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शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

क्रमबद्ध और प्रादेशिक भूगोल के द्वैतवाद विस्तृत वर्णन कीजिये।

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क्रमबद्ध और प्रादेशिक भूगोल के द्वैतवाद विस्तृत वर्णन कीजिये।

 भूगोल के द्विभाजन का इतिहास बहुत पुराना है किन्तु इसका वास्तविक विकास उीसी शताब्दी के भूगोलवेत्ताओं द्वारा सम्भव है। आज से 2000 वर्ष पूर्व यूनानी तथा रोमन भूगोलवेत्ताओं के एक वर्ग का मानना था कि भूगोल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न स्थानों तथा देशों के सम्बंध में संगठित सूचनाये एकत्रित करना था जबकि दूसरा वर्ग व-माप, नदियों के स्रोतों की खोज, जलवायु कटिबंधीं के निर्धारण आदि पर बल देता था। सत्रहवीं के प्रसिद्ध जर्मन भूगोलवेत्ता वारेनियस ने भूगोल को दो खण्डों में विभाजित किया था-(1) सामान्य भूगोल और (2) विशिष्ट भूगोल। वारेनियस के अनुसार सामान्य भूगोल विज्ञान का अंग है और पृथ्वी का सामान्य अध्ययन करता है। यह सम्पूर्ण पृथ्वी से सम्बंधित है और उसके विभिन्न क्षेत्रों तथा दृश्य घटनाओं या तथ्यों (phenomena) का वर्णन करता है। वह भूगोल की आधार शिला है और सामान्य नियमों का प्रतिपादन करता है। उन्होंने व्यक्तिगत देशों के अध्ययन को 'विशिष्ट भूगोल का अंग बताया था और स्वयं भी जापान तथा थाईलैण्ड के मानवीय पक्षों का अध्ययन किया था। वारेनियस द्वारा प्रयुक्त शब्दावली और प्रयोग का अन्तर वास्तविक अर्थ में तत्वों और क्षेत्रों के अध्ययन से ही सम्बंधित है। ब्लाश के अनुसार वारेनियसका आस्था भूगोल के द्विभाजन में नहीं थी। अठारहवीं शताब्दी में कांट और उन्नीसवीं शताब्दी में हम्बोल्ट ने सामान्य (general) के स्थान पर भौतिक (physical) का प्रयोग करके पहले से अधिक भ्रांति उत्पन्न कर दी। रिचथोफेन के प्रभाव से उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक जर्मन भूगोलवेत्ता इस बात पर लगभग एकमत हो गये थे कि भूगोल में तत्वों और क्षेत्रों दोनों का अध्ययन समान रूप से महत्वपूर्ण है। जर्मनी में भूगोल को लैण्डशाफ्ट' का अध्ययन माना गया और उसका अनेक अर्थों में प्रयोग किया गया लैण्डशाफ्ट का एक अर्थ प्रदेश या सादृश्य भूमि लगाया गया तथा प्रादेशिक भूगोल का आधार बताया गया और

सामान्य (वर्गीकृत) भूगोल को गौण स्थान दिया गया। बीसवीं शताब्दी में फ्रांसीसी भूगोलवेत्ताओं ब्लाश, भ्रंश, डिमांजिया, ब्लांशार आदि ने प्रादेशिक भूगोल को अधिक महत्व प्रदान किया और वहाँ प्रादेशिक अध्ययनों की भरमार सी हो गयी। हार्टशोर्न के अनुसार, 'वर्गीकृत (क्रमबद्ध) और प्रादेशिक भूगोल के दीर्घकालिन विवाद और बदलते है दृष्टिकोण से स्पष्ट है कि इन दोनों का विकास लगातार और अन्तर्संबंधित रूप से हुआ है |

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