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रविवार, 5 जुलाई 2020

ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक आधार

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ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक आधार 

ऑस्ट्रेलिया की गणना विश्व के विकसित देशों में की जाती है। यहाँ के लोगों की प्रति व्यक्ति आय यूरोपीय देशों के समान है। इसकी अर्थव्यवस्था में कृषि, पशुपालन, खनन, निर्माण उद्योग तथा सेवाओं सभी का महत्वपूर्ण योगदान है। ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में कृषि, विनिर्माण उद्योग तथा सेवाओं का योगदान क्रमशः 3,25 और 72 प्रतिशत है। आधारभूत खनिजों के अभाव में ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुपालन पर आधारित उद्योगों का महत्व अधिक है। इसके विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों का विवरण निम्नलिखित है कृषि (Agriculture) फसल उत्पादन (Crop Production)- आस्ट्रेलिया का मात्र 15 प्रतिशत भूभाग ही कृषि योग्य है किन्तु अनुपयुक्त दशाओं के कारण देश की केवल 6 प्रतिशत भूमि पर ही कृषि की जाती हैं। जनसंख्या कम होने के कारण ऑस्ट्रेलिया में प्रति व्यक्ति भूमि की उपलब्धता विश्व में सर्वोपरि है। आस्ट्रेलिया में उत्पन्न की जाने वाली फसलों में गेहूँ, जौ, चावल, मक्का, गन्ना, कपास, फल, सब्जियां आदि प्रमुख हैं।

                                                                (1) गेहूँ (Wheat)- 

ऑस्ट्रेलिया विश्व के प्रमुख गेहूँ उत्पादक देशों में से एक हैं। विश्व के लगभग 4 प्रतिशत गेहूँ ऑस्ट्रेलिया में होता है। इसका उत्पादन संयुक्त राज्य के समान है। इसका वार्षिक उत्पादन 230 लाख मीटरी टन से अधिक है। यहाँ गेहूँ उत्पादन के दो प्रमुख क्षेत्र हैं - (i) दक्षिण-पूर्व में मरे-डार्लिंग बेसिन, और (ii) दक्षिण-पश्चिम में भूमध्यसागरीय जलवायु वाला तटीय प्रदेश। म डार्लिंग बेसिन विश्व प्रसिद्ध गेहूँ उत्पादक क्षेत्र है जहाँ शीतोष्ण घासों की साफ करके बड़े-बड़े कृषि फामा पर आधुनिक यंत्रों की सहायता से कृषि की जाती है। ऑस्ट्रेलिया गेहूँ का अग्रणी निर्यातक देश हैं और इसकी अर्थव्यवस्था में गेहूँ निर्यात का महत्वपूर्ण स्थान है। ऑस्ट्रेलिया में प्रमुख फसलों का वार्षिक उत्पादन (2010)
 जौ (Barley)-

आस्ट्रेलिया विश्व में जौ का छठा बृहत्तम उत्पादक देश है. यह विश्व के लगभग 5 प्रतिशत जौ का उत्पादन करता है। इसका वार्षिक उत्पादन लगभग 75 लाख मीटरी टन है। अधिकांश जौ का उत्पादन पश्चिमी आस्ट्रेलिया के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में तथा मरे-डार्लिग बेसिन के उत्तरी भाग में होता है। यह जौ का प्रमुख निर्यातक देश है। 

चावल (Rice)-

चावल मुख्यतः आर्द्र मानसूनी प्रदेशों की उपज है। ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में क्वीन्सलैण्ड के पूर्वी तटीय भाग में चावल की कृषि की जाती है। उष्ण एवं आर्द्र जलवायु, उपजाऊ मिट्टी, उर्वरकों एवं उत्तम बीजों के प्रयोग तथा वैज्ञानिक विधि के उपयोग से यहाँ प्रति हेक्टेयर उत्पादन विश्व में सर्वाधिक (95 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) है। 

मक्का (Corn)-

आस्ट्रेलिया में मक्का का उत्पादन मुख्यतः क्वींसलैण्ड तथा न्यू साउथ वेल्स के आर्द्र भागों में होता है। विश्व स्तर पर इसके मक्का उत्पादन का महत्व बहुत कम है किन्तु मांस वाले पशुओं को खिलाने के लिए इसका महत्वपूर्ण स्थान है। इसका वार्षिक उत्पादन 2 से 3 लाख मीटरी टन है। देश में उपयोग न होने के कारण आस्ट्रेलिया मक्का का निर्यात भी करता है। 

कपास (Cotton)- 

ऑस्ट्रेलिया विश्व के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में से एक है। यह विश्व में उत्पादित लगभग 2.5 प्रतिशत कपास का उत्पादन करता है। इसका वार्षिक उत्पादन लगभग 750 हजार मीटरी टन है। क्वींसलैंड का दक्षिणी भाग कपास का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। पश्चिमी आस्ट्रेलिया के दक्षिणी भाग तथा न्यू साउथ वेल्स में भी कपास की कृषि की जाती है। गन्ना (Sugarcane)- ऑस्ट्रेलिया में विश्व के लगभग 2.5 प्रतिशत गन्ना का उत्पादन होता है। इसका वार्षिक उत्पादन लगभग 300 लाख मीटरी टन है। गन्ना का उत्पादन क्वींसलैण्ड के पूर्वी तटीय मैदान में होता है जहाँ उपजाऊ काली मिट्टी तथा आर्द्र मानसूनी जलवायु गन्ने के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। यहाँ गन्ना की प्रति हेक्टेयर उपज (75 मीटरी टन प्रति हेक्टेयर) भारत (70), ब्राजील (67), क्यूबा (31) आदि प्रमुख गन्ना उत्पादक देशों से अधिक है। 

