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शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

एशिया के क्षेत्रीय विस्तार

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एशिया के क्षेत्रीय विस्तार 

 एशिया के मुख्य स्थल मधुर दक्षिणतम बिन्दु मलेशिया में स्थित पिलाई या बुलुस अन्तरीय (116),उत्तरी बिन्दु चिल्युस्किन अन्तरीय (उत्तरी मध्य साइबेरिया, रूस में 743' उत्तर), पश्चिम में केप बाबा (टर्की, 254' पूर्व) तथा पूर्व में क्या देजनोवा या ईस्ट केप (उत्तरी-पूर्वी साइबेरिया, 16040 पश्चिम) है। इसके अतिरिक्त, विशाल एशिया महाद्वीप में अनेक द्वीप भी सम्मिलित हैं, जो प्रशान्त महासागर, हिंदी महासागर तथा आर्कटिक महासागर में स्थित हैं। इनमें प्रमुख द्वीप-सखालीन, क्यूराइल, जापान, रिक्यू ताईवान, हैनान, मलय द्वीप समूह. अण्डमान एवं निकोबार, श्रीलंका, साइप्रस, सेवरनाया कोरिया, दक्षिणी-पूर्वी द्वीप समूह आदि हैं। महाद्वीप के घुर दक्षिणी भाग में पलाऊ दाना (इण्डोनेशिया), पश्चिमी भाग में बाबा अन्तरीय (264' पूर्व). पूर्व में बिग डिओ मेड (रूस) तथा उत्तर में रूडोल्फी द्वीप का फिलिगिलो पाइन्ट स्थित है। एशिया के विशाल आकार का सबसे महत्वपूर्ण पहलू का अक्षांशीय तथा देशान्तरीय विस्तार है। यह 10° दक्षिण से 80° उत्तरी अक्षांशों एवं 26 पूर्व से 170 पश्चिम देशान्तरों के मध्य विस्तृत है। क्षेत्रफल की दृष्टि से एशिया महाद्वीप अफ्रीका से 1.5 गुना, दक्षिण अमेरिका से 2.5 गुना तथा आस्ट्रेलिया से 4 गुना बढ़ा है। एशिया महाद्वीप को प्राचीन सभ्यताओं सिन्ध मेसोपोटामिया,चीनी) का पालना (radle) कहा जाता है, जो विभिन्न नदी बेसिनों में विकसित हुई थी। यहाँ भौतिक तथा सांस्कृतिक विविधताएँ भी दर्शनीय हैं। एशिया की भूमि पर उच्च पर्वत श्रेणियों का क्रम - अनातोलिया के पठार (टर्की) से जापानी आल्प्स तक मिलता है, जिसके मध्य अनेक बेसिन तथा उच्च पठार स्थित है। भूगर्भिक संरचना की दृष्टि से महाद्वीप में अनेक प्राचीन कठोर भूखण्ड स्थित हैं, जिनके किनारे पर भारी मात्रा में अवसादों का निक्षेपण किया गया। इन अवसादों में वलन क्रिया होने से पर्वतों की उत्पत्ति हुई। महाद्वीप पर अनेक निम्न भूमियाँ भी नदी-घाटियों तथा सागर तट के सहारे विस्तृत हैं। इनमें गंगा सिन्यू का मैदान, हांग हो का मैदान, दजला-फरात का मैदान आदि उल्लेखनीय हैं। महाद्वीप की तट रेखा भी बहुत लम्बी (G27 मी०) है। तट रेखा के सहारे, विशेषतः पूर्व एवं दक्षिण-पूर्व में सक्रिय ज्वालामुखी किया, सागरीय लहरों द्वारा अपघर्षण तथा मूँगे के निर्माण जैसी परिघटनाओं से उत्पन्न विशिष्ट शक्तियों दृष्टिगोचर होती हैं। मध्य एशिया की उच्च पर्वतीय दुर्गम भूमि, साइबेरिया के शीतल ध्रुव (cold pole) तथा तीन ओर से घिरे विशाल महासागरों के बावजूद एशिया में विश्व के विभिन्न भागों में प्रवास होता रहा है। मध्य एशिया की शुष्क भूमि से पर्वतों को पार करके भारतीय उपमहाद्वीप मे तथा चीन से दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर अनेक ऐतिहासिक प्रवास हुए हैं। प्राचीन काल में पश्चिम एशिया से भारत की ओर आव्रजको (immigrants) की अनेक लहरें आयीं। यह महाद्वीप अनेक धर्मों हिन्दू, यहूदी, बौद्ध, ईसाई. इस्लाम, आदि की जन्म स्थली रहा है। ईसाई तथा इस्लाम धर्म के अपवाद सहित सभी धर्म एशिया में सीमित रहे। ईसाई धर्म का प्रसार पश्चिम की ओर तथा इस्लाम का प्रसार विभिन्न दिशाओं में हुआ। बौद्ध धर्म सुदूर पूर्व तथा दक्षिण-पूर्वी एशिया में व्यापक है। भारत तथा नेपाल में हिन्दू धर्म, इजराइल में यहूदी धर्म तथा इस्लाम दक्षिण-पश्चिम तथा मध्य एशियाई देशों में व्यापक रूप से मिलता है।

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