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शनिवार, 4 जुलाई 2020

ब्रिटेन के खनिज संसाधनों और औद्योगिक विकास

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 ब्रिटेन के खनिज संसाधनों और औद्योगिक विकास 


 स्थिति एवं विस्तार (Location and Extent) ब्रिटिश द्वीप समूह यूरोप की मुख्य भूमि के पश्चिम में उत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित है जिसके अन्तर्गत लगभग 500 छोटे-बड़े द्वीप सम्मिलित हैं जिनमें केवल ब्रिटेन और आयरलैण्ड ही बड़े हैं। छोटे द्वीपों में हेब्रिडीज, अर्कनी शेटलैण्ड, अंगलेसी राइट, वाइट, सिली, मैन, इस्ले आदि उल्लेखनीय है। ब्रिटिश द्वीप समूह का विस्तार 49°45' उत्तरी अक्षांश से 62° उत्तरी अक्षांश और 945' पश्चिमी देशान्तर में 150' पूर्वी देशान्तर के मध्य है। राजनीतिक दृष्टि से ग्रेट ब्रिटेन और यूनाइटेड किंगडम में मौलिक अन्तर है। ग्रेट ब्रिटेन के अन्तर्गत इंग्लैण्ड, वेल्स तथा स्काटलैण्ड राज्य सम्मिलित किये जाते हैं जबकि यूनाइटेड किंगडम के अन्तर्गत इन राज्यों के अतिरिक्त उत्तरी आयरलैण्ड भी सम्मिलित होता है। आयरलैण्ड का दक्षिणी भाग एक अलग देश है जिसका नाम आयरिश रिपब्लिक है। इस प्रकार ब्रिटिश द्वीप समूह को राजनीतिक दृष्टि से दो भागों में विभक्त किया जा सकता है- (1) यूनाइटेड किंगडम, और (2) आयरिश रिपब्लिक। यूनाइटेड किंगडम का कुल क्षेत्रफल लगभग 243,48 हजार वर्ग किमी और जनसंख्या लगभग 6 करोड़ है। आयरलैण्ड का भौगोलिक क्षेत्रफल 70.27 हजार वर्ग किमी और जनसंख्या लगभग 40 लाख है। यूनाइटेड किंगडम और आयरलैण्ड में औसत जनसंख्या घनत्व क्रमशः 254 और 65 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। उच्चावच (Relief) उच्चावच की दृष्टि द्वीप समूह में मुख्यतः दो प्रकार के धरातल पाये जाते हैं- (1) पर्वतीय क्षेत्र और मैदानी क्षेत्र। इनका विवरण अग्रांकित है पर्वतीय क्षेत्र-

ब्रिटिश द्वीप समूह का अधिकांश भाग पहाड़ी है। इंग्लैण्ड के मध्य में पेनाइन पर्वत (Pennines Mountains) उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थित है जिसका विस्तार उत्तर में लेक डिस्ट्रिक्ट से लेकर दक्षिण में वेल्स तक है। इस पर्वत का सर्वोच्च शिखर स्केल पाइक (Scalel Piko) है जिसकी ऊँचाई सागरतल से 978 मीटर है। स्कॉटलैंड, वेल्स तथा आयरलैण्ड का धरातल भी पहाड़ी है। केवल सागर तटीय भागों को छोडकर स्काटलैण्ड का अधिकांश भाग पहाड़ी है। यहाँ का पर्वतीय प्रदेश उत्तर और दक्षिण दो भागों में विभक्त है जिसके बीच में क्लाइड की खाड़ी और फोर्थ की खाड़ी के मध्य निम्न भूमि है। स्कॉटलैंड की उत्तरी पहाड़ियां अपेक्षाकृत अधिक ऊँची हैं यूनाइटेड किंगडम का सर्वोच्च शिखर बेन नेविस (Ben Nevis) इसी भाग में स्थित है जो सागरतल से 1343 मीटर ऊँचा है उत्तरी स्कॉटलैंड में स्थित ग्राम्पियन पहाड़ियां दक्षिण स्कॉटलैंड की पहाड़ियों की तुलना में अधिक ऊँची हैं। वेल्स में कैम्ब्रिज पहाड़ियां चापाकार आकृति में कार्डिगन खाड़ी तट के लगभग समानान्तर स्थित है। इसकी ऊँचाई उत्तरी भाग में अधिक है। इसका सर्वोच्च शिखर स्नोडन (snowdon) 1085 मीटर ऊँचा है। यह पर्वत अति प्राचीन (कैम्ब्रियन) युग की शैली से निर्मित है।