फल (Fruits)-

आस्ट्रेलिया में कई प्रकार के फलों का उत्पादन किया जाता है जिनमें सेब, सन्तरा, अंगूर, नाशपाती,खूबानी, आडू आदि अधिक महत्वपूर्ण हैं।

(¡) सेब (Apple) की कृषि न्यू साउथ वेल्स तथा विक्टोरिया के पर्वतीय ढालों पर की जाती है। तस्मानिया में भी सेब के बगीचे लगाये गये हैं। (1) आस्ट्रेलिया के दक्षिणी-पश्चिमी भाग (पर्थ क्षेत्र) तथा दक्षिणी-पूर्वी भाग (सिडनी क्षेत्र) में सिंचाई द्वारा संतरे का उत्पादन किया गया है। यह भूमध्यसागरीय जलवायु की प्रमुख उपज है। (i) अंगूर की खेती पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी-पश्चिमी भाग और न्यूसाउथ वेल्स के दक्षिणी भाग तथा विक्टोरिया प्रान्त में की जाती है। अंगूर का प्रयोग मुख्यतः शराब बनाने तथा सूखा मेवा (किशमिश) बनाने के लिए किया जाता है। पशु पालन (Animal Husbandry)- ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश भाग की जलवायु शुष्क तथा अर्द्धशुष्क होने तथा मिट्टी के कम उपजाऊ होने के कारण यहां फसल उत्पादन की अपेक्षा पशुचारण या पशुपालन के लिये दशाएं अधिक उपयुक्त हैं। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया के कुल फसल उत्पादन की तुलना में पशु उत्पाद लगभग तीन गुना अधिक है। ऑस्ट्रेलिया में पशुपालन मुख्तयः मांस, ऊन और दूध के लिए किया जाता है। आस्ट्रेलिया में पशुपालन के तीन विशिष्ट प्रदेश हैं जिनका विवरण निम्नलिखित है पशुचारण प्रदेश (Herding Region)- ऑस्ट्रेलिया के विस्तृत रेतीले मरुस्थल के सभी ओर अर्धशुष्क प्रदेशों में पशुचारण प्रमुख व्यवसाय है। जनाभाव तथा विषम जलवायु दशाओं एवं अनुपजाऊ मिट्टी के कारण यहाँ कृषि करना संभव नहीं है अतः पशुचारण ही भूमि का सर्वोत्तम उपयोग है। इन प्रदेशों में मुख्तयः बकरियाँ, भेड़ें, खच्चर, घोड़े पाले जाते हैं। चारागाह की कमी के कारण एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं ठहरा जा सकता है। अतः पशुचारक अपने पशुओं के झुंड के साथ एक चारागाह से अन्य चारागाह के लिए प्रायः भ्रमणशील रहते हैं । पशुओं से मुख्यतः ऊन और मांस प्राप्त होता है। पशुचारण व्यवसाय उत्तरी ऑस्ट्रेलिया, पश्चिमी क्वींसलैंड, दक्षिणी आस्ट्रेलिया और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के विस्तृत भू-भाग में प्रचलित है। खच्चर समान ढोने और घोड़े सवारी के काम आते हैं तथा भेंड़ और बकरियों से ऊन और मांस प्राप्त होता है।

 व्यापारिक पशुपालन प्रदेश (Commercial Livestock Ranching Region) -व्यापारिक पशुपालन अधिकतर उन प्रदेशों में विकसित है जहाँ यूरोपीय लोग बसे हए हैं और जलवायु अर्द्धशुष्क होने के कारण फसल उत्पादन की अपेक्षा पशुपालन के लिए अधिक उपयुक्त है तथा साथ ही देश में मांस आदि पशु उत्पादों की मांग अधिक है। व्यापारिक पशुपालन का उद्देश्य पशु उत्पादों को बेंचकर अधिकाधिक लाभ प्राप्त करना है। यहाँ अन उत्पाद की अपेक्षा पशुपालन पर अधिक बल दिया जाता है। इसके अन्तर्गत गाय-बैल, सुअर, भेंड़ और बकरियों की प्रमुखता पायी जाती है। पशुपालन से मांस,ऊन, चमड़ा, दूध आदि उत्पाद प्राप्त किये जाते हैं। व्यापारिक पशुपालन में मानव श्रम की आवश्यकता कम होती है क्योंकि एक चरवाहा रखवाली करने वाले कुत्ते की सहायता से 100 से अधिक पशुओं को अकेले चरा सकता है और उनकी देखभाल कर सकता है। इसके लिए बड़े- बड़े कृषि फार्म या बाड़े होते हैं जहाँ चारागाह उगाये जाते हैं। ये बाड़े प्रायः तारों द्वारा घिरे अथवा सीमांकित होते हैं। ऑस्ट्रेलिया में व्यापारिक पशुपालन क्वींसलैंड के घास के मैदानों में प्रचलित हैं जहाँ भेड़ों के साथ गाय-बैल भी पाले जाते हैं। यहाँ के चरागाह अधिक विस्तृत हैं और तारों से घिरे होते हैं। वर्षा कम (30 सेमी से कम) होने के कारण जल की समस्या रहती है। इसीलिए प्रति चारागाह पशुओं की संख्या प्रायः निश्चित होती है। पहाड़ी ढालो पर बांध बनाकर जलसंग्रह द्वारा तथा उत्सुत कूपों के द्वारा
घासों की सिंचाई की जाती है। यहाँ उत्तम नस्ल के पशु पाले जाते हैं। 

