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एशिया में जनसंख्या वितरण की प्रमुख विशेषताए

एशिया में जनसंख्या वितरण की प्रमुख विशेषताए 

जनसंख्या का वितरण (Distribution of Population) एशिया विश्व का विशालतम महाद्वीप है जिसके अन्तर्गत समस्त संसार का लगभग एक-तिहाई भौगोलिक क्षेत्र सम्मिलित है। जनसंख्या की दृष्टि से यह और भी बड़ा महाद्वीप है क्योंकि विश्व की 60 प्रतिशत (388 करोड़ जनसंख्या इसी महाद्वीप में रहती है। एशिया विविधताओं तथी पराकाष्ठाओं का महाद्वीप है जिसके विभिन्न भागों की स्थलाकतियों जलवायु प्राकृतिक वनस्पति, मिट्टी, खनिज एवं शक्ति संसाधनों की स्थिति आदि में अत्यधिक भिन्नता तथा विषमता देखने को मिलती है। क्षेत्रीय भिन्नताओं के कारण पूर्वी दक्षिणी-पूर्वी तथा दक्षिणी एशिया के कुछ देशों में अधिक जनसंख्या का संकेन्द्रण पाया जाता है जबकि अनेक अभाव ग्रस्त क्षेत्रों जैसे रेगिस्तानों, सघन वन प्रदेशो, उच्च पर्वतीय भागों में अल्प तथा अत्यन्त जनसंख्या मिलती है अथवा वे जनविहीन हैं। जनसंख्या के वितरण प्रतिरूप तथा सघनता के अनुसार एशिया को तीन प्रकार के क्षेत्रों में विभक्त किया जा सकता है।

- (अ) अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र (ब) मध्यम जनसंख्या वाले क्षेत्र, और (स) अल्प जनसंख्या वाले क्षेत्र। (अ) अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र-एशिया में मानसूनी जलवाय वाले क्षेत्रों में जहाँ पर्याप्त वर्षा होती है और कृषि के लिए उपजाऊ समतल भूमि उपलब्ध है, वहाँ जनसंख्या का संकेन्द्रण अधिक है। एशिया में अधिक जनसंख्या के दो स्पष्ट क्षेत्र है -

 (a) पूर्वी एशिया जिसमें चीन, जापान, ताइवान तथा कोरिया देश आते हैं, और (ii)दक्षिणी एशिया जिसके अन्तर्गत भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका सम्मिलित हैं। पूर्वी एशिया- विश्व की लगभग एक-चौथाई जनसंख्या पूर्वी एशिया में पायी जाती है। जनसंख्या की दृष्टि से चीन विश्व की बृहत्म देश है जहाँ 136.4 करोड (2014) जनसंख्या का निवास है। यह विश्त की लगभग 19 प्रतिशत और एशिया की लगभग 31 प्रतिशत है। चीन की अधिकांश जनसंख्या इसके दक्षिणी-पूर्वी भाग में संकेन्द्रित है जो समतल और उपजाऊ है। चीन का विशाल मैदान, जेचवान बेसिन, हवांग हो बेसिन, यांगटिसीक्यांग बेसिन, सिक्यांग बेसिन तथा समुद्र तटीय भाग अधिक सघन बसे हुए क्षेत्र हैं। समतल धरातल, जलोढ़ तथा लोयस की उपजाऊ मिट्टी और आर्द्र मानसूनी है जलवायु की उपलब्धता के परिणामस्वरूप चीन के पूर्वी भाग में प्राचीन काल से ही कृषि कार्य होता आ रहा है। पिछले 50-60 वर्षों में यहाँ अनेक औद्योगिक केन्द्र और उद्योग विकसित हुए हैं किन्तु अब भी चीन की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि में संलग्न है और ग्रामों में रहती है। चीन के दक्षिणी-पूर्वी भाग में जनसंख्या का घनत्व 1000 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी 0 से अधिक है। इसके विपरीत चीन का उत्तरी-पश्चिमी भाग पहाड़ी-पठारी होने के कारण अत्यल्प जनसंख्या वाला है। पिछले दो दशकों में चीन की जनसंख्या वृद्धि दर में उल्लेखनीय ह्रास की प्रवृत्ति रही है।

जापान पूर्वी एशिया का अधिक एवं सघन जनसंख्या वाला दूसरा देश है जहाँ लगभग 12.7 करोड़ (2014) जनसंख्या का निवास है। जापान एशिया का एक मात्र उद्योग-प्रधान देश है जिसकी गणना विकसित देशों में की जाती है। द्वीपीय देश जापान की मात्र 16 प्रतिशत भूमि पर ही खेती की जाती है क्योंकि इसकी अधिकांश भूमि पहाडी और ऊँची-नीची है। यद्यपि यहाँ गहन कृषि द्वारा विभिन्न फसलों से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जाता है किन्तु जापानी लोगों की जीविका का मुख्य आधार यहाँ का औद्योगिक उत्पादन है। जापान के बड़े-बड़े औद्योगिक केन्द्र, नगर तथा समुद्रपतन समुद्रतटीय भागों में स्थित हैं। जापान में जनसंख्या का घनत्व 350 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी0 है।


दक्षिणी तथा उत्तरी कोरिया की जनसंख्या क्रमशः 50 और 24 करोड़ है और जनसंख्या का घनत्व क्रमशः 507 और 206 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी0 है। यहां कृषि के अतिरिक्त पर्याप्त औद्योगिक विकास हुआ है। दक्षिण एशिया-

