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दक्षिण पूर्वी एशिया में चावल की कृषि

दक्षिण पूर्वी एशिया में चावल की कृषि

चावल दक्षिण पूर्वी एशिया के लोगों का मुख्य भोजन और निर्वाफसल है। उष्ण कटिबंध में स्थित होने के कारण यहां उच्च तापमान और मानसूनी वर्षा एवं भूमध्यरेखीय वर्षा द्वारा 250 सेमी0 वार्षिक से अधिक वर्षा प्राप्त होती है जो चावल के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। नदी घाटियों की जलोढ़ मिट्टी तथा पर्वतीय ढालों की लावा मिट्टी चावल की कृषि के लिए आदर्श है। यही कारण है कि हेक्टेयर उत्पादन की अधिकता के कारण दक्षिण-पूर्व एशिया को चावल का कटोरा (Bowl of Rice) कहा जाता है। चावल यहाँ का सबसे प्रमुख भोज्य पदार्थ है और यहाँ के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में चावल का अति महत्वपूर्ण स्थान है। इसीलिए दक्षिण-पूर्वी एशिया की संस्कृति को चावल की संस्कृति (Rice Culture) भी कहा जाता है। थाईलैंड के लगभग 80 प्रतिशत कृषि पर और इण्डोनेशिया,वियतनाम तथा म्यांमार के 50 प्रतिशत से अधिक कृषि भूमि पर चावल की खेती की जाती है।

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