 दुग्ध पशुपालन प्रदेश (Dairy Farming Region) डेयरी पशुपालन का उद्देश्य दुग्ध तथा दुग्ध निर्मित वस्तुओं के व्यापार के लिए प्राप्त करना होता है। डेयरी पशुपालन में मुख्यतः उत्तम नस्ल की गाय पाली जाती हैं। इस व्यवसाय का विकास प्रायः ठण्डे एवं आर्द्र प्रदेशों में हुआ है जहां पशुओं के लिए पौष्टिक तथा मुलायम घास उगता है। न्यू साउथ वेल्स, क्वीन्सलैण्ड तथा विक्टोरिया प्रान्तों के घास प्रदेशों में दुग्ध पशुपालन किया जाता इस कार्य की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं (1) डेयरी कृषि प्रदेश में गायों का महत्व सर्वाधिक है। गायें होल्सटाइन, जर्सी आदि उत्तम नस्ल की होती है और अधिक दूध देती हैं। इनके अतिरिक्ति अन्य नस्ल की गायें, मुर्गियां, सुअर आदि भी पाले जाते हैं। (2) फसल में चारे वाली फसलें अधिक उगायी जाती है जिन्हें दुधारू गायों को खिलाया जाता है। पशुओं को खिलाने के लिए मक्का, जई,बरसीम आदि फसलें भी उगायी जाती हैं। (3) पशुओं के रहने के लिए गृह बनाये जाते हैं और उनकी वैज्ञानिक ढंग से देखरेख की जाती है। (4) नगरों के समीप स्थित डेयरी फार्मों से नगरों को ताजे दूध की आपूर्ति होती है, किन्तु दूरवर्ती क्षेत्रों तथा विदेशों में भेजने के लिए मक्खन, पनीर, घी आदि उत्पाद तैयार किये जाते हैं जिसके लिए डेयरी फार्म पर ही लघु कारखाने होते हैं। (5) दुग्ध पदार्थों को संरक्षित रखने तथा दूरवर्ती नगरों तक भेजने के लिए प्रशीतक युक्त कन्टेनर वाले तीव्रगामी वाहनों का उपयोग किया जाता है।

 खनिज एवं शक्ति संसाधन (Minerals and Power Resources) आस्ट्रेलिया में विविध प्रकार के औद्योगिक तथा बहुमूल्य खनिज पाये जाते हैं जिनमें लोहा, मैंगनीज, बाक्साइट,जस्ता,निकिल, ताँबा, टिन, सोना आदि प्रमुख हैं। खनिज संसाधनों में कोयला, पेट्रोलियम,प्राकृतिक गैस, यूरेनियम.जल विद्युत आदि उल्लेखनीय मात्रा में पाये जाते हैं। आस्ट्रेलिया में पाये जाने वाले प्रमुख खनिज पदार्थों तथा शक्ति संसाधनों का विवरण निम्नलिखित हैं लौह अयस्क (Iron Ore)- ब्राजील और चीन के पश्चात आस्ट्रेलिया विश्व का तृतीय बृहत्तम लौह अक उत्पादक देश है। यहाँ विश्व के लगभग 16 प्रतिशत लौह अयस्क का उत्पादन होता है। इसका वार्षिक उत्पादक लगभग 100 लाख मीटरी टन है। ऑस्ट्रेलिया में लौह अयस्क का बृहत्तम भण्डार पश्चिमी आस्ट्रेलिया प्रान्त के माउन्ट बुश तथा माउण्ट टामप्राइस क्षेत्र में है। हैमर्शले,पिलबार, माउण्ट टाणप्राइस, माउण्ट न्यमान,माउंट हेलबैक पानावोनिका तथा माउण्ट गोल्डसवर्दी यहाँ की प्रमुख खदाने हैं। इस क्षेत्र के अधिकांश लौह अयस्क का पोर्ट हेडलैण्ड एवं डैम्पियर आदि पत्तनों द्वारा निर्यात किया जाता है। पर्थ के उत्तर में तथा उत्तर-पूर्व में कानूडा तथा कुलियरबिंग नामक खदाने हैं जिनके लौह अयस्क का उपयोग मुख्यतः समीपवर्ती लौह-इस्पात के कारखानों में होता है। इसके अतिरिक्त सिडनी के समीप आयरन नाब, ब्रिसबेन के समीप मेट्रो, आंतरिक भाग में माउंट ईसा के निकट मेरी कैथलीन और पश्चिमी तट पर किम्बरले पठार में याम्पी साउण्ड लौह अयस्क के महत्वपूर्ण निक्षेप हैं। देश के लौह-इस्पात कारखानों में उपयोग के पश्चात ऑस्ट्रेलिया पर्याप्त मात्रा में लौह-अयस्क का निर्यात भी करता है। 

