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शनिवार, 4 जुलाई 2020

यूरोप में जनसंख्या विवरण एवं वृद्धि

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यूरोप में जनसंख्या विवरण एवं वृद्धि 

जनसंख्या (Population)  जनसंख्या के आकार की दृष्टि से यूरोप विश्व का तृतीय वृहत्तम महाद्वीप है। इसकी जनसंख्या 740 मिलियन (2012) है जनसंख्या का औसत घनत्व 32 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी0 है, जिसमें प्रादेशिक स्तर पर अपार भिन्नताएँ मिलती है पूर्वी यूरोप सबसे कम घना आबाद (16 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी)है, जबकि पश्चिमी यूरोप (171 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) सघनतम आबाद है। दक्षिणी यूरोप (119 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) एवं उत्तरी यूरोप (5 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) कोष्ठकानुसार घनत्व दर्ज करते हैं। जनसंख्या सम्बन्धी विशेषताएँ .

1. महाद्वीप की 80% से अधिक जनसंख्या ईसाई धर्म में आस्था रखती है।

2. 80% से अधिक लोग इण्डो-यूरोपियन भाषा का प्रयोग करते हैं।

3. 90% से अधिक लोग काकेशियन प्रजाति के हैं।

4. जनसंख्या का स्वास्थय उत्तम है, यहाँ शिशु मृत्यु दर मात्र 5 (प्रति हजार) है।

5. जनसंख्या उच्च शिक्षित है। यहाँ 90% अधिक साक्षरता दर मिलती है।

6. यहाँ उच्च नगरीकरण मिलता है। 70% से अधिक जनसंख्या नगरों में निवास करती है।

7. जनसंख्या अति समृद्ध है (औसत प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय (GNI) 22, 000 अमेरिका डॉलर है।

8. कृषि में संलग्न जनसंख्या का प्रतिशत 10 से कम है।

9. जनसंख्या की वृद्धि दर निम्न है (अत्यल्प से नकारात्मक) है, अतः जनसंख्या स्थिर है।

10. लोकतन्त्रात्मक सरकारें स्थापित हैं।

11. सघन जनसंख्या है। जनसंख्या वृद्धि (Population Growth)- आज से लगभग 350 वर्ष पूर्व भी यूरोप सघन आबाद महाद्वीप था। 1650 ई0 में इसकी जनसंख्या लगभग 10 करोड़ थी,जो विश्व की कुल जनसंख्या का 18% थी। 1800 ई0 तक यूरोप की जनसंख्या 18 करोड़ हो गई। औद्योगिक क्रान्ति के बाद तीव्र आर्थिक विकास तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ सुविधाओं में विस्तार के कारण मृत्यु दर में काफी कमी आ गई,किन्तु जन्म दर ऊँची होने के कारण जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई। परिणाम 1900 ई0 तक यूरोप की जनसंख्या 42 करोड़ हो गई। 18वीं तथा 19वीं शताब्दी में यूरोपीय देशों से अन्य महाद्वीपों के नवीन क्षेत्रों में उत्प्रवास (Out migration) होने पर भी विगत 350 वर्षों 16502000 में यूरोप की जनसंख्या में लगभग सात गुना वृद्धि हुई। 2000 में यूरोप की जनसंख्या 70 करोड़ से अधिक हो गई। पश्चिमी यूरोप के विकसित देशों में 19वीं शताब्दी में मृत्यु दरों के साथ ही जन्म दरों में हास की प्रवृत्ति आरम्भ हो गई। वे जनांकिकीय संक्रमण (demographic transition) की द्वितीय अवस्था में प्रवेश कर चुके थे। बीसवीं शताब्दी में जन्म एवं मृत्यु दर समान (15 प्रति हजार) होने के कारण जनसंख्या मन्द गति से बढ़ी। वर्तमान समय में यूरोप में वार्षिक जन्म एवं मृत्यु दरें 11 हैं अत:

प्राकृतिक वृद्धि दर शून्य है उत्तरी यूरोप ( 0.3) पश्चिमी यूरोप(0.1). पूर्वी यूरोप (-0.2) तथा दक्षिणी यूरोप (0.1) वृद्धि दरें कोष्ठक अनुसार है। कुछ देशों में जनसंख्या की वृद्धि दरें नकारात्मक हैं (अतः जनसंख्या हासमान है। यह जनांकिकीय पतन (demographic decline) का सूचक है। जनसंख्या वितरण एवं घनत्व यूरोप में विश्व की 10.6% जनसंख्या निवास करती है। अधिकांश जनसंख्या खनिज सम्पन्न क्षेत्रों तथा नदी-घाटियों में संकेन्द्रित है। 40% ऊतरी अक्षांश के सहारे विस्तृत कोयला पेटी' जो विश्व की सर्वाधिक औद्योगिक पेटी है, अत्यधिक सघन आबाद होने के कारण यूरोप की जनसंख्या की धुरी (axis of population) कहलाती है। यह पेटी पश्चिम में उत्तरी सागर तथा इंग्लिश चैनल से लेकर पूर्व में यूक्रेन के नीपर के मैदानों तक विस्तृत है। इस पेटी में तीन जन-संकुल उप-क्षेत्र स्थित हैं- (1) ग्रेट ब्रिटेन से यूक्रेन की, (2) राइन बेसिन तथा (3) इटली के उत्तरी एवं तटवर्ती मैदान। कुल मिलाकर यूरोप के 12 क्र्ों में सघन आबादी पाई जाती है।

1. ग्रेट ब्रिटेन के कोयला क्षेत्र, जो औद्योगिक रूप से अत्यन्त विकसित हैं।

2. बेल्जियम के कोयला क्षेत्र तथा म्यूज घाटी।

3. पश्चिमी जर्मनी का रूर प्रदेश, जो यूरोप का वृहत्तम औद्योगिक प्रदेश है।

4. राइन घाटी।

5. फ्रांस एवं जर्मनी की सीमा पर विस्तृत सार कोयला क्षेत्र।

6. पूर्वी जर्मनी का सेक्सी कोयला क्षेत्र।

7. पोलैण्ड का साइलीशिया कोयला क्षेत्र।

8. फ्रांस के पूर्वी तथा उत्तरी-पूर्वी कोयला क्षेत्र।

9. फ्रांस में पेरिस बेसिन तथा लियोन्स बेसिन।

10. इटली का पो बेसिन।

11. यूक्रेन प्रदेश एवं

12. रूस के मास्को-तुला प्रदेश। यूरोप में पाँच जनसंकुल देश-रूस (144 मिलियन), जर्मनी (82 मिलियन), फ्रांस (मिलियन).यूनाइटेड किंगडम (61 मिलियन) तथा इटली (59 मिलियन) है। महाद्वीप पर औसत जन-घनत्व यद्यपि 31 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है, किन्तु अधिक सघन आबाद (200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी0 जन-घनत्व) जिले यूरोप के आन्तरिक भाग में तथा कम सघन आबाद (50व्यक्ति प्रति वर्ग किमी0 जिले उपान्त क्षेत्रों में स्थित है। अधिक जन-घनत्व वाले देश क्रमशः सान मेरिनो (524),नीदरलैण्ड (402). बेल्जियम (359), यूनाइटेड किंगडम (258),जर्मनी (229), कोसोव(210), इटली (202) तथा लक्जमवर्ग (200) हैं। इनके विपरीत, आइलैंड (3). रूस (8), नार्वे (13), एस्टोनिया (16) तथा स्वीडन (21) अत्यधिक विरल आबाद देश हैं।यूरोप में जनसंख्या का वितरण समय के साथ परिवर्तित होता रहा है। ईसा काल के प्रारम्भ में उच्चतम घनत्व के क्षेत्र भूमध्य सागर तट के सहारे स्थित थे । यूनान में विकसित हुए उस समय अधिकांश पश्चिमी यूरोप (आल्प्स के उत्तर में) विरल आबाद था इसा की दस प्रासंम्भिक शताब्दियों के दौरान पश्चिमी यूरोप की जनसंख्या में वास दर्ज हुआ। रोमन साम्राज्य के पतन के बाद यूरोप दीर्घ अवधि तक आर्थिक गिरावट, अकाल, महामारियों तथा उत्तर एवं पूर्व से होने वाले आक्रमणों से ग्रस्त रहा। इन सब कारणों से जनसंख्या का डास हुआ। यूरोपीय इतिहास में यह युग "अन्धकार युग" (Dark Ages) कहलाता है।

