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शनिवार, 4 जुलाई 2020

यूरोप के भूमध्यसागरीय परिमण्डल में फलोत्पादन

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यूरोप के भूमध्यसागरीय परिमण्डल में फलोत्पादन


लिखिये। उत्तर, दक्षिण यूरोप के अन्तर्गत भूमध्य सागर तटवर्ती देश सम्मिलित हैं। यह परिमण्डल भाषा सांस्कृतिक आर्थिक विकास आदि की दृष्टि से उत्तरी-पश्चिमी तथा पूर्वी यूरोपीय प्रदेशों से सर्वथा भिन्न है। इस भूखण्ड को भूमध्य सागरीय देश भी कहा जाता है। इसके अन्तर्गत आइबीरिया प्रायद्वीप के दो देश-पुर्तगाल तथा स्पेन, फ्रांस का दक्षिणी भाग, इटली,यूनान (Greece),यूरोपीय टी, सड्रियाटिक सागर तटीय देश- अल्बानिया तथा पूर्ववर्ती यूगोस्लाविया के देश (स्लोवेनिया, क्रेएशिया, बोस्निया- हर्जेगोविना, मोन्टे नीग्रो, सर्बिया, मेसेडोनिया तथा कोसोवो) सम्मिलित हैं। इस प्रदेश के पश्चिम में अटलांटिक महासागर, उत्तर में आल्प्स तथा अन्य नवीन वलित पर्वत श्रेणियाँ, पूर्व में रोमानिया, बुल्गारिया तथा एजियन सागर तथा दक्षिण में भूमध्य सागर स्थित है। प्रदेश का विस्तार 30°-45° उत्तरी अक्षांशों तथा 10° पश्चिम से 28° पूर्वी देशान्तरों के मध्य है। उच्चावच (Relief) उच्चावच की दृष्टि से भूमध्य सागरीय प्रदेश को दो स्पष्ट भागों में बाँटा जा सकता है- (0) पर्वतीय एवं पठारी भूमि एवं (2) मैदानी भूमि।

पर्वतीय एंव पठारा भूमि आइबेरिया प्रायद्वीप के अधिकांश भू-भाग पर स्पेन के पठार का विस्तार है। इसमें पूर्व पश्चिम दिशा में अनेक वलित श्रेणियों स्थित है सबसे दक्षिण में सियरा नेवादा श्रेणी भूमध्य सागर र सागर तट के सहारे विस्तृत है। इसके उत्तर में स्पेन के मध्य में सियरा मोरेन श्रेणी विस्तृत है, जिसकी सर्वोच्च शिखर एस्ट्रेला (1243 मीटर) है स्पेन के उत्तरी भाग पर बिस्के की खाड़ी के तट के समान्तर पश्चिमी-पूर्वी दिशा में कैण्टेब्रियन पर्वत स्थित है, जिसका सर्वोच्च शिखर टोरी डि सेरेडा (2836मीटर) है। फ्रांस तथा स्पेन की सीमा पर विरेकीज पर्वत स्थित है, जिसकी सर्वोच्च शिखर कोडी अनेटो 3350 मीटर) है। स्पेन के मध्य भाग पर मेसेटा पठार स्थित है, जो सागर तल से 700 800 मीटर ऊँचा है।