मैंगनीज (Manganese) ऑस्ट्रेलिया विश्व के लगभग 8 प्रतिशत मैंगनीज का उत्पादन करता है। इसका वार्षिक उत्पादन 850 लाख मीटरी टन है। सामान्यतः मैंगनीज के बिखरे निक्षेप लौह निक्षेपों के समीप ही पाये जाते हैं। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में निमिर्गारा, माउंट सिडनी, हवाला, सिडनी के समीप न्यू साउथ
 वेल्स में ब्लूरेज में मैंगनीज के महत्वपूर्ण निक्षेप तथा खदानें स्थित हैं। अधिकांश मैंगनीज अयस्क का निर्यात संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान तथा यूरोपीय देशों को किया जाता है। 

बॉक्साइट (Bauxite) ऑस्ट्रेलिया विश्व का बृहत्तम बॉक्साइट उत्पादक देश है। विश्व में कुल बाक्साइट के उत्पादन का लगभग 36 प्रतिशत ऑस्ट्रेलिया से प्राप्त होता है। विश्व में बाक्साइट कै कुल संचित भण्डार का लगभग 40 प्रतिशत आस्ट्रेलिया में हैं। आस्ट्रेलिया के लगभग तीन-चौथाई बाक्साइट के संचित भण्डार क्वींसलैंड के केप यार्क प्रायद्वीप के बाइपा क्षेत्र में हैं। दूसरा विशाल भण्डार अनहेमलैण्ड के उत्तरी-पूर्वी छोर पर गांव क्षेत्र में स्थित है। ये दोनों क्षेत्र कार्पेन्टरिया खाड़ी के क्रमशः पूर्वी और पश्चिम में स्थित हैं। इन दोनों क्षेत्रों में उच्च कोटि के बाक्साइट का जमाव है जिनमें 50 प्रतिशत से अधिक धातु सम्पन्नता पायी जाती है। न्यू साउथ वेल्स के उत्तरी-पूर्वी भाग तथा पश्चिमी आस्ट्रेलिया के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में भी बॉक्साइट के निक्षेप हैं जो निम्नकोटि के हैं।


ताँबा (Copper) -ताँबा उत्पादक देशों में ऑस्ट्रेलिया का छठाँ स्थान है। विश्व का लगभग 6 प्रतिशत ताँबा आस्ट्रेलिया से प्राप्त होता है। आस्ट्रेलिया के संचित भण्डार मध्यम श्रेणी के हैं जिनमें ताँबे की सम्पन्नता 2 प्रतिशत से कम पायी जाती हैं। एक बार, माउण्ट, लायल, माउण्ट ईसा, माउण्ट आर्गन और टेनाण्ट यहाँ के प्रमुख तांबा उत्पादक क्षेत्र है। 

जस्ता (Zinc)-ऑस्ट्रेलिया चीन के पश्चात विश्व का द्वितीय बृहत्तम जस्ता उत्पादक देश है जो विश्व के का 15 प्रतिशत जस्ता क्षेत्रों में किया जाता है का उत्पादन करता है। ऑस्ट्रेलिया में जस्ता का उत्पादन निम्नलिखित 4 क्षेत्रों में किया जाता है-
 (I) पश्चिमी न्यू साउथ वेल्स में ब्रोकन हिल क्षेत्र जहाँ जस्ता और चाँदी के विशाल निक्षेप हा (ii) रीड रोजबरी क्षेत्र जहाँ जस्ता, ताँबा और सीसा के निक्षेप हैं। (iii) क्वीन्सलैण्ड के पश्चिमी भाग में क्लोनकरी क्षेत्र, और (iv) न्यू साउथ वेल्स के पश्चिमी भाग में क्लोनकरी क्षेत्र, और (6) सीसा (Lead)-

ऑस्ट्रेलिया विश्व का वृहत्तम सीसा उत्पादक देश है जो विश्व के 20 प्रतिशत से अधिक सीसा का उत्पादन करता है।क्वीन्सलैण्ड के पश्चिमी भाग में स्थित माउण्ट ईसा क्षेत्र तथा न्यूसाउथ कब्राकन हिल क्षेत्र प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं जहाँ 17 प्रतिशत तक सीसा सम्पन्न अयस्क के विशाल भण्डार हैं। ऑस्ट्रेलिया सीसा का प्रमुख निर्यातक देश है। 

(7) टिन (Tin)- विश्व का लगभग 4 प्रतिशत टिन आस्ट्रेलिया से प्राप्त होता है। हरबर्टसन, स्मिथक्रीक बैटल-नैटल क्रीक, तिनगहा, रेनिशन वेल तथा तस्मानिया में रोजेन्डन आदि प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।

 (8) सोना (Gold)- आस्ट्रेलिया दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चात विश्व में सोना का तृतीय बृहत्तम उत्पादक देश हैं। विश्व का लगभग 12 प्रतिशत सोना आस्ट्रेलिया से प्राप्त होता है। ऑस्ट्रेलिया की दो प्रमुख स्वर्ण खदानें कालगुर्ली और कूलगार्डी पश्चिमी आस्ट्रेलिया के आंतरिक मरूस्थलीय भाग में स्थित हैं। घोर मरुस्थल में स्थित नगरों के लिए 1000 किमी0 से भी अधिक दूर से पाइप लाइन द्वारा जल पहुँचाया जाता है। इनके अतिरिक्त क्वीन्सलैण्ड में माउण्ट मार्गन, विक्टोरिया प्रांत में बेन्डिगो तथा बेलारेट आदि अन्य महत्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्र हैं। 

(9) चाँदी (Silver)- चांदी के उत्पादन की दृष्टि में ऑस्ट्रेलिया का चौथा स्थान है जहाँ से विश्व की लगभग 10 प्रतिशत चाँदी प्राप्त होती है। ब्रोकन हिल, माउण्ट ईसा तथालेक जार्ज यहाँ के प्रमुख चाँदी उत्पादक क्षेत्र हैं। 

