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Showing posts from March 7, 2018

Definition of Political philosophy ?

Political philosophy Definition of Political philosophy ?
Some scholars have also addressed this topic as 'Political philosophy'. According to them the nature of our subject is theoretical and philosophical, not practical. Under the study topic, we mainly study the basic facts related to political institutions, not their activities. Under this subject, we study the origins of the states in terms of their development, nature, purpose, human rights and duty and political beliefs, so that the main basis of state-related studies is these principles, hence it should be called political philosophy.

The entire world is studied in philosophy and in politics one major part of the world is studied, so it is advisable to call it a political philosophy from an attitude. Just as the basis of philosophy is imagination and logic, not science, in the same way, the basis of this subject is not science but imagination and logic. Confirmation of this opinion also comes from the statement of Hal…

Politics And Political Theory

Politics Politics And Political Theory
Today about two and a half thousand years ago this topic was originated in Greek of ancient times. This term of Indian language (politics) is the transformation of the word politics of English. The use of word politics as a scripture is not new. This word was first used by the Greek philosopher Aristotle. He had named his book 'Polotics' related to the city state. On this basis, it is called the father of political science. This name seems to be appropriate considering the origin of this word. The word is derived from the Greek language 'Polis' and 'Polia' (Politia) means 'police' means city state and 'politiya' means citizens. In ancient Yunnan the city used to be a sovereign state. Therefore, 'politics' from this point of view is the science in which all the state related problems are studied. In modern times the use of the word 'politics' is not ready to treat political science as appropr…

Meaning and Content of politics

Question 3- Under the nomenclature of Politics, briefly discuss various names, make it clear that what is the most appropriate name in your opinion? Or interpret the meaning and content of politics, political science, politics theory, politics philosophy and comparative politics. Or explain the differences in political science, political philosophy and comparative politics. And is politics science really science? Explain on the basis of appropriate title?

Answer-Well-known scholar, Zeilin, while expressing his opinion regarding the naming of political science, has written, "Politics is not a science other than science, which must have the same requirement as the technical terms." This statement of the Jaalinik Sir seems to be true to a considerable extent in relation to the naming of important topics like politics. At present, the subject related to the political activities of the human beings and institutions is addressed in the name of political science. Since the beginnin…

राजनीतिक सिद्धांत और राजनीति दर्शन Rajnitik siddhant aur Rajniti Darshan

राजनीतिक सिद्धांतRajnitik siddhant aur Rajniti Darshanडेविड ईस्टन ने राजनीति शास्त्र में सिद्धान्त की भूमिका और महत्व पर विशेष बल दिया है। ईस्टन को ही यह श्रेय जाता है कि उसने सर्वप्रथम राजनीति सिद्धान्त की आवश्यकताओं की ओर राजनीतिशास्त्रियों को आकर्षित किया। डेविड ईस्टन के अनुसार- "सिद्धान्त का निर्माण राजनीतिशास्त्र को व्यवस्थित विज्ञान बनाने की एक आवश्यक शर्त है और इसके अभाव में राजनीति शास्त्र व्यक्तित्व हीन है। डेविड़ ईस्टन के ही शब्दों में-"मैं यह तर्क  प्रस्तुt करूगा कि सिद्धान्त केकार्य भाग या भूमिका और इसकी संभावना की सचेत जानकारी के बिना,राजनीतिक अनुसंधlन खण्डयुकत और विजातीय होगा और अपने राजनीति विज्ञान अभियान के वचन को पूर्ण असमर्थ रहेगा l 
राजनीतिशास्त्र की परिभाषा के अन्तर्गत ‘राजनीति’ शब्द के संकुचित प्रयोग से उत्पन्न स्थिति के फलस्वरूप इसे दो भागों में विभाजित किया गया (1) सैद्धान्तिक राजनीति और व्यवहारिक (2) हल प्रयोगात्मक या प्रयोगात्मक राजनीति। सैद्धान्तिक राजनीति के अन्तर्गत राज्य की आधारभूत समस्याओ का अध्ययन किया जाता है। तात्पर्य यह है कि इमसें राज्य की उ…

तुलनात्मक राजनीति का महत्व,अर्थ | Tulnatmak Rajneeti Mahattav Arth

तुलनात्मक राजनीति  का महत्व,अर्थ | Tulnatmak Rajneeti Mahattav Arth परिचय  राजनीति एक सर्वव्यापी गतिविधि है जो हमारे चारो तरफ हमको देखने को मिल जाती है। प्रारंभ से ही एक  राजनीति व्यवस्था की तुलना दूसरे राजनीति व्यवस्था से की जाती रही है।किसी एक राजनीतिक व्यवस्था की अन्य राजनीतिक व्यवस्था से तुलना करने  के तरीके को सामान्य तुलनात्मक पद्धति कहते है। वास्तव में तुलनात्मक राजनीति का अर्थ और लक्ष्य विभिन्न देशों के मध्य एक राजनीति समस्याओं विषमताओं समानताओं की जानकारी का अध्ययन करना है। इसे हम तुलनात्मक राजनीति कहते हैं। यह समस्या या वह विभिन्नताओं के मिश्रण का परिपेक्ष से विकास करने का कार्य करता है। तुलनात्मक राजनीति हमारे समानताओं और विभिन्नताओं का अध्ययन करता है  और उसके द्वारा राज्य के विकास का कार्य करता है। तुलनात्मक राजनीति सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि विश्व की सरकार और उनकी क्या परिस्थितियां हैं किस प्रकार से उनका प्रचलन हो रहा है किस प्रकार से सरकारें चल रही हैं। इसके अंतर्गत जो अध्ययन करते हैं पहला राज्य के कार्य दूसरा संगठन, नीति, दबाव समूह का अध्ययन होता है।

 अर्थ और विकास …

क्या राजनीति विज्ञान वास्तव में विज्ञान है ? kya Rajniti Vastav me vigyan hai ?

क्या राजनीति विज्ञान वास्तव में विज्ञान है 

अनेक विद्वान प्राचीन काल से ही राजनीतिशास्त्र को एक विज्ञान के रूप में स्वीकार करते रहे हैं। राजनीतिशास्त्र के जनक अरस्तु ने सर्वप्रथम राजनीतिशास्त्र को सर्वश्रेष्ठ विज्ञान बतलाया था। अपने राज्य विषयक अध्ययन में आरस्तु ने वैज्ञानिक पद्धतियों का सहारा लिया था। बोदा , हांबस,मोंटेस्कू, लेविस, ब्राइस, सिजविक, गार्नर आदि विद्वानों ने राजनीतिशास्त्र को विज्ञानं के श्रेणी में रखा है। राजनीतिशास्त्र के विज्ञान होने के पक्ष निचे दिए गए है 

1. सर्वमान्य तथ्य- राजनीति विज्ञान में सर्वमान्य तब्य अवश्य ही हैं। आचार्य कौटिल्य ने अपने अर्थशास्त्र में इसी प्रकार के सर्वमान्य को प्रतिपादित करते हुए लिखा है कि "यदि दण्ड शक्ति का दरुपयोग किया जाए तो गृहस्थियों की बात ही क्या वानप्रस्थी व संन्यासी लोग भी क्रुद्ध हो जाते हैं और विद्रोह कर बैठते हैं। इसके विपरीत दण्ड शक्ति का ठीक roop में प्रयोग करने पर जनता में सर्वत्र धर्म का राज्य रहता है' ! इसी प्रकार कुछ अन्य बातों पर भी सभी सहमत हैं और अन्य लोक सेवाओं के सदस्य स्थायी आधार पर नियुक्त किये जाने चाहिए…