इटली के उत्तर में यूरोप के सर्वोच्च पर्वत आल्प्स पूर्व-पश्चिम दिशा में स्थित है, जो टर्शियरी युग में निर्मित नवीन वलित पर्वत हैं। फ्रांस, इटली तथा स्विटजरलैण्ड की सीमा पर ब्लॉक पर्वत स्थित है, जिसकी सर्वोच्च शिखर सेवोय आल्प्स (4734 मीटर) है। माउण्ट शेजा, ग्रान पैराडिजो, मैटर हॉर्न अन्य ऊँची शिखर हैं। इटली प्रायद्वीप के मध्य में एपीनाइन पर्वत (औसत ऊँचाई 2400 मीटर ) स्थित है, जिसकी सर्वोच्च शिखर मोन्टे कोणों (2868मीटर) है इटली प्रायद्वीप में नेपल्स के निकट विसुवियस एक सक्रिय ज्वालामुखी है। (पूर्व )यूगोस्लाविया के पश्चिमी तट पर सोरियाटिक सागर के पूर्वी तट के सहारे दिनारिक आल्प्स पर्वत स्थित है, जिसकी सर्वोच्च शिखर वोल्जनाक (2340 मीटर है। दिनारिक पर्वत के दक्षिण में एड्रियाटिक सागर तथा एजियन सागर के मध्य पिण्डस पर्वत उत्तर-दक्षिण दिशा में विस्तृत है। भूमध्य सागर में अनेक द्वीप स्थित है, जिनमें सिसली,सार्डिनिया, क्रीत,माल्टा, लिपारी आदि उल्लेखनीय हैं। इन द्वीपों के मध्यवर्ती भाग पर्वतीय हैं। कुछ छोटे द्वीप भी हैं, जिनमें अनेक ज्वालामुखी स्थित हैं। सिसली में स्ट्राम्बोली ज्वालामुखी प्रसिद्ध है। मैदान दक्षिणी यूरोप का 20% से भी कम भाग मैदानी है,जो नदी-घाटियों तथा डेल्टाओं में सीमित है। आरबीरिया प्रायद्वीप की नदियों (मिन्हो, दोरू, टेगस तथा गुआराना) के निचले भागों में सापेक्षतः चौडे मैदान मिलते हैं। प्रायद्वीप के तटीय भागों में संकरी मैंदानी पट्टी मिलती है। इटली के उत्तर-पूर्वी भाग में पो नदी का लोम्बार्डी मैदान विस्तृत है। फ्रांस के भूमध्य सागर तटीय सागर भाग में रोना डेल्टा अन्य मैदान है। अन्य देशों में केवल सागर तटीय भागों तथा नदी घाटियों में ही संकरे मैदान स्थित है। अपवाह (Drainage) दक्षिण यूरोप का अधिकांश भाग पर्वतीय तथा पठारी होने के कारण यहाँ अपवाह का कोई निश्चित क्रम विकसित नहीं हुआ है। यहाँ अधिकांश नदियाँ छोटी तथा तीव्रगामी हैं। आइबेरिया प्रायद्वीप की चार प्रमुख नदियाँ-मिनहो, दोरू,टेगस तथा गुआडियाना है। ये सभी नदियाँ स्पेन के पठार से निकलकर पश्चिम की ओर बहते हुए अटलांटिक महासागर में गिरती हैं। आइबेरिया प्रायद्वीप में स्पेन की यात्रा नदी पश्चिम से पूर्व की ओर बहते हुए भूमध्य सागर में गिरती है। फ्रांस की रोन नदी उत्तर से दक्षिण की ओर बहकर भूमध्य सागर में गिरती है। इटली में पो नदी सबसे महत्वपूर्ण है, जो पश्चिम से पूर्व की ओर बहते हए एड्रियांटिक सागर में गिरती है। इटली के पश्चिमी तट पर टाइबर नंदी बहती हैं। दक्षिण-पूर्व में यूरोपीय टीका अधिकांश भाग मैदानी है। जलवायु (Climate) भूमध्यसागरीय जलवायु की सबसे बड़ी विशेषता शुष्क ग्रीष्म ऋतु एवं आर्द्र शीत ऋतु है। शीत ऋतु में औसत तापमान 5-10°C रहते हैं तथा साधारण ठण्ड पड़ती है। ग्रीष्म ऋतु में औसत तापमान 21°-27°C रहते हैं तथा तेज गर्मी पड़ती है। वार्षिक तापान्तर 15-20°C तक रहते हैं। शीतकाल में तापमान प्रायः हिमांक के ऊपर रहते हैं। रात्रि में पाला भी पड़ता है। इस प्रदेश की जलवाय पर प्रचलित पवनों की पेटियों के उत्तर-दक्षिणी स्थानान्तरण का व्यापक प्रभाव पड़ता है। ग्रीष्म ऋतु में पछुवा पवनों की पेटी उत्तर की ओर खिसक जाती है, तब भूमध्य सागरीय प्रदेश पर उपोषण कटिबन्धीय उच्च दाब विस्तृत हो जाता है, जिससे हवाएँ स्थलीय भाग से समुद्र की ओर चलने लगती हैं। इन शुष्क पवनों से वर्षा नहीं हो पाती। शीत ऋतु में पछुवा पवनों की पेटी दक्षिण की ओर खिसकती है। तब भूमध्य सागरीय प्रदेश पछुवा पवनों के प्रभाव में आ जाता है। ये पवने आर्द्र होती हैं तथा वर्षा कराती हैं। शीत ऋतु में शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात भी सक्रिय होते हैं, जिनसे पर्याप्त वर्षा होती है। इन प्रदेशों में वार्षिक वर्षा का औसत 40-80 सेमी0 तथा आर्द्रता भागों में 80-125 सेमी0 रहता है। प्राकृतिक वनस्पति (Natural Vegetation) भूमध्यसागरीय जलवायु के प्रदेश में विशेष प्रकार की वनस्पतियाँ विकसित होती हैं, जो शुष्क ग्रीष्म ऋतु में भी सुरक्षित रह सकें। इन वनस्पतियों की जड़े लम्बी होती हैं,जो भूमि से नमी को ग्रहण कर सकें। इनकी पत्तियाँ कम, छोटी तथा चिकनी एवं छाले मोटी होती हैं, जिससे वाष्पीकरण कम होता है। यहाँ अनेक छोटे वृक्षों वाली झाड़ियाँ मिलती हैं, जिन्हें माकी (maqui) कहा जाता है। वृक्षों में चेस्टनट, ओक, वाकनट, साइप्रस, सीडर, चीड़, स्प्रूस लार्च आदि प्रमुख किस्में हैं। शुष्क भागों में गुच्छेदार घासें उगती हैं, जो ग्रीष्म ऋतु में सूख जाती है। मिट्टियाँ (Soils) दक्षिणी यूरोप में विषम (पर्वतीय एवं पठारी) धरातल की प्रधानता होने के कारण अवशिष्ट मिट्टियाँ प्रमुखता से मिलती हैं। नदी-घाटियों में उर्वर जलोढ़ मिटियों की प्रधानता है। अन्यत्र विशिष्ट प्रकार की मिटिटयाँ मिलती है सामान्यतः इस प्रदेश में चार प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं.