आयरलैण्ड का उत्तरी, पश्चिमी तथा दक्षिणी भाग पर्वतीय है किन्तु यहाँ की पहाड़िया काफी नीची है। उत्तरी आयरलैण्ड में बेलफास्ट के दक्षिण में मौरी (Moure) की ऊँचाई 852 मीटर है। इंग्लैंड के पेनाइन तथा स्कॉटलैंड के पर्वत प्राचीन रवेदार शैलों से निर्मित हैं। ये पर्वत दीर्घ काल से हिमानी द्वारा घर्षित होने के परिणामस्वरूप काफी नीचे हो चके हैं और उनके शिखर गोल हो गये हैं। इन पर्वत में हिमानी निर्मित यू-आकार की घाटियां मिलती हैं। कछ विद्वान यह भी मानते है कि किसा काल में ये पर्वत अटलांटिक महासागरीय पर्वत श्रृंखला के अंग थे जो बाद में जलमग्न होने से अलग हो गये।

 मैदानी क्षेत्र-पूर्वी इंग्लैण्ड का धरातल नीचा और मैदानी है। यह यूनाइटेड किंगडम का सबसे विस्तृत समतल मैदान है। इसमें लंदन बेसिन सर्वाधिक विस्तार है। इसका ढाल पश्चिम से पूर्वी की ओर है। पेनाइन पर्वत तथा मध्यवर्ती उच्च भूमि से निकलने वाली नदियां इस मैदान से होती हुई उत्तरी सागर में गिरती है। इसकी ऊँचाई पश्चिमी भाग में 150 मीटर तक पायी जाती है। ब्रिटिश द्वीप समूह का दूसरा विशाल मैदान आयरलैण्ड के मध्य भाग में स्थित है जिनके उत्तर और दक्षिण में आयरलैण्ड का उच्च प्रदेश है। इस मैदान के बीच में अनेक हिमानी निर्मित झीलें हैं। पेनाइन पर्वत के पश्चिम में लंकाशायर तथा चेशायर के मैदान हैं। सामान्यतः ब्रिटिश द्वीप समूह के सभी द्वीपों के सागर तटीय भागों में संकरे मैदानी भाग हैं जो सागर तल से 50 मीटर से अधिक ऊँचे नहीं हैं। ब्रिटेन में रिया तट (Ria coat) अधिक मिलते हैं जो सागर तल में उत्थान तथा स्थलीय अवतल के कारण नदी घाटियों के निमग्न होने से निर्मित हुए हैं। जलवायु (Climate) यूनाइटेड किंगडम और आयरलैण्ड की जलवायु समुद्री समशीतोष्ण है। सम्पूर्ण द्वीप समूह पछुआ हवाओं की पेटी में स्थिती है जहाँ वर्षपर्यन्त पछुआ हवाएं सागर से स्थल की ओर (पश्चिम से पूर्व की ओर) प्रवाहित होती हैं। इन हवाओं के साथ शीतोष्ण चक्रवात आते हैं जिनसे वर्ष भर वर्षा होती रहती है। इस प्रदेश के तापमान पर प्रचलित पवनों तथा सागरीय जलधाराओं का पर्याप्त प्रभाव पाया जाता है। इनके समकारी प्रभाव से वार्षिक समानान्तर कम हो जाता है। ग्रीष्मकालीन औसत तापमान 15° से 21 सेल्सियस के मध्य पाया जाता है। शीतकालीन औसत तापमान 0° से 10° सेल्सियस रहता है। गर्म अटलांटिक ड्रिफ्ट के प्रभाव से तटीय भागों में तापमान हिमांक से ऊपर रहता है किन्तु आंतरिक भागों में यह हिमांक से नीचे चला जाता है। रात में प्रायः न्यूनतम तापमान हिमांक से नीचे चला जाता है। लन्दन में अब तक न्यूनतम तापमान 15.5° सेल्सियस अंकित किया जा चुका है। जनवरी-फरवरी के महीने में प्रायः पाला पड़ जाया करता है। उत्तर से आने वाली बर्फीली हवाओं के कारण शीत लहरों का आगमन सामान्य घटना होती है। यद्यपि वर्षा का वितरण वर्ष भर लगभग समान होता है किन्तु शीत ऋतु में ग्रीष्म ऋतु की अपेक्षा अधिक वर्षा होती है। यहाँ कोई भी महीना बिल्कुल शुष्क नहीं रहता है। आंतरिक भागों में गर्मियों में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होती है। यहाँ वार्षिक वर्षा का औसत 100 से 200 सेमी पाया जाता है। शीत ऋतु में हिमपात के रूप में भी वर्षा होती है। 

