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रविवार, 12 जुलाई 2020

मैकियावेली पुनर्जागरण का शिशु था धर्म एवं नैतिकता पर उसके विचार

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मैकियावेली पुनर्जागरण का शिशु था धर्म एवं नैतिकता पर उसके विचार

मैकियावेली के राजनीतिक दार्शनिक की अपेक्षा एक व्यावहारिक राजनीतिज्ञ था। इसलिए उसके राजनीतिक विचार राजनीतिक सिद्धान्तों का प्रतिपादन नहीं करते वरन् उसे कूटनीतिक साहित्य की श्रेणी में रखा जाता है। जिस प्रकार उसके युग को अनेक लेखकों ने पर्याप्त मात्रा में लिखा था। मैकियावेली का उद्देश्य ऐसे शासन की कला का विवेचन करना था जिसका अनुगमन करके इटली को एक एकीकृत एवं सुदृढ़ राज्य बना सके और साथ ही अपने राज्य का विस्तार करने में सफल हो सके। इसी दृष्टि से उसके विचार राज्य के संरक्षण के सिद्धान्त हैं वह एक राजनीतिक विचारवादी नहीं था, वरन् उसका लक्ष्य उन तथ्यों को विवेचन करना था जो राजनीति की कला को सफलीभूत बनाने के लिए आवश्यक हैं।

अत: वह राज्य तथा शासन की समस्याओं का सैद्धान्तिक विवेचन नहीं करता, वरन् अपने काल की परिस्थितियों का अध्ययन करके उन व्यवहारिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है जो राज्य की सुदृढ़ता तथा रक्षा के लिए वांछनीय है। इन विचारधाराओं के विवेचन में भी क्रमबद्धता का अभाव दृष्टिगोचर होता है। मैकियावेली को आधुनिक युग का जनक कहा जाता है। वह मध्य युग तथा आधुनिक युग का सम्बन्ध विच्छेद करने वाला प्रथम राजनीतिक विचारक है। "द प्रिंस" और "डिस्कोर्सेज" नामक अपने प्रसिद्ध ग्रन्थों में मैकियावेली के यथार्थवादी राजनीतिक दर्शन दृष्टिगोचर होते हैं। इस सम्बन्ध में डनिंग ने कहा है, "यह कहना कि बह आधुनिक युग का आरम्भ करता है, उसी प्रकार सही है जैसे यह कहना कि वह मध्ययुग को समाप्त करता है।"मैकियावेली के धर्म एवं नैतिकता सम्बन्धी विचार, राष्ट्र राज्य का समर्थन, सम्प्रभुता अथवा प्रभुसत्ता की धारणा का प्रतिपादन आदि ऐसे कई तत्त्व हैं जिनसे यह स्पष्ट है कि मैकियावेली मध्ययुगीन विचारों का विरोधी है। जोन्स के शब्दों में, "मैकियावेली के राजनीतिक सिद्धान्त वाला है, वह किसी भी अन्य व्यक्ति की अपेक्षा आधुनिक युग का जनक है।"

प्रत्येक विचारक अपने युग की परिस्थितियों से प्रभावित होता है मैकियावेली भी इससे अछूता नहीं था। इसी के आधार पर विद्वानों ने उसे अपने युग का शिशु अथवा पुनर्जागरण के शिशु के नाम से भी सम्बोधित किया है। मैकियावेली की राजनीति चिन्तन को आप्रलिखित शीर्षकों के आधार पर समझा जा सकता है-

(1) राष्ट्रीय राज्य का प्रतिपादक-मैकियावेली प्रथम विचारक है जिसने राष्ट्रीय राज्य के लक्षणों की विवेचना की। उसका श्रेष्ठ ग्रंथ "प्रिंस" इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। मध्ययुग सामन्तवादी युग था। इटली पाँच छोटे-छोटे राज्यों में बँटा हुआ था वह इटली के एकीकरण का प्रतिपादक है उसने राष्ट्रीय राज्य की अवधारणा का समर्थन किया।

(2) राज्य की प्रभुसत्ता का पोषक-मैकियावेली ने राज्य की सर्वोपरि संस्था माना है जिसके अधीन सभी व्यक्ति और संस्थाएं होती हैं। मैकियावेली ने "सम्प्रभुता शब्द का प्रयोग नहीं किया फिर भी व्यवहार में राज्य को सम्प्रभुता स्थापित करके तथा राजा को सम्पूर्ण शक्तियाँ सौंपकर सम्प्रभुता की अवधारणा प्रतिपादित कर दी थी। मैकियावेली के इन्हीं विचारों को बोंदा ने सैद्धान्तिक रूप प्रदान किया।

(3) शक्तिवादी राजनीति के प्रणेता-आधुनिक युग की एक विशेषता शक्तिवादी राजनीति है और मैकियावेली इस शक्तिवादी राजनीति को प्रारम्भ किया है। उसने केन्द्रीय सत्ता की स्थापना को महत्त्व दिया तथा शक्ति की सर्वोच्चता की पूजा की है। मैक्सी के अनुसार इस सम्बन्ध में यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाने वाला वह प्रथम विचारक था।

