देशों की अधिकांश सीमाएँ सांस्कृतिक तत्वों पर आधारित हैं और उनकी सीमा के अंतर्गत समजातीय मानव समूह निवास करते हैं प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात मध्य तथा पूर्वी यूरोप में राज्यों की सीमा निर्धारण में राष्ट्रीयता पर जोर दिया गया जिसकी मूल पहचान भाषा मानी गयी। इस प्रकार तब से राष्ट्रीय सीमा निर्धारण का आधार बन गयी ये सीमाएं समजातीय एकता पर आधारित हैं फिर भी यूरोपीय राज्यों के जनसमूह पूर्णरूप से समरूप नहीं है। राष्ट्रवाद तथा जातीय एकता को लेकर अनेक बार यूरोपीय राज्यों के मध्य संघर्ष उत्पन्न होते रहे हैं जाति, धर्म भाषा आदि सांस्कृतिक तत्वों के आधार पर निर्धारित सीमाएं संघर्ष का कारण बन जाती हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात दक्षिण-पश्चिम एशिया में इजराइल तथा दक्षिण एशिया में पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्थापना के उत्कृष्ट उदाहरण है। उल्लेखनीय है कि भारत में अधिकांश राज्यों की सीमाओं का निर्धारण महत्वपूर्ण भाषा के आधार पर किया गया है। इस प्रकार निर्धारित सीमा के अंतर्गत प्रायः समान भाषा भाषी लोग रहते हैं जिनकी संस्कृति में समरूपता पायी जाती है। पंजाब (पंजाबी), राजस्थान (राजस्थानी), गुजरात (गुजराती). महाराष्ट्र (मराठी), कर्नाटक (कन्नड़), केरल (मलयालम), तमिलनाडु (तमिल), आंध्र प्रदेश (तेलुगू), उड़ीसा (उड़िया). पश्चिम बंगाल (बांगला). असम (असमी) आदि इसके उदाहरण हैं। दो राज्यों के मध्य सीमा निर्धारित करने के लिए विश्व के अनेक भागों में ज्यामितीय रूप से सरल रेखा तथा वृत्तों की चाप रेखाओं का प्रयोग किया गया है। ये सीमाएं अक्षांश तथा देशांतर रेखाओं का भी अनुकरण कर सकती हैं। इस प्रकार के सीमा निर्धारण में स्थानीय अवस्थाओं, मूल निवासियों की इच्छाओं और भावनाओं,स्थलाकृतियों आदि पर ध्यान नहीं दिया जाता है। ज्यामितीय सीमा रेखाएं सामान्यतः निर्जन तथा कम महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सीमा निर्धारण के लिए प्रयुक्त होती हैं। यूरोपीय साम्राज्यवादी शक्तियों ने अफ्रीका,आस्ट्रेलिया तथा उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिकी में नवीन खोजों के साथ आर्थिक विकास की प्रारंभिक अवस्था में पारस्परिक समझौते द्वारा विभिदि उपनिवेशों का सीमा निर्धारण ज्यामितीय रेखाओं द्वारा किया। पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में प्रारंभिक ज्यामितीय सीमा स्पेन तथा पुर्तगाल के मध्य 50" पश्चिमी देशान्तर द्वारा की गयी थी ज्यामितीय रेखाएं के दो ज्ञात स्थानों को मिला कर सीधी रेखा के रूप में निर्मित की गयी थीं। अक्षांश एवं देशांतर आधारित सीमाएं (Latitude and Longitude based Boundaries)

विश्व के अनेक देशों की सीमाओं के निर्धारण में अक्षांश अथवा देशांतर रेखाओं को आधार बनाया गया है। संयुक्त राज्य एवं कनाडा, उत्तरी तथा दक्षिणी कोरिया,युगाण्डा एवं तंजानिया, मिस्र एवं सूडान आदि राज्यों की सीमाएं अक्षांशों का अनुसरण करती है। कनाडा तथा संयुक्त राज्य के मध्य 49 अक्षांश रेखा वूडज झील के दक्षिण से प्रशांत महासागर तक और 45° अक्षांश रेखा कनेक्टीकट तथा सेंटेंस नदियों के मध्य अन्तर्राष्ट्रीय सीमा का निर्धारण करती है। उत्तरी तथा दक्षिण कोरिया का विभाजन 38° अक्षांश रेखा द्वारा किया गया है। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निर्धारण में विश्व के अनेक भागों में अक्षांश की भांति देशांतर रेखाओं का भी प्रयोग किया गया है। अलास्का तथा कनाडा का सीमांकन 141° पश्चिमी देशांतर द्वारा । संयुक्त राज्य तथा मैक्सिको, ग्वाटेमाला तथा मेक्सिको, ग्वाटेमाला तथा होंडुरास, लीबिया तथा मिस्र, सूडान तथा आदि नदियों. समुद्री किनारों आदि कई सानों का निर्धारण किया गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका में झीलों, अक्षांश रेखा, नदियों, समुद्री किनारों आदि का प्राश्रय लिया गया है। मिश्रित आधारों का प्रयोग सामान्यतः बड़े आकार वाले देशों की सीमा निर्धारण में अधिक हुआ है।

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