प्राकृतिक वनस्पति (Natural Vegetation )-

वर्ष पर्यन्त आर्द्रता तथा वर्षा की सुमता के कारण यह प्रदेश सघन वानस्पतिक विकास के लिए उपयुक्त है। प्राचीन काल में पूरे ब्रिटेन पर घने जंगल का आवरण था किन्तु वर्तमान समय में मैदानी भागों से वनों को काटकर उनके स्थान पर खेत और बस्तियां बना ली गयी हैं। घने वन अब केवल ऊँची पहाड़ियों पंर ही मिलते हैं। ब्रिटिश द्वीप समूह में ओक, लिन्डेन बीच, एल्म आदि के वन पाये जाते हैं। शेटलैंड आदि उत्तरी द्वीपों तथा उत्तरी स्काटलैण्ड की पहाड़ियों पर कोणधारी वन भी मिलते हैं जिनमें स्पूस, हेमलाक, सिडार, फर, डगलस आदि के वक्ष पाये जाते हैं। इन कोमल लकड़ी वाले वनों का आर्थिक महत्व अधिक है क्योंकि इनका उपयोग लग्दी, सेल्युलोज तथा कागज बनाने में
अधिक होता है।

यूनाइटेड किंगडम और आयरलैण्ड की क्रमशः 4 और 2 प्रतिशत भूमि पर ही बन पाये जाते हैं। कैम्ब्रिज नगर के उत्तर-पूर्व में स्थित ब्रेकलैण्ड (Breckland) यूनाइटेड किंगडम का सबसे बड़ा दन है। नारदम्बरौर और ग्लूस्टरशायर के वन इससे छोटे आकार के हैं। face (Soils)

ब्रिटेन और आयरलैण्ड के पर्वतीय भागों में आग्नेय तथा कार्यातरित शैलों के विखण्डन से निर्मित पहाड़ी मिट्टी मिलती है जिनमें खनिज तत्वों की अधिकता पायी जाती है। यह मिट्टी चरागाह तथा बागवानी के लिये उपयुक्त है। समुद्र तटीय मैदानी भागों में हिमोढ़ तथा जलोढ़ मिट्टियों के जमाद हैं जो उपजाऊ किस्म की है। लन्दन बेसिन की मिट्टी कृषि के लिए सर्वाधिक उपजाऊ है। मध्यवर्ती आयरलैण्ड में उपजाऊ मिट्टी वाला मैदानी भाग कृषि के लिए उपयुक्त है। कृषि (Agriculture) ब्रिटिश द्वीप समूह के लगभग 25प्रतिशत भूभाग पर कृषि की जाती है। अठारहवीं शताब्दी से पहले ब्रिटेन कृषि प्रधान देश था। इसकी अर्थव्यवस्था का मूलाधार कृषि थी जलवायु और मिट्टी के अनुसार यहाँ विविध प्रकार की शीतोष्ण कटिबंधीय फसलें उगायी जाती थीं जिनमें गेहूँ जो राई, चुकंदर, आलू, सेम आदि प्रमुख थे। ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैण्ड की लगभग 70 प्रतिशत भूमि कृषि योग्य है किन्तु औद्योगिक क्रांति के पश्चात देश में तीव्र औद्योगिक विकास और नगरीकरण से अर्थव्यवस्था में कृषि का महल निरन्तर घटता गया और ग्रामीण जनसंख्या का पलायन नगरों की ओर होता गया। इस प्रकार वर्तमान समय में यूनाइटेड किंगडम की मात्र 4 प्रतिशत कार्यशील जनसंख्या ही कृषि में संलग्न है। कृषि कार्यो में यंत्रों के प्रयोग से मानव श्रम का महत्व कम हो गया है। यूनाइटेड किंगडम में कृषि भूमि पर कुछ विशिष्ट फसलों के अतिरिक्त चरागाह भी बनाये गये हैं जिस पर डेरी तथा पशुपालन उद्योग को विकसित किया गया है। महानगरों के समीपवर्ती भागों में नगरीय मांग के अनुसार फलों, सब्जियों, फूलों आदि की कृषि की जाती है और उत्पागदनों को तीव्र यातायात के साधनों द्वारा नगरों में पहुँचाया जाता है। इस कृषि पद्धति को ट्रक फार्मिंग (Truck Farming) के नाम से जाना जाता है। कई प्रकार के फूलों तथा सब्जियों की कृषि शीशे के पौध घरों (Green houses)में भी की जाती है। ब्रिटिश द्वीप समूह के विभिन्न भागों में उत्पन्न की जाने वाली कृषि उपजों में गेहूँ जो मटर राई,चुकंदर,चारा,सब्जियां आदि प्रमुख हैं। अलग-अलग पशु फार्म पर दूध के लिए गाेमांस के लिए गाय, सुअर, भेंड आदि तथा अण्डों के लिए मुर्गियां पाली जाती हैं। खनिज एवं ऊर्जा संसाधन (Minerals and Energy Resources)- यूनाइटेड किंगडम में लोहा इस्पात, कोयला,पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस उपलब्ध होते है। द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व तक ग्रेट ब्रिटेन कोयले के उत्पादन में अग्रणी देश था, किन्तु अत्यधिक दोहन के कारण खदानें बहुत गहरी तथा खनन के व्यय पूर्ण हो जाने के कारण कोयला उत्पादन अनार्थिक सिद्ध हो गया है। यॉर्कशायर-नॉटिंघम- डर्बीशायर क्षेत्र, नॉर्थम्बरलैंड-डरहम क्षेत्र,

