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शनिवार, 4 जुलाई 2020

दक्षिण पूर्व एशिया का भौगोलिक विवरण

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 दक्षिण पूर्व एशिया का भौगोलिक विवरण 


दक्षिण-पूर्वी एशिया के विस्तीर्ण क्षेत्र में पर्याप्त धरातलीय विविधता पायी जाती है। इसका अधिकांश भाग यूरेशियन भूगर्भिक प्लेट पर स्थित है जिसका बाहरी छोर भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित अराकानयोमा आदि पर्वत श्रृंखला सो अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह होते हुए धनुषाकार चाप के रूप में सुमात्रा, जावा और सेलीबज द्वीपों को समेटता हुआ फिलीपीन्स द्वीप समूह तक चला गया है। वास्तव में दक्षिण एशिया की बाह्य सीमा दो प्लोटों- उत्तर में यूरेशियन प्लेट और दक्षिण में भारतीय-अस्ट्रेलिया प्लेट के संधि स्थल पर स्थित है और भूगर्भिक दृष्टि से कमजोर क्षेत्र है। यही कारण हैं कि यह क्षेत्र भूगर्भिक हलचलों (भूकम्प आदि) से अधिक प्रभावित रहता है। इसी संधि स्थल पर वलयाकार द्वीप समूहों की पर्वत मालाएं स्थित है। दक्षिण-पूर्वी एशिया की मुख्य भूमि की संरचना भारत के दक्षिणी पठार से मिलती जुलती है क्योंकि दोनों भूभाग प्राचीन गोंडवानालैण्ड के अवशेष हैं। इस पठारी भाग का केन्द्र हिन्दचीन (कम्बोडिया, लाओस एवं वियतनाम) है जो प्राचीन कैम्ब्रिवन युग की दृढ़ चट्टानों द्वारा निर्मित है। इसके बाह्य भाग में स्थित भूभाग टर्शियरी युग की नवीन चट्टानों द्वारा निर्मित हैं। इण्डोनेशिया के द्वीपों में प्राचीन भूसंरचना का अभाव है। दक्षिण-पूर्वी एशिया में अनेक वलित पर्वत श्रेणियां मिलती हैं जिनमें कई मेसोजोइक युग से तो बहुत सी टर्शियरी युग से सम्बंधित हैं। निचले म्यांमार, थाईलैण्ड, पूर्वी लाओस, उत्तरी वियतनाम, मलाया प्रायद्वीप तथा कालीमत्तन (बोर्नियो) में मेसोजोइक युग के वलन पाये जाते हैं। इस प्रकार इण्डो-महिला समूह पूर्व कैम्ब्रियन तथा मेसोजोइक युगीन चट्टानों का प्रतिनिधित्व करता है। इस वलित प्राचीन श्रृंखला के समानांतर दक्षिण में टर्शियरी युग की नवीन पर्वत महिला पायी जाती हैं जिनके निचले भाग महासागर में डूब गये हैं और उच्च भाग द्वीपों के रूप में विद्यमान हैं। यह नवीन पर्वतमाला उत्तर-पश्चिम में अराकानयोमा तथा लुसाई श्रेणी से आरंभ होकर अण्डमान द्वीप समूह और सुमात्रा, जावा, सेलीबीज होती हुई फिलीपीन्स से आगे ताइवान तक चली गयी है। टर्शियरी वलन की तीन श्रृंखलाएं हैं जो एक-दूसरे से लगभग समानांतर और निकट स्थित हैं। सबसे उत्तरी श्रेणी (वलन रेखा) का मत्तन (बोर्नियो) द्वीप के उत्तरी तथा पूर्वी भाग में, सेलीबीज