 तेरहवीं तथा चौदहवीं शताब्दियों के दौरान यूरोप में क्रमशः सापेक्ष स्थिरता आनेपर 1340 में जनसंख्या 57 मिलियन (ईसा युग के प्रारम्भ से दोगुनी हो गई, किन्तु 1348 में ब्यूटोनिक प्लेग महामारी के फैलने पर यूरोप की एक-चौथाई जनसंख्या नष्ट हो गई। कुछ क्षेत्रोंमे जनसंख्या कातीव्र हास हुआ। उदाहरणार्थ, इंग्लैण्ड में 13481379 की अवधि में जनसंख्या 5.7 मिलियन से घटकर लगभग 2 मिलियन (60% से अधिक मास) रह गई। युद्ध भी यूरोपीय जनसंख्या के हास के महत्वपूर्ण कारक रहे हैं। (असभ्या लोगों के प्राम्भिक आक्रमणों तथा सौ-वर्षीय युद्धों 13371463 ने, प्लेग महामारी के बाद, जनसंख्या का सर्वाधिक हास उत्पन्न किया। इसी प्रकार, 16181848 के दौरान तीस वर्षीय युद्धों ने भी जनसंख्या की वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव डाले। वेस्टफालिया की सन्धि (1848) के बाद यूरोप में सापेक्ष स्थिरता एवं शांति कायम होने पर जनसंख्या की वृद्धि में स्थिरता दर्ज हुई। 16501750 की अवधि में पश्चिमी यूरोप की जनसंख्या में 20 मिलियन की वृद्धि हुई, जिससे औद्योगिक क्रान्ति के समय कुल जनसंख्या 100 मिलियन हो गई। वर्ष 1750 पश्चिमी यूरोप में जनांकिकीय संक्रमण का प्रारम्भिक बिन्दु था। पश्चिमी यूरोप के अधिकांश देश जनांकिकीय संक्रमण पूरा कर चुके थे जनांकिकीय संक्रमण की द्वितीय अवस्था (तीव्र वृद्धि)औद्योगिक क्रान्ति से उत्पन्न रोजगार के अवसरों में वृद्धि के कारण सम्भव है। इसी दौरान पश्चिमी यूरोप से नई दुनियाँ की ओर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रवास किए। इसलिए पश्चिमी यूरोप में एशियाई तथा अफ्रीकी देशों जैसी (जनसंख्या विस्फोट की) स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। अधिकांश यूरोपीय देशों में जनसंख्या की दीदार 0.5%से कम है। हंगरी,रोमानिया,जर्मनी, बाल्टिक देशों आदि में जनसंख्या की नकारात्मक वृद्धिदरेंदर्जे होती हैं। तीन शताब्दियों तक जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के बाद यूरोप की जनसंख्या हासोन्मुख हैं। जन्म एवं मृत्यु दर समान होने के कारण जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि रूक गई है, जिससे जनसंख्या की वृद्धिशून्य हो गई है,जो भी अल्प वृद्धि हुई है. वह आप्रवास (immigration)के कारण। यह अवस्था 'जनांकिकीय पतन' (demographic decline)का सूचक है। अल्बानिया,आइसलैंड,आयरलैंड आदि उपान्त देशों में मध्यम प्राकृतिक वृद्धि होती है, जबकि एस्टोनिया, लाटविया, लिथुआनिया, जर्मनी, बेलारूस, बल्गेरियाई, हंगरी, मोल्दोवा, रोमानिया, रूस, यूक्रेन, बोस्निया. हर्जेगोविना, क्रोएशिया, इटली, पुर्तगाल तथा सर्बिया में नकारात्मक वृद्धि दर दर्ज होती हैं। उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं तथा उन्नत आर्थिक जीवन की दशाओं के कारण यूरोप में औसत जीवन प्रत्याशा 77 वर्ष (विश्व में सर्वाधिक है,जो विश्व के औसत (70 वर्ष से कहीं अधिक है यहाँ वृद्ध लोगों (65 वर्ष या अधिक) की जनसंख्या भी अधिक है। मोनाको की 24% से अधिक जनसंख्या वृद्ध वर्ग की है।