लंकाशायर, वेल्स, क्लाइड घांटी क्षेत्र, ब्रिस्टल आदि क्षेत्रों से कुछ कोयला प्राप्त किया जाता है।
लौह अयस्क उत्पादन की दशा भी कोयले जैसी ही है। यहाँ निम्न कोटि के लौह अयस्क लिमोनाइट) के भण्डार मिलते हैं। लोहा-इस्पात के कारखानों के लिए संयुक्त राज्य, ब्राजील, भारत, आस्ट्रेलिया आदि से लौह अयस्क आयात की जाती है। अल्प मात्रा में टिन, पोटाश, फास्फेट, चूना पत्थर, खड़िया आदि का उत्पादन (खनन किया जाता है। यूरोपीय देशों में पेट्रोलियम उत्पादन में यूनाइटेड किंगडम का महत्वपूर्ण स्थान है। स्कॉटलैण्ड के पूर्वी भाग तथा उत्तरी सागर में प्राप्त पेट्रोलियम के नवीन भण्डारों का दोहन किया जाता है। इन्हीं क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस भी उपलब्ध होती है। परमाणु ऊर्जा के लिए कच्चे माल की कमी होने के कारण आयातित कच्चे माल से परमाणु
ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है। यूनाइटेड किंगडम में विश्व की 4% से अधिक परमाणु ऊर्जा का उत्पादन होता है। इसके उत्पादन में यूनाइटेड किंगडम यूरोप में (फ्रांस, जर्मनी तथा रूस के बाद) चौथे स्थान पर है। यहाँ 40 से अधिक परमाणु रिएक्टर कार्यरत हैं। विनिर्माण उद्योग (Manufacturing Industries) ब्रिटेन में सूती व,ऊनी वन,लौह-इस्पात, जलयान निर्माण, वायुयान निर्माण, मोटर गाडी. रसायन,इंजीनियरिंग आदि उद्योग विकसित हैं।

1. सूती वस्त्र उद्योग- ब्रिटेन का सूती वस्त्र उद्योग दो क्षेत्रों में संकेन्द्रित है- (क) लंकाशायर तथा (ख) ग्लासगो। लंकाशायर क्षेत्र में मानचेस्टर, बोल्टन, बरी, रोशडेल, ओल्डहम तथा स्टॉकपोर्ट में लगभग 19 किमी0 की अर्द्ध चन्द्राकार पेटी में सूती वस्त्र उद्योग का असाधारण संकेन्द्रण मिलता है। उल्लेखनीय है कि इसी क्षेत्र में ब्रिटिश सूती वस्त्र उद्योग का पूर्वारम्भ हुआ था। ग्लासगो क्षेत्र में पेसले तथा ग्लासगो प्रमुख हैं, किन्तु एशियाई विकासशील देशों से सूती वस्र उद्योग से स्पद्ध्धा के कारण ब्रिटिश सूती वस्त्र उद्योग अब महत्वहीन हो गया है।

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2. ऊनी वस्त्र उद्योग- मध्य युग में ब्रिटेन का ऊनी वस्त्र उद्योग अत्यधिक उन्नत था वेस्ट आंग्लिया तथा वेस्ट राइडिंग क्षेत्रों में 18वीं शताब्दी तक ऊनी वस्त्र उद्योग उन्नत दशा में था वेस्ट राइडिंग क्षेत्र में ऊनी वस्रों विशेषीकरण विभिन्न केन्द्रों में हो गया था। टवीड घाटी तथा पश्चिमी इंग्लैण्ड भी ऊनी वस्रोत्पादन में महत्वपूर्ण थे।