(10) कोयला (Coal) -आस्ट्रेलिया में लगभग 900 अरब मीटरी टन कोयला के संचित भण्डार होने का अनुमान है जो विश्व के कुल संचित भण्डार का 6 प्रतिशत है। उत्पादन की दृष्टि से आस्ट्रेलिया का पाँचवाँ स्थान है जो विश्व का 5 से 6 प्रतिशत कोयले का उत्पादन करता है। यद्यपि आस्ट्रेलिया के प्रत्येक प्रान्त में थोड़ी-बहुत मात्रा में कोयला मिलता है किन्तु मुख्य भण्डार और उत्पादक क्षेत्र न्यू साउथ वेल्स, क्वीन्सलैण्ड और विक्टोरिया प्रान्तों में स्थित है। न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैण्ड में उत्तम श्रेणी का बिटुमिनस कोयला मिलता है। यहाँ की खदान उत्तर में न्यूकैसिल (New Castle) के समीप, पश्चिम में लिथगो (Lithgo) के समीप और दक्षिण में पोर्ट कैम्बला (Port Kembla) के समीप स्थित हैं। विक्टोरिया में लिग्नाइट के विशाल भण्डार हैं जो लैटरोब (Latrobe) घाटी में स्थित हैं । 

(11)पेट्रोलियम (Petroleum)- आस्ट्रेलिया में पेट्रोलियम का संचित भण्डार सीमित है और सीमित क्षेत्र में ही पाया जाता है। विश्व में पेट्रोलियम के उत्पादक में इसका योगदान मात्र 0.5 प्रतिशत है। तेल के कूप दक्षिण-पूर्वी क्वींसलैंड में ब्रिसबेन पानी में तथा तस्मानिया द्वीप में पाये जाते हैं।

 (12) प्राकृतिक गैस (Natural Gas)- प्राकृतिक गैस के भण्डार पेट्रोलियम के साथ और अलग से भी पाये जाते हैं। आस्ट्रेलिया विश्व के लगभग 1.5 प्रतिशत प्राकृतिक गैस का उत्पादन करता है। आस्ट्रेलिया के आंतरिक क्षेत्र में गिडगे अल्प क्षेत्र में केवल प्राकृतिक गैस के और मेलबोर्न के समीप समुद्री क्षेत्र में गिप्तलैण्ड क्षेत्र में
 पेट्रेलियम के साथ गैस के भण्डार हैं। 

(13) यूरेनियम (Uranium)- विश्व में यूरेनियम का बृहत्तम भण्डार ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है जो विश्व के कुल यूरेनियम भण्डार का लगभग 30 प्रतिशत है। उत्पादन की दृष्टि से कनाडा के पश्चात इसका दूसरा स्थान है। ऑस्ट्रेलिया विश्व के लगभग 14 प्रतिशत यूरेनियम का उत्पादन करता है। इसका वार्षिक उत्पादन लगभग 5 हजार मीटरी टन है जबकि कनाडा 10 हजार मीटरी टन से अधिक यूरेनियम का उत्पादन करता है। परमाणु ऊर्जा का पक्षधर होने के कारण यहाँ यूरेनियम के उत्पादन पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया है। दक्षिणी अफ्रीका में रेडियम हिल तथा रम जंगल खदान प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। 

(14) जल विद्युत (Hydro-electricity) -अधिकांश शुष्क तथा सततवाही नदियों के अभाव के कारण ऑस्ट्रेलिया में जल विद्युत की संभाव्य क्षमता अत्यल्प अर्थात विश्व के 3 प्रतिशत से भी कम है। इसकी कुल संभाव्य क्षमता के लगभग 70 प्रतिशत का विकास हो चुका है। इसकी संभाव्य जलशक्ति मुख्यतः दक्षिणी-पूर्वी भाग में ग्रेड डिवाइडिंग श्रेणी के पश्चिमी तथा पूर्वी ढलानों तथा तस्मानिया की पहाड़ियों में विद्यमान है। अधिकांश उत्पादन मरे की सहायक नदी मुरमबिदजी तथा मरे नदी पर स्थापित जल विद्युत परियोजनाओं से प्राप्त होता है। आस्ट्रेलिया में जलविद्युत का वार्षिक उत्पादन लगभग 16 अरब किलोवाट घण्टा है जो विश्व उत्पादन का लगभग 0.6 प्रतिशत है। 

विनिर्माण उद्योग (Manufacturing Industry)-


 ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण उद्योग का महत्वपूर्ण स्थान है। इसके सकल घरेलू आय में औद्योगिक क्षेत्र का योगदान 25 प्रतिशत है। आस्ट्रेलिया के विनिर्माण उद्योगों में अल्युमिनियम, ताँबा, धातु, लोहा इस्पात, सूती वस्त्र पेट्रोलियम शोधन,भारी इंजीनियरिंग, कागज एवं लुगदी, मोटरगाड़ी, कृषि यंत्र, विद्युत उपकरण, विविध रासायनिक उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक उद्योग आदि उल्लेखनीय हैं। 