1. पर्वतीय मिट्टी -आइबेरिया तथा पर्वतीय क्षेत्रों में उकली, बड़े कणों वाली अनुपजाऊ मिट्टियाँ मिलती हैं, जिनमें खनिजों की मात्रा अधिक तथा जैव तत्वों का अभाव होता है।

2. जलोढ़ मिट्टी नदी-घाटियों तथा डेल्टाओं में जलोढ़ अवसादों के निक्षेपण से निर्मित उर्वर मिट्टियाँ पाई जाती हैं। ये कृषि प्रधान प्रदेश है।

3. रेडजीना मिट्टी- यह मिट्टी चूना, पत्थर तथा खड़िया के प्रदेशों में घास के नीचे विकसित होती है। एड्रियाटिक सागर के तटवर्ती क्षेत्रों में इसका विस्तार मिलता है।

4. टेरा रोसा मिट्टी -लाल रंग की यह मिट्टी चूना, पत्थर शैलों के ऊपर विकसित हुई है। इनमें लौह-ऑक्साइड की प्रधानता मिलती है। चूना-पत्थर के घुलने के बाद लाल रंग की मिट्टी के निक्षेप धरातल पर बिछ जाते हैं। यूगोस्लाविया तथा इटली में इनका विस्तार मिलता है। ये मिट्टियाँ कम उपजाऊ हैं। आर्थिक विकास (Economic Development).भूमध्य सागर तटीय प्रदेश को परिश्रम के प्रदेश' (Regions of Eforts) कहा जाता है। प्रदेश की शीतोष्ण जलवायु, प्राकृतिक संसाधनों तथा मानवीय परिश्रम के आधार पर ही यहाँ प्राचीन काल में यूरोप की प्रथम सभ्यताओं-यूनानी तथा रोमन-का विकास सम्मभ हुआ था मध्य युग में पुर्तगाल तथा स्पेन के नाविको तथा प्रणेताओं ने नईदुनिया की खोज की थी पूर्तगालियों ने एशिया के लिए नए समुद्री मार्ग की खोज की तथा अफ्रीका एवं भारत में अपने उपनिवेश स्थापित किए। स्पेन वासियों ने मैक्सिको, मध्य अमेरिका तथा दक्षिणी अमेरिकी की सभ्यताओं एवं संस्कृतियों को नष्ट करके उन पर अपना अधिपत्य स्थापित किया. आधनिक काल में प्रदेश आर्थिक विकास में पश्चिमी यूरोपीय देशों से पिछड़ गए हैं। इन देशों की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। खनन, विनिर्माण, व्यापार तथा परिवहन भी विकसित है। कृषि (Agriculture)-कृषि, पशुपालन तथा फलोत्पादन भूमध्य सागरीय देशों के प्रमुख व्यवसाय हैं। यहाँ निर्वाहक तथा व्यापारिक दोनों प्रकार की कृषि प्रचलित है। पर्वतीय ढालों एवं पठारी भागों में निर्वाहक पशुचारण प्रचलित है। समुद्र तटीय देश होने के कारण मत्स्योत्पादन भी प्रचलित है, यद्यपि यह निर्वाह स्तर पर किया जाता है। जलवायु की अनुकूलता के कारण फलोत्पादन वाणिज्यिक स्तर पर होता है। इस प्रकार भूमध्यसागरीय देशों में कृषि की विविधता दर्शनीय है। कृषि का प्रादेशिक स्वरूप निम्नवत है