लोहा-इस्पात उद्योग ब्रिटेन में प्राचीन काल से ही कुटीर स्तर पर लोहा गलाने का व्यवसाय प्रचलित था औद्योगिक क्रान्ति के पश्चात उन्नीसवीं शताब्दी में कारखाना स्तर पर उत्पादन होने लगा। 1890 के पूर्व तक ब्रिटेन विश्व का वृहत्तम लोहा-इस्पात उत्पादक देश था, किन्तु क्रमशः यह संयुक्त राज्य,जर्मनी, सोवियत संघ, जापान आदि से पिछड़ता गया, अब यह विश्व का मात्र 2% इस्पात उत्पादन करता है। इसके प्रमुख इस्पात उत्पादक क्षेत्र (क) दक्षिणी वेल्स. (ख) उत्त्तरी-पूर्वी तटीय प्रदेश, (ग) स्कॉटलैण्ड की मध्यवर्ती (क्लाइड) घाटी. (घ)बर्मिंघम, (ड) शेफील्ड तथा (च) फर्नेस हैं। इंजीनियरिंग उद्योग-

ग्रेट ब्रिटेन को विश्व में सर्वप्रथम मशीनों तथा मशीनी उपकरणों का निर्माण करने का गौरव प्राप्त है। इस उद्योग का विकास चार प्रमुख क्षेत्रों में हुआ है - (क) लन्दन औद्योगिक क्षेत्र, (ख) शेफील्ड क्षेत्र (ग) लंकाशायर क्षेत्र तथा (घ) दक्षिणी स्कॉटलैण्ड क्षेत्र। मोटर-गाड़ी उद्योग मोटर-गाड़ी निर्माण एक असेम्बली उद्योग है। ब्रिटेन विश्व का चौथा वहत्तम मोटर-कार निर्माता देश है, जो लग्जरी कारों के निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। कॉवेन्ट्री,क्रीव, ऑक्सफोर्ड तथा लन्दन इस उद्योग के प्रमुख केन्द्र है। यहाँ अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियां कार निर्माण में संलग्न हैं। 6. रेल के इंजन का निर्माण सर्वप्रथम ब्रिटेन में ही हुआ था। रेल के डिब्बे (वैगन, कोच) का निर्माण क्रीव, यार्क, बर्मिघम, एशफोर्ड, डर्बी, ग्लासगो आदि केन्द्रों में किया जाता है। इंजन प्रेस्टर, मैनचेस्टर, स्टेफर्ड आदि केन्द्रों में बनाए जाते हैं।

7. वायुयान निर्माण यह भी एक असेम्बली उद्योग है। द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व तक ब्रिटेन वायुयान निर्माण के लिए प्रसिद्ध था, किन्तु बाद में यहाँ प्रक्षेपास्त्रों के निर्माण को वरीयता दी जाने लगी। यहाँ वायुयान निर्माण के तीन प्रमुख क्षेत्र है- (क) वृहत्तर लन्दन, (ख) मध्य क्षेत्र में कॉवेन्ट्री एवं हैम्पटन, (ग) दक्षिण क्षेत्र में - साउथेम्प्टन तथा ईस्ट कोव।
 8. जलयान निर्माण-

ब्रिटेन दीर्घकाल तक जलयान निर्माण का अग्रणी देश रहा है, किन्तु संयुक्त राज्य, जापान, स आदि से पिछड़ जाने पर इसका महत्व घट गया है। यहाँ पोत निर्माण के चार प्रमुख क्षेत्र स्लाइड घाटी, (ख)उत्तरी पूर्वी, (ग) उतरी-पश्चिमी इंग्लैण्ड तथा (घ)उत्तरी आयरलैण्ड का बेलफास्ट क्षेत्रों कुछ लघु केन्द्रों पर लघुपोत एवं नौकाएँ बनाई जाती हैं। इनमें एबर डीन, डण्डी साउथेम्प्टन, पोटर्समाउथ, लीथ हल आदि उल्लेखनीय हैं।