लोहा एवं इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry)- 


ऑस्ट्रेलिया एक महत्वपूर्ण इस्पात उत्पादक देश है यद्यपि विश्व उत्पादन में इसका योगदान 1 प्रतिशत से अधिक नहीं है। इस्पात के कारखाने ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी-पूर्वी भाग में एडीलेड से ब्रिसबेन के मध्य और दक्षिण-पश्चिम में पर्थ के समीप स्थित हैं। इस्पात के प्रमुख कारखाने न्यूसाउथ वेल्स में न्यूकैसिल तथा पोर्ट केम्बला, दक्षिणी आस्ट्रेलिया में हायला तथा पश्चिमी आस्ट्रेलिया में पर्थ के समीप स्थित क्विनाना एवं पोर्ट वारादाह में स्थापित हैं। न्यू साउथ वेल्स (न्यूकैसिल एवं पोर्ट केम्बला) के कारखाने कोयला क्षेत्र तथा बाजार के निकट स्थित हैं। हायला, पोर्ट वर्धा तथा क्विनाना के कारखाने कोयला क्षेत्र तथा बाजार से दूर किन्तु लौह अयस्क के स्रोत पर स्थित हैं। कच्चे मालों की समीपता से इस्पात के उत्पादन में अपेक्षाकृत कम लागत के परिणामस्वरूप ऑस्ट्रेलिया में सस्ती इस्पात तैयार होती है। 

एल्युमिनियम उद्योग (Aluminium Industry)-


 एल्यूमिनियम के उत्पादन में ऑस्ट्रेलिया का विश्व में पाँचवा स्थान है। इसका वार्षिक उत्पादन 15 से 20 लाख मीटरी टन के मध्य रहता है। इस उद्योग का प्रमुख कच्चा माल बाक्साइट है। एल्युमिनियम के कारखाने राक हैम्पर (क्वींसलैंड), न्यू कैसिल (न्यू साउथ वेल्स), पर्थ (पश्चिम ऑस्ट्रेलिया), पोर्ट लिलिप (विक्टोरिया), गोव (उत्तरी आस्ट्रेलिया), तथा लॉन्सेस्टन (तस्मानिया) में स्थापित हैं। कार्पेन्टरिया खाड़ी के उत्तरी-पश्चिम तट पर स्थित गोव और पश्चिमी आस्ट्रेलिया के दक्षिणी तट पर स्थित पर्थ का कारखाना स्थानीय कच्चेमाल (बाक्साइट) के स्रोत पर आधारित है
जबकि दक्षिण पूर्वी क्षेत्र के कारखानों को प्रचुर मात्रा में विद्युत की तथा बन्दरमाह की सुविधथाप्राड वस्त्र उद्योग

वस्त्र उद्योग(Textile Industry)- 


ऑस्ट्रेलिया का सबसे पुराना तथा विकासोन्मुख उद्योग है। पिछले तीन-चार दशको में सर्वाधिक प्रगति कृत्रिम धागों पर आधारित (सिंथेटिक) वस्त्र उद्योग में हुई है। सूती वस्त्क लिए कपास तथा ऊनी वस्त्र लिए ऊन स्थानीय रूप से उपलब्ध हो जाता है किन्तु अच्छी किसम की कपास मिसर आदि देश से आयात की जाती है। वस्त्र उद्योग के कारखाने पर्थ, सिडनी, मेलबोर्न, एडीलेंड न्यूकैसिल, ब्रिसबेन, इप्सविच आदि प्रमुख नगरों में स्थित है। 

भारी इंजीनियरिंग उद्योग (Heavy Engineering Industry)- 


भारी इंजीनियरिंग के अन्तनर्गत मोटरगाडी, मशीनरी, रेल इंजन आदि सम्मिलित हैं इन उद्योगों का विकास न्यू साउथ वेल्स तथा विक्टोरिया प्रांतों में हुआ है। हन्टर घाटी को आस्ट्रेलिया का रूर कहा जाता है। अधिकांश उद्योग निचली घाटी में तथा न्यूकैसिल के समीप स्थित हैं। न्यूकैसिल और पोर्ट केम्बला भारी उद्योगों के प्रमुख केन्द्रों हैं जहाँ धातुओं के आयात तथा निर्मित सामान के निर्यात की सुविधा है। न्यूकैसिल तथा कार्डिफ में रल के इंजन तथा रेलगाड़ी सम्बन्धी अन्य सामान्य बनाये जाते हैं। सिडनी और मेलबोर्न में जलयान बनाये जाते हैं। वायुयान निर्माण के कारखाने मेलबोर्न, पैराफील्ड, ब्रिसबेन तथा बैंकस्टाउन में हैं।

तेल शोधन उद्योग (Oil Refining Industry) -


आस्ट्रेलिया का तेल शोधन उद्योग आयातित पेट्रोलियम (खनिज तेल) पर आधारित है। आस्ट्रेलिया की तेल शोधनशालाएं (Oil refineries)कुर्नेल, क्विनाना,जीलांग,वेस्टर्न वाट, एडीलेड, मेलबोर्न लाइट, अल्ट्रा, मात्राविले, अम्पोला आदि स्थानों पर स्थापित है।