तथा फिलीपीन्स में पायी जाती है। इसके दक्षिण में मध्यवर्ती वलन रेखा स्थित है जो सुमात्रा, जावा और सुण्डा द्वीप के अक्ष के समानांतर है। सबसे दक्षिणी वलन रेखा सुमात्रा और जावा के दक्षिण में स्थित है और नीची होने के कारण इसका लगभग सम्पूर्ण भाग महासागर में निमग्न है। धरातल बनवट के अनुसार दक्षिण-पूर्वी एशिया को पर्वतीय भाग, पठारी भाग, नदी घाटियों, तथा द्वीप समूहों में विभक्त किया जा सकता है जिनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है पर्वतीय भाग दक्षिण-पूर्वी एशिया की मुख्य भूमि दीवार सदृश स्थित उच्च पर्वत श्रेणियों द्वारा तिब्बत एवं चीन से विलग है। इन पर्वत श्रेणियों में सर्वाधिक ऊँची श्रेणी उत्तरी म्यांमार में स्थित है जिसकी ऊँचाई 5885 मीटर है। इनमें सभी पर्वत श्रेणियां समान पर्वत निर्माण क्रम की नहीं हैं। म्यांमार के पश्चिमी सीमा पर स्थित पटकोई तथा अराकानयोमा अल्पाइन क्रम की श्रेणियां हैं जो हिमालय के साथ निर्मित हैं। यह पर्वत-क्रम अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह, सुमात्रा, जावा, तिमोर आदि द्वीपों से होता हुआ पश्चिमी इरियन तक चला गया है। इस श्रृंखला के समानांतर भीतर की ओर सुमात्रा-जावाबाली श्रृंखला के अक्ष का अनुसरण करते हुए ज्वालामुखी पर्वतों की श्रृंखला मिलती है जो पश्चिमी इरियन होते हुए पपुवा न्युगिनि तक चली गयी है। इसकी एक शाखा सेलीबीज से फिलीपीन्स होती हुई आगे जापान में चली गयी है। इस ज्वालामुखी श्रृंखला में 200 से अधिक ज्वालामुखी हैं जिनमें 71 इण्डोनेशिया में और 14 फिलीपीन्स में सक्रिय हैं। विदीर्ण पठार- उत्तर और पश्चिम में स्थित पर्वत श्रेणियाँ तथा दक्षिण में महासागर के मध्य विदीर्ण तथा उच्च सोपानी कटे-फटे पठार स्थित हैं जिन पर प्रकल्प की अनेक छोटी-बड़ी दरार घाटियां (Rift Valleys) मिलती है। सालवीन नदी काफी दर तक दरार घाटी का ही अनुसरण करती है। स्याम की खाड़ी के पार यूनान का पठार स्थित है जिसके अन्तर्गत पूर्वी थाईलैण्ड, कम्बोडिया तथा दक्षिणी वियतनाम का बेसाल्ट शैलों वाला पठार स्थित है जहां यत्र-तत्र मेसा भूआकृतियां मिलती हैं। इसे इण्डोशि क मैसिफ कहा जाता है। पूर्वी थाईलैण्ड का कोरात और कम्बोडिया का डांगरेक पठार लगभग सपाट हैं और ग्रेनाइट, बलुआ पत्थर और स्लेट आदि शैलों से निर्मित है। यह पठारी क्रम सुण्डा सेल्फ के रूप में बोर्नियो तक चला गया है। अंतिम हिमयुग के पश्चात समुद्रतल में उत्थान होने से इस पठार का दक्षिणी भाग जलमग्न है और केवल ऊँचे भाग मलाया प्रायद्वीप, सुमात्रा, जावा, बोर्नियो, मदुरा आदि के निम्न तल के रूप में देखे जा सकते हैं। नदी घाटियां