1. फलोत्पादन-

सभी समुद्र तटीय भागों में (पुर्तगाल, दक्षिणी स्पेन, दक्षिणी फ्रांस, इटली, स्लोवेनिया, बोस्निया-हर्जगोविना, मोंटे-नीग्रो तथा यूनान) में फलोत्पादन प्रमुख व्यवसाय है, जो वाणिज्यिक स्तर पर किया जाता है। अंगूर की वाटिका (vines)सर्वत्र मिलती हैं। सेब, नाशपाती, अंजीर,जैतून तथा रसदार फलों के बागान मिलते हैं।

2. पशुपालन-

स्पेन के मध्यवर्ती पठार (मेसेटा) संगठन फ्रांस, इटली, स्लोवेनिया, क्रोएशिया, बोस्निया हर्जेगोविना, मोन्टेनीग्रो, मैसिडोनिया, अल्बानिया तथा यूनान में व्यापक रूप से भेड़ पालन व्यवसाय प्रचलित है। इन सभी देशों प्रदेशों में विषम पठारी एवं पर्वतीय धरातल होने के कारण कृषि के लिए प्रतिकूल दशाएँ हैं। पर्वतलय ढालों के प्राकृतिक चराग्राहों में भेड़ पालन प्रचलित है। आर्द्रतर भागों में (दक्षिणी फ्रांस, उत्तरी इटली, क्रोएशिया, बोस्निया-हर्जगोविना, मेसेडोनिया आदि) में मवेशी तथा सुअर पाले जाते हैं।

3. डेयरी (दुग्ध पशुपालन)- यह व्यवसाय उत्तरी स्पेन में विशेषतः विकसित है।

4. अन्नोत्पादन-

गेहूं मक्का, जौ आदि खाद्यान्न फसलें प्रमुख हैं। टमाटर, आलू, सेम,प्याज आदि सब्जियाँ तथा चारा फसलें भी उगाई जाती हैं। खनिज एवं ऊर्जा संसाधन (Minerals and Energy Resources)- दक्षिण यूरोप में विविध प्रकार के खनिज मिलते हैं, जिनमें पारा, गंधक,लोहा, निकिल, तांबा, जस्ता, सीसा, फास्फेट, चूना-पत्थर, पोटेशियम आदि प्रमुख हैं। आइबीरिया प्रायद्वीप का सबसे महत्वपूर्ण खनिज पारा है। कोयला,लोहा गंधक,निकिल.पोटाश,फास्फेट, सीसा, जस्ता आदि भी पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। इटली में गधक तथा पारी के प्रचर भण्डार स्थित है। साडीनिया में कोयला, सिसली में पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस मिलते हैं यूगोस्लाविया में चूना- पत्थर के वृहत भण्डार मौजूद हैं। यूनान में-डॉक्साइट,जस्ता, सीसा,चाँदी प्रमुख खनिज हैं। स्पेन में-लोहा.पोटाश, चाँदी, जस्ता, सीसा, तांबा आदि प्राप्त होते हैं।

 इटली में जल-विद्युत का पर्याप्त विकास हुआ है पुर्तगाल, स्पेन, यूनान, यूगोस्लाविया, क्रोएशिया, अल्बानिया आदि में थोड़ी मात्रा में जल- विद्युत उत्पादन कर विनिर्माण उद्योग (Manufacturing Industries)- दक्षिण यूरोपीय देशों में विनिर्माण उद्योग अधिक विकसित नहीं है। स्पेन, इटली तथा यूनान में कोयले की कमी के बावजूद इस्पात उद्योग विकसित है। सूती वस्त्र उद्योग- इटली, स्पेन तथा पुर्तगाल में विकसित है। ऊनी धागा तथा वन-पुर्तगाल, स्पेन, इटली, सर्बिया, मॉन्टे-निया में रेशमी वस्त्र उद्योग- इटली, (पूर्व) यूगोस्लाविया, स्लोवेनिया, यूनान में, सिंथेटिक वस- स्पेन में औद्योगिक मशीनरी-इटली में, मोटर-गाड़ी उद्योग इटली में वायुयान निर्माण- इटली में तथा सीमेन्ट इटली, स्पेन में, जलयान निर्माण उद्योग - इटली, स्पेन, यूनान में स्थापित हैं। दक्षिणी यूरोपीय देशों में फल प्रसंस्करण उद्योग काफी विकसित है। फलों की डिब्बाबन्दी (canning), मॉस, मक्खन, दूध आदि के उत्पाद तथा शराब उद्योग विकसित हैं। सभी तटवर्ती देशों में मत्स्योत्पादन प्रचलित है।