(4) संघ राज्य के प्रथम विचारक-मैकियावेली इटली के लिये एक संघ राज्य के निर्माण पर विचार प्रकट किये। उनका कहना था कि एक बार प्रिंस इकाई राज्यों का एक संघ राज्य बनाया जाये तथा जिस संघ में शासन की शक्ति कुछ सीमा तक इकाइयों में विभाजित होगी। वर्तमान समय में बड़े राज्यों के लिये संघीय व्यवस्था अधिक व्यवहारिक दिखाई देती है। जैसे अमेरिका तथा सोवियत रूप में संघात्मक शासन व्यवस्था लागू है।

(5) कानून सम्बन्धी दृष्टिकोण-मध्ययुग में दैवी सिद्धान्त का जोर था। यह माना जाता था कि ईश्वर द्वारा बनाये गये कानून ही सर्वश्रेष्ठ और सर्वोपरि है जिनकी व्याख्या चर्च करता है। मैकियावेली ने इस सिद्धान्त का खण्डन किया। डॉ० ओम नागपाल के शब्दों में, "मैकियावेली वह पहला विचारक है जिसने कानून को आकाश से उतार कर पृथ्वी पर स्थापित किया।"

(6) यथार्थवादी-गेटल के अनुसार मैकियावेली पहला यथार्थवादी है। उसका ग्रन्थ 'प्रिंस' पूर्णत: यथार्थ की भूमिका पर स्थित है। उसने वास्तविक घटनाओं का सहारा लिया है।

(7) राज्य की सर्वोच्चता-अरस्तू के बाद मैकियावेली पहला राजनीतिक विचारक है जिसने राज्य को सर्वोपरि सत्ता के रूप में स्वीकार किया है। उसने राज्य को सर्वोच्च स्थान प्रदान किया। शासक के लिये मानव जीवन की सुरक्षा तथा धन की रक्षा पर उसने जोर दिया।

(8) व्यक्तिवाद समर्थक-मैकियावेली ने शासक को यह परामर्श दिया कि वह प्रजा के धन का किसी भी दशा में अपहरण नहीं किया जाना चाहिये व्यक्ति के सम्पत्ति अपहरण को ठसने गम्भीर अपराध की संज्ञा दी। व्यापार तथा वाणिज्य के विकास में आवश्यक प्रयास शासक द्वारा किया जाना चाहिये। शासक स्वयं व्यापार वाणिज्य से दूर रहे। मैक्यिावेली इस दृष्टि से व्यक्तिवाद का संदेश वाहक है।

(9)धर्म एवं नैतिकता सम्बन्धी दृष्टिकोण-मैकियावेली एक यथार्थवादी चिंतन था उसका मुख्य लक्ष्य राज्य को शक्तिशाली और सुदृढ बनाना था। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए ही वह राज्य को धर्म और नैतिकता से मुक्त करता है। अपने इस योगदान के कारण ही वह मध्यकालीन विचारकों से अलग हो जाता है। उसका कहना है कि राज्य अपने को शक्तिशाली एवंह सुदृढ़ बनाने के लिए नैतिकता का ख्याल किये बिना कोई भी साधन अपना सकता है। नैतिकता के लिए शासक को राज्य की सुरक्षा की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। उसका कहना है कि राजा को राज्य की सुरक्षा की चिन्ता करनी चाहिए। इसमें सहायक साधनों को सदैव सम्मान और प्रशंसा की दृष्टि से देखा जायेगा। उसके वचन पालन तथा अन्य नैतिक आचरणों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। उसे केवल राज्य की सुरक्षा और उसे शक्तिशाली बनाने की चिन्ता करनी चाहिए साध्य ही साचन का औचित्य प्रतिपादित करता है। अपने राजनीतिक विचारों के अन्तर्गत मैकियावेली ने राज्य और धर्म तथा राजनीति और नैतिकता के बीच सम्बन्ध पर भी प्रकाश डाला है। उसके अपने ग्रन्थ 'प्रिन्स' में स्पष्ट रूप से विचार व्यक्त किया है कि राज्य की सुरक्षा के लिए अपनाये जानेवाले सभी साधन सम्मानजनक होते हैं तथा जनता उनका समर्थन करती है। इसके लिए राज्य की सरक्षा तथा राज्य हित ही सर्वोपरि है। इसके लिए शास्क कोई भी उपाय कर सकता है, चाहे नैतिक हो अथवा नहीं। कहने का तात्पर्य यह कि मैकियावेली के लिए राजनीतिक दृष्टि से नैतिकता का कोई महत्त्व नहीं है।

मैकियावेली पर अनैतिकता के प्रोत्साहन पर आरोप लगाया जाता है पर मैकियावली ने स्वयं उत्तर देते हुये कहा है, "कोई व्यक्ति पुस्तक पढ़कर अनैतिक हो गया हो, यह मैंने कभी नहीं सुना।" जोन्स ने इस सम्बन्ध में कहा, “व्यक्तिगत रूप से मनुष्य का मनुष्य के प्रति कैसा भी व्यवहार हो पर यह बात सत्य है कि विभिन्न राज्य परस्पर उसी प्रकार का व्यवहार करते हैं। जैसा मैकियावेली ने वर्णन किया है। मैकियावेली राजनीतिक विचारों के इतिहास में एक अमर स्थान रखता है क्योंकि वह पहला राजनीतिज्ञ है जिसने मध्ययुग के विचारों का खण्डन तथा आधुनिक विचारधारा का श्रीगणेश किया है अतएवं उसे आधुनिक युग का जनक सम्बोधित किया जाता है।

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