दक्षिण-पूर्वी एशिया की मुख्य भूमि पर पर्वत श्रेणियों तथा पठारों के मध्य अनेक लम्बाकार नदी घाटियां पायी जाती हैं। म्यांमार के मध्य उत्तर से दक्षिण की ओर ईरावदी नदी बहती है जो अपने मुहाने पर विस्तृत डेल्टा का निर्माण करती है। ईरावदी के समानान्तर उसके पूर्व में सिंतांग नदी घाटी है जो पिगोई पर्वत श्रेणी द्वारा इरावदी घाटी से विलग है। थाईलैण्ड में हरशिनियन पर्वत श्रृंखला तथा कोरात पर्वत श्रृंखला के मध्य नाम उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है और मध्यवर्ती मैदान तथा डेल्टा का निर्माण करती है। इसका डेल्टा सागर के समीप 150 किमी तक चौड़ा है। कोरात पठार के पूर्व में मीकांग नदी उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है और मुहाने पर लघु डेल्टा का निर्माण करती है। वियतनाम के उत्तरी भाग में टोंकिंग (Tonking) डेल्टा है जो उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर प्रवाहित होने वाली रेड नदी द्वारा निर्मित है। द्वीप समूह (Islands) इसके अन्तर्गत दक्षिण-पूर्वी एशिया की मुख्य भूमि के समीप स्थित विभिन्न द्वीप समूह सम्मिलित हैं इण्डोनेशिया द्वीप समूह (सुमात्रा, जावा, वाली, बोर्नियो, सेलीबीज, तिमोर, सुण्डा, पापुआ न्यू गिनी आदि), बंका एवं सिंगापुर द्वीप, फिलीपीन्स द्वीप समूह, ताइवान आदि द्वीप इसके घटक हैं। इन द्वीपों के आंतरिक भाग ज्वालामुखी पर्वत क्षेणियां तथा पठारी क्षेत्र स्थित हैं। इनमें बड़े द्वीपों जैसे सुमात्रा, बोर्नियो,जावा, पश्चिमी इरियन आदि में अपेक्षाकृत चौड़े समुद्रतट पाये जाते हैं। अपवाह (Drainage)- दक्षिण-पूर्वी एशिया की प्रवाह प्रणाली सामान्यतः अनुवर्ती प्रकार की है जिसमें नदियां भूमि के सामान्य ढाल के अनुसार प्रवाहित होती हैं। मुख्य भूमि का ढाल उत्तर से दक्षिण की ओर है यद्यपि इसके पूर्वी भाग का ढाल पश्चिम से पूर्व या उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पश्चिम की ओर भी है। म्यांमार में ईरावदी नदी अपनी सहायक चिन्दविन सहित उत्तरी पर्वत श्रेणी से निकलकर दक्षिण की ओर प्रवाहित होती हुई मर्तबान की खाड़ी (हिन्द महासागर) में गिरती है। इसके पूर्व में इसके समान्तर सालवीन नदी बहती है। इन दोनों नदियों के मध्य पीगूयोमा नामक निचली पहाड़ी स्थित है। ईरावदी विश्व की बड़ी नदियों में से एक है जिसकी लम्बाई लगभग 1600 किलोमीटर है। ईरावदी नदी का मैदान विस्तृत है किन्तु सालवीन एक संकरी घाटी में बहती है और संकीर्ण मैदान का निर्माण करती है। ईरावदी का डेल्टा अधिक विस्तृत और उपजाऊ है। थाईलैण्ड की पूर्वी सीमा पर मीकांग और मध्य भाग में मीनाम नदी उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती हुई थाईलैण्ड की खाड़ी (प्रशांत महासागर) में गिरती है। ये नदियां थाईलैण्ड के उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र से निकलती हैं और इनमें वर्षपर्यंत जलधारा का प्रवाह बना रहता है। मीनाम का मैदान अपेक्षाकृत विस्तृत है। थाईलैंड के उत्तर-पूर्व में स्थित कोरात पठार पर पश्चिम से पूर्व की ओर नामसा और नाममुन नामक दो छोटी नदियां पूर्व की ओर प्रवाहित होती हुई मीकांग नदी में मिल जाती हैं। हिन्दचीन (इण्डोचाइना) में प्रवाहित होने वाली नदियां छोटी और पूर्वगामी हैं और प्रशांत महासागर में गिरती हैं। इनमें रेड नदी जो उत्तरी वियतनाम में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा में बहती है, सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। काली और कालिया की दो सहायक नदियां हैं जो इसके क्रमशः

दक्षिण और उत्तर की ओर स्थित है। हिन्दोशिया (इंडोनेशिया) तथा फिलीपींस के विभिन्न द्वीपों के आंतरिक भागों में पर्वत श्रेणियाँ (उच्च प्रदेश) स्थित हैं जिनसे निकलने वाली नदियों बहुत छोंटी हैं और तटों की ओर प्रवाहित होती है हुई सागरीय जल में समाहित हो जाती हैं। सुमात्रा, जावा, बोर्नियों आदि सभी बड़े द्वीपों की यही स्थिति है जिनकी भूमि का ढाल मध्यवर्ती उच्चभूमि से बाहर की ओर विभिन्न दिशाओं में है।

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