कागज एवं लुग्दी उद्योग (Paper and Pulp Industry)- 


विश्व की लगभग 1 प्रतिशत काष्ठ लुग्दी का उत्पादन ऑस्ट्रेलिया में होता है। किन्तु कागज के उत्पादन में इसका योगदान और भी कम है लुग्दी उद्योग के केन्द्र आस्ट्रेलिया के दक्षिणी पूर्वी भाग में नदियों के किनारे तथा सागर के तटवर्ती भागों में स्थित हैं जहाँ पर्याप्त जल की उपलब्धता के साथ ही निकटवर्ती वनों से लकड़ी. बांस आदि कच्चे माल की आपूर्ति होती है। चीनी उद्योग (Sugar Industry)- क्वीन्सलैण्ड में गन्ना का उत्पादन अधिक होता है। अतः इसके पूर्वी भाग में अनेक छोटे-छोटे केन्द्रों पर गन्ना से चीनी बनाने के कारखाने संचालित हैं।

 डेयरी उद्योग (Dairy Industry)-


यह स्थानीय दुग्ध आपूर्ति पर आधारित ऑस्ट्रेलिया का महत्वपूर्ण उद्योग है जिसका केन्द्रीकरण दक्षिणी-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया के दुग्ध पशुपालन प्रदेश में हुआ है। दुग्ध उत्पादन में मक्खन और पनीर का महत्व सर्वाधिक है। प्रशीतक युक्त जल पोतों द्वारा अथवा हवाई जहाज द्वारा यहाँ से मक्खन तथा पनीर का निर्यात उत्तरी अमेरिका तथा यूरोप के विकसित देशों के लिए किया जाता है। अन्य उद्योग (Other Industry)- उपर्युक्त उद्योगों के अन्तर्गत आस्ट्रेलिया में अनेक प्रकार के लघु उद्योग विकसित हैं जो मु:ख्यत देश के दक्षिणी-पूर्वी तथा दक्षिणी-पश्चिमी भागों में पाये जाते हैं। ताँबा, धातु के कारखाने माउणट हमा बोकेनहिल, पाइरी आदि में पाये जाते हैं। विविध प्रकार के रासायनिक उद्योग देश के प्रमुख बंदरगाह नगरों-पर्थ, एडेलेड, सिडनी, ब्रिसबेन आदि में स्थापित हैं। प्रमुख औद्योगिक प्रदेश-

आस्ट्रेलिया में उद्योगों का विकास सीमित क्षेत्र में ही हुआ है आस्ट्रेलिया में मुख्य रूप से
 दो औद्योगिक क्षेत्र हैं (1) दक्षिणी पूर्वी औद्योगिक प्रदेश, और (2) दक्षिणी-पश्चिमी औद्योगिक प्रदेश। (1) दक्षिणी-पूर्वी औद्योगिक प्रदेश- यह ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख औद्योगिक पेटी है जो पूर्वी तट पर उत्तर में ब्रिसबेन (क्वींसलैण्ड) से लेकर दक्षिण में एडीलेड तक विस्तृत है। इसके अन्तर्गत ब्रिसबेन, न्यूकैसिल, सिडनी, कार्डिफ, कैनबरा, मेलबर्न,शिलांग, एडीलेड आदि औद्योगिक केन्द्र सम्मिलित हैं। आस्ट्रेलिया का लगभग 30 प्रतिशत औद्योगिक उत्पादन इसी औद्योगिक पेटी से प्राप्त होता है। सिडनी और मेलबोर्न इस औद्योगिक क्षेत्र में प्रधान औद्योगिक केन्द्र हैं जहाँ जलपोत, मोटरवाहन, विद्युत मशीनें, सूती वस्त्र आदि के कारखाने हैं। हन्टर घाटी में स्थित न्यू कैसिल लोहा इस्पात का प्रमुख केन्द्र है जिसके समीप अन्य केन्द्रों पर भी लोहा इस्पात तथा इंजीनियरिंग के कारखाने हैं। अतः हन्टरघाटी को आस्ट्रेलिया का रूर (इस्पात निर्माण के लिए प्रसिद्ध जर्मनी की रूर घाटी) कहा जाता है। न्यूकैसिल तथा कार्डिफ में रेल के इंजन तथा रेलगाड़ी के अन्य सामान बनाये जाते हैं। मेलबर्न में तेल शोधन, रसायन, वस्त्र तथा धातु शोधन उद्योग भी स्थापित है। दक्षिण में स्पेन्सर खाड़ी के तट पर एडीलेड में तेल शोधन, वस्त्र निर्माण, रासायनिक उद्योग, कार निर्माण,धातु निर्माण आदि के कारखाने केन्द्रित हैं। यहाँ पोर्ट अगस्ता, पोर्ट पीरी वाहाला आदि अन्य औद्योगिक केन्द्र हैं। (2) दक्षिण-पश्चिमी औद्योगिक प्रदेश- पश्चिमी आस्ट्रेलिया का दक्षिणी भाग आस्ट्रेलिया का दूसरा प्रमुख औद्योगिक केन्द्र है जहाँ से देश का लगभग 15 प्रतिशत औद्योगिक उत्पादन प्राप्त होता है। इसके अन्तर्गत, पर्थ, फ्रीमैण्टल, नार्थ, नार्थक्लिफ, नैरोजिन, अलबनी आदि महत्वपूर्ण औद्योगिक केन्द्र है। पास-पास स्थित पर्थ और फ्रीमैण्टल इस औद्योगिक प्रदेश के प्रधान केन्द्र है। पर्थ में लोहा-इस्पात तथा अल्युमिनियम धातु उद्योग की प्रधानता है। फ्रीमैण्टल में ताँबा धातु के अतिरिक्त तेल शोधन का कारखाना और कई रासायनिक उद्योग स्थापित हैं।