9.रासायनिक उद्योग न्यूकैसिल, बर्मिंघम, ब्रिस्टल, तथा लन्दन में काँच तथा लिवरपूल, मैनचेस्टर, ग्लासगो, न्यूकैसिल आदि में विविध प्रकार के रासायनिक पदार्थ बनाए जाते हैं। प्लास्टिक, सिन्थेटिक रेशे (धागा),कृत्रिम रबड़, रंगरोगन, कीटनाशक, चमड़ा शोधन, तेल शोधन अन्य उद्योग हैं। औद्योगिक प्रदेश (Industrial Regions)- यूनाइटेड किंगडम विश्व के प्रमुख औद्योगिक देशों में गिना जाता है। यहाँ औद्योगिक प्रदेश बहुसंख्य तथा बिखरे हुए हैं। प्रमुख औद्योगिक प्रदेश निम्नवत हैं (1) लन्दन, (2) लंकाशायर, (3) यॉर्कशायर, (4)मिडलैण्ड, (5) नॉर्थम्बरलैंड-डरहम, (6) कम्बरलैण्ड. (7)स्कॉटलैण्ड, (8)उत्तरी वेल्स, (७) दक्षिणी वेल्स तथा (10) ब्रिस्टल प्रत्येक औद्योगिक प्रदेश में उद्योगों का विशिष्टीकरण मिलता है, जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है

1. लन्दन औद्योगिक प्रदेश- ग्रेट ब्रिटेन का वृहत्तम औद्योगिक प्रदेश है, जिसका विस्तार टेम्स नदी के मुहाने पर स्थित लन्दन मेट्रेपॉलिटन क्षेत्र पर है। यहाँ उद्योगों की विविधता पाई जाती है, जिनमें इन्जीनियरिंग, रासायनिक तथा परिधान (gament) उद्योग प्रमुख हैं। इस प्रदेश को अनेक भौगोलिक-आर्थिक सुविधाएँ प्राप्त हैं; जैसे-लंदन का प्रमुख व्यापार केन्द्र होना, पूँजी, पत्तन, परिवहन साधनों का सघन जाल आदि। लन्दन से 50 किमी0 अर्द्धव्यास में आठ प्रमुख नगरों में विविध प्रकार के उद्योग संकेन्द्रित हैं।

2. लंकाशायर प्रदेश- यह प्रदेश वस्त्र उद्योग के लिए विश्वविख्यात रहा है। यहाँ मैनचेस्टर देश का वृहत्तम वस्रोत्पादक केन्द्र है। स्कूल.लिलबर्न,रोसडेल, स्टॉकपोर्ट,ओल्डम, डार्विन आदि अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक केन्द्र हैं।

3. यार्कशायर प्रदेश- यह प्रदेश लंकाशायर प्रदेश के पूर्व में आन्तरिक भाग में स्थित है। यहाँ शेफील्ड सर्वप्रमुख औद्योगिक केन्द्र है। लेडीस, ब्रेडफोर्ड, यॉर्क, डर्बी, नॉटिघम आदि अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक केन्द्र हैं। यहाँ वस्र, औषधि, रबड़ एवं प्लास्टिक का सामान, पेट आदि मुख्यतः निर्मित होते है।

4.मिडलैंड प्रदेश- यह प्रदेश इंग्लैंड के मध्य में स्थित है। इसका प्रमुख केन्द्र बर्मिघम है, अतः इस प्रदेश को प्रदेश को बर्मिंघम प्रदेश भी कहते हैं। यह प्रदेश लोहा, इस्पात उद्योग के लिए सबसे प्रसिद्ध है। भारी इंजीनियरिंग उद्योग, रेल के इंजन, मोटर-कार,टैंक आदि युद्धास्र यहाँ बनाए जाते हैं। उर्वरक, वैज्ञानिक उपकरण,रासायनिक उद्योग भी विकसित हैं। बर्मिंघम के अतिरिक्त हैम्पटन,लीसेस्टर, कॉवेण्ट्री, लेमिंगटन आदि अन्य प्रमुख औद्योगिक केन्द्र हैं।