इसके अन्तर्गत अधिक जनसंख्या वाले देश हैं भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, और श्रीलंका। भारत जनसंख्या की दृष्टि से चीन के पश्चात विश्व का द्वितीय बृहत्तम देश है जहाँ 129.6 करोड़ (2014) जनसंख्या का निवास है। विश्व की 18 प्रतिशत जनसंख्या भारत में रहती है। भारत की अधिकांश जनसंख्या नदियों के विस्तृत उपजाऊ मैदानों में पायी जाती है। भारत का उत्तरी मैदान विश्व के प्रमुख कृषि प्रदेशों में से एक है जहाँ पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न, दालें, तिलहन, गन्ना आदि कीफसले उगायी जाती हैं। दक्षिणी पठार पर जनसंख्या की सघनता उत्तरी मैदान की तुलना में कम है किन्तु इराक उत्तरी-पश्चिमी भाग में उपजाऊ काली मिटटी प्रदेश में जनसंख्या का घनत्व अपेक्षाकृत अधिक है। पश्चिमी तथा पूर्वी तटीय मैदानों विशेष रूप से नदियों के डेल्टार्ड भागों में जनसंख्या का संकेन्द्रण अधिक हुआ है। उत्तर में हिमालय तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में जनसंख्या का घनत्व कम पाया जाता है। भारत में जनसंख्या की सर्वाधिक सघनता गंगा नदी के निचले मैदान (पश्चिमी बंगाल) में पायी जाती है। सतलज तथा गंगा के मैदान में जनसंख्या की सघनता अधिक है। जनगणना 2011 के अनुसार भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 38 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी० है किन्तु पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब और हरियाणा में यह 400 व्यक्ति प्रति किमी0 से अधिक है। अरुणाचल प्रदेश (131.मिजोरम अण्डमान एवं निकोबार सिक्किम तथा जम्मू एवं कश्मीर जैसे पर्वतीय राज्यों में जनसंख्या का घनत्व 100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी0 से कम है। भारत की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है और लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि में संलग्न है तथा गाँवों में रहती है। स्वतंत्रता के पश्चात देश ने पर्याप्त औद्योगिक प्रगति की है और अनेक औद्योगिक तथा नगरीय केन्द्रों केन्द्रों का विकास हुआ है।


पाकिस्तान की जनसंख्या 19.4 करोड़ है जो विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 2.5 प्रतिशत है। इसकी अधिकांश जनसंख्या सिन्धु नदी की घाटी में पायी जाती है। पाकिस्तान में औसत जनसंख्या घनत्व 244 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। देश की 70 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ग्रामीण और कृषि, पशुपालन आदि प्राथमिक कार्यों से जीविका प्राप्त करती है। बांग्लादेश की जनसंख्या पाकिस्तान से थोड़ा कम (15.9 करोड़) है। इसकी अधिकांश (लगभग 90प्रतिशत) जनसंख्या नदी निर्मित जलोढ़ मैदान तथा डेल्टाई भाग में पायी जाती है। उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी तथा पर्याप्त वर्षा वाले इस प्रदेश में मुख्य रूप से चावल और जूट की खेती की जाती है। बांग्लादेश का औसत जनसंख्या घनत्व 1101 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है जो विश्व के किसी भी देश के जनसंख्या घनत्व से अधिक है। बांग्लादेश की 80 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ग्रामीण है और कृषि, मत्स्याखेट, पशुपालन आदि प्राथमिक कार्यों में संतान है। मध्यम जनसंख्या वाले क्षेत्र पश्चिमी एशिया तथा दक्षिणी-पूर्वी एशिया के देशों में जनसंख्या का वितरण मध्यम प्रकार का है। पश्चिमी एशिया में भूमध्य सागर से संलग्न देशों-टर्की, इजराइल,जाईन, सीरिया आदि देशों में वर्षा तथा कृषि योग्य भूमि की कमी के कारण कृषि उत्पादन कम होता है और यहाँ औद्योगीकरण भी कम हुआ है। अतः संसाधनों के कम विकसित होने के पश्चिम एशिया के देशों में जनसंख्या का वितरण मध्यम प्रकार का है। दक्षिण-पूर्व एशिया की अधिकांश भूमि पहाड़ी है और कृषि योग्य भूमि सीमित है जो मुख्यतः नदी घाटियों में पायी जाती है। मध्य एशिया के स्टोपी घास वाले मैदान में उपजाऊ चरनोजम मिट्टी मिलती है और मुख्यतः गेहूँ की खेती की जाती है इस प्रदेश में भी जनसंख्या का वितरण मध्य प्रकार का है। अल्प जनसंख्या वाले क्षेत्र दक्षिणी-पश्चिम एशिया तथा मध्य एशिया के शुष्क प्रदेशों में बहुत कम जनसंख्या पायी जाती है। जलयुक्त नदी घाटियों में तथा स्थलीय जलाशयों के निकट थोड़ी संख्या में मानव निवास देखा जा सकता है। सऊदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, ईराक आदि देशों के तेल उत्पादक केन्द्रों के निकट नगरों का विकास हुआ है। अरब, थार, तुर्किस्तान, गोबी आदि के मरुस्थल में स्थित मरुद्यानों में भी थोड़ी जनसंख्या मिलती है जिसका निवास अस्थायी होता है। दक्षिण एशिया में हिमाचल के उच्च पर्वतीय क्षेत्र तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के अनेक दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र लगभग जनविहीन हैं। रूस में उत्तरी साइबेरिया भी लगभग जन विहीन हैं जबकि इसके दक्षिणी भाग में ट्रांस साइबेरियन रेल मार्ग के समीप कुछ नगर विकसित हुए हैं जहाँ थोड़ी संख्या में जनसंख्या निवास करती है है किन्तु औसत जनसंख्या घनत्व 3 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी से भी कम है।


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