साक्षरता, जीवन प्रत्याशा तथा प्रति व्यक्ति आय की दृष्टि से भी यूरोप की जनसंख्या अधिकांशत शिक्षित, स्वस्थ तथा समृद्ध है। यहाँ औसत शिशु मत्त्यंता दर मात्र 6 (प्रति हजार) मिलती है, जो विश्व में न्यूनतम है। पूर्वी यूरोपीय देशों तथा (यूनान के अपवाद सहित) बाल्कान देशों में शिशु मृत्यु दर उच्च मिलती है। यूरोप की 74% जनसंख्या 10,000 या अधिक आबादी वाले नगरों में निवास करती है। बेल्जियम यूरोप का सर्वाधिक नगरीकृत देश है, जहाँ 97% जनसंख्या नगरीय सभ्यता गहराई से नगरवाद (urbanism) से जुड़ी है। फिर भी, यहाँ नगरीकरण के स्थानिक प्रतिरूपों में विषमताएँ दृष्टिगोचर होती है। लन्दन तथा पेरिस-जो यूरोप के वृहत्तम नगर है-यूरोप के आन्तरिक भाग में स्थित है। परिधीय यूरोप में, विशेषतः उत्तरी यूरोप में तथा बाल्कन प्रायद्वीप में स्थित दिनारिक श्रेणी में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत 50 से कम है। उल्लेखनीय है कि यूरोपीय नगर, अमेरिकी नगरों से अधिक संहत (compact) हैं। यहाँ उप-नगरीय प्रसार (Suburban sprawl) कम है, अधिकांश लोग अपार्टमेन्ट में रहते हैं तथा परिवहन के सार्वजनिक साधनों का प्रयोग करते हैं। वे छोटी दूरियों को स्कूलों द्वारा पूरा करना पसंद करते हैं। सामान्यतः यूरोपीय नगर के केन्द्र में औद्योगिक स्थल एवं बाजार स्थित होते हैं, जिसमें संकरी सड़कों/गलियों के दोनों ओर दो या तीन मंजिल इमारतें होती हैं। चर्च की नकीली शिखरें दूर से दिखाई देती हैं। इस आन्तरिक भाग में एक्सप्रेस मार्गों का नितान्त अभाव होती है प्रायः नगर पुरानी चारदीवारी तथा द्वारों से घिरा होता है। इस आन्तरिक भाग को घेरते हुए एक आन्तरिक वलय (inner ing) स्थित होता है, जो प्रधानता आवासीय उद्देश्य के लिए उपयुक्त होता है। इस क्षेत्र में रेल-मार्गों के स्टेशन स्थित होते हैं। 19वीं शताब्दी में औद्योगिक क्रान्ति के दौरान यूरोपीय नगर में मध्यवर्ती वलय (middle ring) जुड़ गया, जिसे 'औद्योगिक उपनगर' कहा जाता है, जो अब तक प्रारूपिक यूरोपीय नगर का वृहत्तम भाग है। इसमें सड़क के दोनों ओर श्रमिकों के मकान पंक्तिबद्ध रूप में अवस्थित होते हैं। मध्यवर्ती वलय की बाहरीसीमा पर प्रायः एक्सप्रेस मार्ग स्थित होते हैं। 1950 के बाद पश्चिमी यूरोपीय नगरों में एक 'बाहा वलय' (outer ring) भी जुड़ गया। इसमें एकाकी परिवारों के मकान, हाई-टैक उद्योगों के आधुनिक कारखाने तथा फर्मे स्थित होती है। इस वलय में कुछ नियोजित सेटेलाइट नगर तथा हरित पेटियाँ (बाग) भी दृष्टिगोचर होते हैं। नगर के केन्द्र तथा पहुँचने के लिए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी उपलब्ध होती है। 1965 के आसपास यूरोप में एक नई प्रवृत्ति उभरी, जिसके अन्तर्गत बड़ी संख्या में लोग नगर को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों की ओर स्थानान्तरण करते हैं। इससे बड़े नगरों की जनसंख्या घटने लगती है, जबकि गाँव तथा छोटे नगर विकसित होने लगते हैं। इन ग्रामीण आवासों से लोग अपने कार्यों पर अधिक दूरी तय करके जाते हैं, अथवा धरों से ही काम करते हैं। यूरोपीय जनसंख्या में वद्धि तथा अवकाश प्राप्त लोगों की संख्या में वृद्धि होने से यह प्रवृत्ति बढ़ने लगी। ग्रामीण क्षेत्रों के शान्तिपूर्ण जीवन से बड़ी संख्या में लोग आकर्षित होते हैं यूनाइटेड किंगडम में सर्वप्रथम यह अनुभव 1960 के दशक में प्रारम्भ हुआ। तत्पश्चात इसका प्रसार जर्मनी, नीदरलैण्डस बेल्जियम, फ्रांस तथा डेनमार्क में भी है। ग्रामीण क्षेत्रों को ओर पलायन की यह प्रवृत्ति बड़े नगरों के निकट दृष्टिगोचर होती है। यह प्रक्रिया 1980 के दशक तक जारी रही, फिर शताब्दी के अन्त तक मन्द हो गई। पूर्ववर्ती साम्यवादी देशों में यह प्रक्रिया जारी है।

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