5. नॉर्थम्बरलैण्ड-डरहम प्रदेश इंग्लैण्ड के उत्तरी-पूर्वी तट पर स्थित यह प्रदेश लोहा इस्पात उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। इस अतिरिक्त भारी इंजीनियरिंग, जलयान निर्माण, रसायन उद्योग आदि भी यहाँ स्थापित हैं। न्यूकैसिल सण्डरलैण्ड, हार्टपूल, डरहम, मिडिल्सबरो, स्टॉकटन आदि प्रमुख औद्योगिक केन्द्र हैं। 6.कम्बरलैण्ड प्रदेश- यह एक लघु औद्योगिक प्रदेश है, जो इंग्लैण्ड के उत्तरी-पश्चिमी तट पर स्थित है। यहाँ हल्के
उद्योग, वैज्ञानिक एवं विद्युत उपकरण, मशीनरी रसायन, सूत्र तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग विशिष्ट है। तेरो तथा कारलिस्ले प्रमुख औद्योगिक केन्द्र है। 7.स्कॉटलैण्ड प्रदेश यह औद्योगिक प्रदेश स्कॉटलैण्ड के मध्य भाग में स्थित है इसका विस्तार पश्चिम में क्लाइड नदी के मुहाने से पूर्व में एडिनबरा तक लगभग 75 किमी0 चौडाई में है। यहाँ ग्लासगो, हण्डी तथा एडिनबरा प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। इस प्रदेश में वस्र, लौह-इस्पात, भारी इन्जीनियरिंग, जलयान, मोटर-कार आदि उद्योग स्थापित है । 8.उत्तरी वेल्स प्रदेश वेल्स के उत्तरी भाग में स्थित इस लघु औद्योगिक प्रदेश में लोहा, इस्पात, भारी मशीनरी तथा रासायनिक उद्योगों का विशेषीकरण मिलता है। चेस्टर, विल्टशायर, क्रीव आदि प्रमुख औद्योगिक केन्द्र हैं। 9.दक्षिणी वेल्स प्रदेश वेल्स के दक्षिणी भाग में स्थित यह औद्योगिक प्रदेश लोहा-इस्पात, भारी मशीनरी, कृषि यन्त्र तथा रासायनिक उद्योगों के लिए प्रसिद्ध है कार्डिफ, न्यूपोर्ट, स्वांसी प्रमुख पत्तन एवं औद्योगिक केन्द्र हैं।