 परिवहन के साधन (Means of Transport)-- शुष्क जलवायु तथा अनुपजाऊ रेतीली मिट्टी के कारण पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के विस्तृत भूभाग में जनसंख्या का अभाव है। इसकी अधिकांश जनसंख्या दक्षिणी-पूर्वी भाग में तथा दक्षिणी पश्चिमी समुद्रतटीय भाग में रहती है देश के अधिकांश उद्योग औद्योगिक तथा नगरीय केन्द्र भी इन्हीं भागों में केन्द्रित हैं। अतः आस्ट्रेलिया में महत्वपूर्ण रेलमार्ग तथा सड़क मार्ग इन्हीं सघन बसे हुए भागों में पाये जाते हैं। परिवहन के विभिन्न साधनों का विवरण अग्रांकित है 

(1) सड़क परिवहन (Road Transport)-- आस्ट्रेलिया में सड़कों की लम्बाई लगभग 7 लाख किमी है। सड़कें मुख्यतः दक्षिणी-पूर्वी तटीय भागों मरे-डार्लिंग बेसिन तथा दक्षिणी-पश्चिमी तटीय भागों में पायी जाती हैं। तटीय भागों में बड़े नगरों को जोड़ने वाली सड़कें अधिक चौड़ी तथा अच्छी स्थिति में हैं। सभी महत्वपूर्ण नगर सड़क मार्गों से जुड़े हुए हैं। उत्तरी भाग में केप यार्क प्रायद्वीप के पूर्वी तटीय भाग तथा कार्पेन्टरिया खाड़ी के तटीय भागों में भी नगरों को जोड़ती हुई सड़कें बनायी गयी हैं। 

(2) रेल परिवहन (Rail Transport)- ऑस्ट्रेलिया में रेल परिवहन आंतरिक परिवहन का सर्वप्रथम साधन हैं। आस्ट्रेलिया के रेलमार्ग की कुल लम्बाई 40 हजार किलोमीटर है आस्ट्रेलिया के पूर्वी तथा दक्षिणी भागों में लम्बे रेलमार्ग है। ऑस्ट्रेलिया के सभी प्रमुख पत्तन जैसे पर्थ, एडीलेड, मेलबोर्न, सिडनी, कैनबरा ब्रिसबेन आदि अपने पृष्ठ प्रदेश से रेलमार्गों द्वारा जुड़े हुए ऑस्ट्रेलिया का सबसे लम्बा और प्रमुख रेलमार्ग सिडनी से पर्थ तक जाता है। 

जैसे ऑस्ट्रेलिया अंतर महाद्वीपीय रेलमार्ग (Australian Trans Continental Railway)कहते हैं। यह रेल मार्ग ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के दक्षिणी तट के निकट से होता हुआ पूर्व में सिडनी से लेकर पश्चिम में पर्थ समुद्र पत्तन तक जाता है। इस सम्पूर्ण रेल मार्ग में कई भागों में रेलमार्ग की चौडाई (रेल गेज) में भिनता पायी जाती है। गेज परिवर्तन के कारण समानों के परिवहन तथा यात्रा में समय अधिक लगती है और सामानों को कई स्टेशनों पर उतारने चढ़ाने आदि अवरोधों के कारण परिवहन लागत भी अधिक पड़ती है। गेज परिवर्तन के कारण सिडनी से पर्थ पहुँचने में 15 दिन का समय लग जाता है जबकि इसके लिए सामान्यतः 5 दिन किये जा रहे हैं। का समय लगना चाहिए। इस कठिनाई को दूर करने के प्रयत्न किए जा रहे हैं।



यह रेलमार्ग पूर्व में सिडनी बन्दरगाह से आरम्भ होकर ग्रेट डिवाइडिंग श्रेणी को पार करके डार्लिंग नदी के पश्चिम में स्थित ब्रोकेनहित नगर पहुँचता है।ह वहाँ से यह मार्ग दक्षिण-पश्चिम में पीटरबरो तथा पोर्ट पीरी होते हुए पोर्ट आगस्टा पहुँचता है। पश्चिम की ओर अग्रसर यह मार्ग विश्व प्रसिद्ध स्वर्ण खदानों के नगर कालगूली तथा कूलगार्डी होते हुए हिन्द महासागर के तट पर स्थित पर्थ बंदरगाह पहुंचा है। 

(3) जल परिवहन (Water Transport)- आस्ट्रेलिया में आंतरिक जल परिवहन का अभाव है। सामानों के परिवहन के लिए समुद्री परिवहन ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। आस्ट्रेलिया के दक्षिणी-पश्चिमी दक्षिणी तथा दक्षिणी-पूर्वी तटों पर अनेक महत्वपूर्ण बन्दरगाह है जिनके द्वारा देशी तथा अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार किया जाता है। आस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर ट्रांसविले, राकहम्पटन, ब्रिसबेन और सिडनी, दक्षिणी-पूर्वी तट पर मेलबर्न तथा एडीलेड और दक्षिणी-पश्चिमी तट पर पर्थ, जनवरी, अलबनी आदि प्रमुख समुद्रपत्तन हैं।

(4) वायु परिवहन (Air Transport)- आस्ट्रेलिया का वायु परिवहन अधिक विकसित है। यह देश के सभी प्रमुख नगरों को परस्पर जोड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में ब्रिसेबेन, सिडनी, कैनबरा, मेलबोर्न, एडीलेड तथा पर्थ में अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं जहाँ से विश्व के विभिन्न देशों के लिए उड़ानों की सुविधा उपलब्ध है।

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