परिवहन (Transportation)

-दक्षिण यूरोपीय देशों को समुद्री जल परिवहन की विशेष सुविधा प्राप्त हैं इसीलिए इन देशों को अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की भी सुविधाएँ प्राप्त हैं पुर्तगाल, स्पेन, फ्रांस, इटली, यूनान आदि देशों अनेक महत्वपूर्ण पत्तन स्थित हैं, जो घरेलू तथा अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इटली, स्पेन तथा पुर्तगाल की कुछ नदियों निचले भागों में नौगम्य होने के कारण आन्तरिक जल परिवहन के लिए उपयोगी है। दक्षिण यूरोप के समतल मैदानी भागों में सड़कें तथा रेलमार्ग पर्याप्त विकसित है। इटली के पो बेसिन में सर्वाधिक सघन सड़क तथा रेलमार्ग मिलते हैं। तट के समानान्तर भी रेलमार्ग स्थित है,जो देश के विभिन्न नगरों को जोड़ते हैं। वायु परिवहन, इटली. पुर्तगाल, स्पेन, यूनान आदि में विकसित है। मैड्रिड, मिलान, रोम आदि विश्व के प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं। जनसंख्या (Population)-कृषि योग्य भूमि की कमी के बावजूद कुछ दक्षिणी यूरोपीय देशों में जनसंख्या का आकार काफी बड़ा है। दक्षिण यूरोप में 154 मिलियन जनसंख्या (2012) आवासित है। जनसंख्या के आकार की दृष्टि से इटली (80.9मिलियन) सबसे बड़ा देश है। स्पेन (46.2मिलियन).यूनान (10.8 मिलियन), पुर्तगाल (10.5मिलियन), सर्बिया (7.1 मिलियन), क्रोएशिया (4.3मिलियन) बोस्निया- हर्जगोविना (3.8मिलियन) अवरोही क्रम में क्रमशः अन्य देश हैं। दक्षिण यूरोप में जनसंख्या का औसत घनत्व 117 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी0 हैं, जो उत्तरी या पूर्वी यूरोपीय देशों से अधिक है। बड़े देशों में इटली (202), पुर्तगाल (115), अल्बानिया (99),स्लोवेनिया (101), सर्बिया (94), स्पेन (91) क्रमशः सघन आबाद है। दक्षिण यूरोप में जनसंख्या की वार्षिक प्राकृतिक वृद्धि दर 0.1% मात्र है। देशों में नकारात्मक द्ृद्धि भी दर्ज होती है, जिनमें सोबिया (-0.5) इटली तथा पुर्तगाल (-0.1) क्ो्यशिया (0.2 य है। यही नहीं, इन देशों में वृद्ध जनसंख्या का प्रतिशत भी काफी ऊँचा है। इटली (20% यनान उल्लेखनीय है। इसके विपरीत कोसोवो में केवल 6% वृद्ध जनसंख्या दर्ज होती है। औसत नगरीकरण न्यूनतम (67%) मिलता है। पुर्तगाल (387 रिनया-हर्जगोविना (46%), अत्वानिया एवं ्लावानिया (S0%) में अल्प नगरीयकरण (कोष्टक्रानसार) दाया जाता है। इनके विपरीत, माल्टा (100%), एण्डोटा (90%), सान मेरिनो (85%) में उच्च नगरीकरण मिलता है। बड़े देशों में स्पेन (17%), यूनान (73%) तथा इटली (68%) में सापेक्षतः उच्च ारीयकरण दर्ज होता है। दक्षिण यूरोप में प्रति व्यक्ति वार्षिक राष्ट्रीय आय 27,760 अमेरिकी डॉलर (2010)है। इटली 31810 डॉलर), स्पेन (31800 डॉलर), यूनान (27630 डॉलर) प्रति व्यक्ति आय की दृष्टि से उच्चतर वर्ग में आते हैं। न्यूनतम आय अल्बानिया (8520 डॉलर) में दर्ज होती है बोस्निया- हर्जगोविका (8910 डॉलर),

मैसिडोनिया (11070 डॉलर), सर्बिया (1090 डॉलर) मध्यम आय वाले देश हैं।

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