10. ब्रिस्टल प्रदेश इंग्लैण्ड के पश्चिमी तट पर स्थित यह लघु औद्योगिक प्रदेश इंग्लैण्ड का महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रदेश है। चेल्टनहेम प्रमुख औद्योगिक केन्द्र हैं। यह उल्लेखनीय तथ्य है कि उद्योग जगत में आधुनिकतम प्रवृत्ति के रूप में "हाईटैक"(high tech)उद्योग विकसित हो रहे हैं, जिनमें बड़े पैमाने के उत्पादन तथा अधिक पूँजी के उपयोग का र्थान श्रम सघन मूल्य संवर्धित क्रियाकलापों ने ले लिया है। ग्रेट ब्रिटेन में भी हाईटैक विनिर्माण, कम्प्यूटर आधारित सूचना सेवाएँ, शोध एवं विकास सम्बन्धी क्रिया-कलापों कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में संकेन्द्रित हो गए हैं, जिन्हें "टेक्रोपोल" (technopoles)कहा जाता है। हाईटैक उद्योगों में उच्च प्रौद्योगिकीय उत्पाद: जैसे - इलेक्ट्रॉनिक तथा सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रोबोटिक्स, दूरसंचार के उपकरण आदि उत्पादों का निर्माण सम्मिलित है। इन सभी में कम्प्यूटर का मूलभूत प्रयोग होता है। इंग्लैण्ड में "M-4कॉरिडोर", जो लन्दन के पश्चिमी तथा उत्तरी सिरे पर एक चन्द्राकार क्षेत्र में स्थित है. प्रमुखतः उल्लेखनीय टेक्रोपोल है। स्कॉटलैंड में एडिनबरा के निकट "सिलिकन ग्लेन"अन्य उल्लेखनीय टेक्रोपोल है। यहाँ यह उल्लेख करना भी उपयुक्त होगा कि विनिर्माण क्षेत्र में यूनाइटेड किंगडम की मात्र 18% श्रम शक्ति संगठन है, जबकि उत्पादक सेवाओं (producer services) में 81% श्रमकर्ता कार्यरत हैं। इन सेवाओं में बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान संलग्न हैं उत्पादक सेवाओं में बैंकिंग, एकाउंटिंग, कानूनी सेवाएँ, शोध एवं विकास, बीमा, विपणन तथा थोक व्यापार, भवन सम्पत्ति आदि में दलाली (brokerage), अनेक प्रकार की सलाहकारिता (consultancy). सूचनाओं की प्रोसेसिंग आदि सम्मिलित हैं। यही नहीं, लन्दन विश्व का अग्रणी वित्तीय केन्द्र भी है। लन्दन में पर्यटन उद्योग भी उन्नत है। परिवहन (Transportation)- ग्रेट ब्रिटेन के औद्योगिक विकास में परिवहन के साधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहाँ स्थलीय (रेल तथा सहके), जलीय (आन्तरिक एवं समुद्री) तथा वायु परिवहन अत्यधिक विकसित हैं। आधुनिक युग में वायुयान तथा सड़कों के विकास के कारण रेल तथा आन्तरिक जल परिवहन का महत्व गौण हो गया है। अधिकांश यात्री परिवहन अब वायुयानों तथा ऑटोबॉन (autobahn) प्रशस्त सड़कें) द्वारा होने लगी है। ये ऑटोबॉन देश के अन्दर तथा विदेशों के सभी बड़े नगरों को जोड़ते हैं। यही नहीं, इंग्लिश चैनल के आर-पार इंग्लैण्ड तथा फ्रांस को जोड़ते हुए चैनल-टनल का निर्माण भी पूरा हो गया है।
जनसंख्या (Population) ब्रिटिश द्वीप समूह में मानव बसाव दक्षिणी यूरोप की तुलना में काफी देर से प्रारम्भ हुआ यूनानी तथा रोमन सभ्यताओं के उत्कर्ष काल में कुछ आदिम जातियाँ ब्रिटिश द्वीपों के वनाच्छादित क्षेत्र में निवास करती थीं। पाँचवी शताब्दी में एंजिल्स,जूट्स तथा सैक्सन जातियों ने इंग्लैण्ड पर अधिकार कर लिया, उनके नाम पर ही द्वीप का नामकरण (इंग्लैण्ड ) हुआ एंजिल्स के पूर्व द्वीप पर सेलिटक लोग रहते थे। कालान्तर में जर्मन तथा फ्रांसीसियों ने भी यहाँ आक्रमण करके द्वीप पर अधिकार कर लिया। अन्ततः इंग्लैण्ड की विजय हुई। यूनाइटेड किंगडम की वर्तमान (2012) में जनसंख्या 63.2 मिलियन (यूरोपीय की जनसंख्या का लगभग 9%) है। जनसंख्या का औसत जनघनत्व 258 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी0 है। लंकाशायर, मध्यवर्ती मैदान, उत्तरी-पूर्वी इंग्लैण्ड दक्षिणी-पूर्वी इंग्लैण्ड अधिक घने-बसे हैं, जबकि र्कॉटलैण्ड, झील प्रदेश, डेवन, कॉर्नवाल तथा वेल्स कम आबाद हैं। औद्योगिक क्रांति के पूर्व यूनाइटेड किंगडम की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण थो, जो विविध प्रकार के कृषि कार्यों में संलग्न थी, किन्तु औद्योगिक क्रान्ति के पश्चात यहाँ नगरीकरण की वृद्धि होती गई। आज देश की 83% जनसंख्या नगरों में निवास करती है इंग्लैण्ड की जनसंख्या 49 मिलियन है। वेल्स की 28.99 मिलियन तथा स्कॉटलैण्ड की 5.1 मिलियन है। उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध तक यूनाइटेड किंगडम की जनसंख्या तीव्र दर से बढ़ी। शताब्दी के अन्त तक ब्रिटेन जनांकिकीय संक्रमण की अन्तिम अवस्था (निम्न जन्म दर निम्न मृत्युदर) में प्रवेश कर चुका था। तब से जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि दर मन्द रही है। वर्तमान में यह 0.4% है। औसत जन्म दर 13 (प्रति हजार) तथा मृत्यु दर 9 (प्रति हजार) है। ग्रेट ब्रिटेन की जनसंख्या का जीवन स्तर उच्च है। यहाँ प्रति व्यक्ति वार्षिक आय का औसत (2010) में 35840 अमेरिकी डॉलर था। जीवन प्रत्याशा का औसत 80 वर्ष है। साक्षरता शत प्रतिशत है। यहाँ लगभग 72% जनसंख्या ईसाई धर्म (एंग्लिकन कैथोलिक, प्रेस्बिटेरिन, मेथोडिस्था का पालन करती है। अन्य धर्मों में इस्लाम (2.7%) तथा हिन्दू (1%) उल्लेखनीय हैं। इंग्लिश, वेल्श,स्कॉटिश तथा गैलिक भाषा मुख्यतः प्रचलित हैं। प्रमुख नगर - लन्दन नगर समूह (जनसंख्या 13 मिलियन, 2008 में) देश की राजधानी, प्रमुख सांस्कृतिक, औद्योगिक एवं व्यापारिक केन्द्र है। ग्लासगो महत्वपूर्ण पत्तन है। एडिनबरा स्कॉटलैण्ट की राजधानी है। मैनचेस्टर प्रमुख औद्योगिक नगर एवं नदीय पत्तन है। बर्मिघम इस्पात नगरी है। कार्डिफ लीडस, लिवरपूल, ब्रिस्टल, एबरडीन आदि अन्य प्रमुख औद्योगिक नगर हैं।

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