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तुलनात्मक राजनीति का महत्व,अर्थ | Tulnatmak Rajneeti Mahattav Arth

तुलनात्मक राजनीति  का महत्व,अर्थ | Tulnatmak Rajneeti Mahattav Arth

परिचय 

राजनीति एक सर्वव्यापी गतिविधि है जो हमारे चारो तरफ हमको देखने को मिल जाती है। प्रारंभ से ही एक  राजनीति व्यवस्था की तुलना दूसरे राजनीति व्यवस्था से की जाती रही है।किसी एक राजनीतिक व्यवस्था की अन्य राजनीतिक व्यवस्था से तुलना करने  के तरीके को सामान्य तुलनात्मक पद्धति कहते है। वास्तव में तुलनात्मक राजनीति का अर्थ और लक्ष्य विभिन्न देशों के मध्य एक राजनीति समस्याओं विषमताओं समानताओं की जानकारी का अध्ययन करना है। इसे हम तुलनात्मक राजनीति कहते हैं। यह समस्या या वह विभिन्नताओं के मिश्रण का परिपेक्ष से विकास करने का कार्य करता है। तुलनात्मक राजनीति हमारे समानताओं और विभिन्नताओं का अध्ययन करता है  और उसके द्वारा राज्य के विकास का कार्य करता है। तुलनात्मक राजनीति सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि विश्व की सरकार और उनकी क्या परिस्थितियां हैं किस प्रकार से उनका प्रचलन हो रहा है किस प्रकार से सरकारें चल रही हैं। इसके अंतर्गत जो अध्ययन करते हैं पहला राज्य के कार्य दूसरा संगठन, नीति, दबाव समूह का अध्ययन होता है।

 अर्थ और विकास

 राजनीति शास्त्र में तुलना पद्धति का जो प्रयोग है वह प्राचीन काल से किया जा रहा है
 अगर हम बात करें विद्वानों की तो अरस्तु,  पोलीवियस, मैकियावेली, मॉन्टेस्क्यू, सर हेनरी मेन, और फाइनर  की तो इन सभी विद्वानों ने अपने समय से ही तुलनात्मक राजनीति का प्रयोग करना शुरू कर दिया था।
 उदाहरण के तौर पर अरस्तू ने अपने समय  मैं 158 देशों के संविधान की तुलनात्मक अध्ययन  किया था और एक सर्वोत्तम संविधान की खोज का निष्कर्ष निकाला था।

 मॉन्टेस्क्यू की बात करें तो मांटेस्क्यू ने ब्रिटेन और फ्रांस के संविधान की तुलना करके शक्ति से सिद्धांत का प्रतिपादन किया।

 विद्वानों की परिभाषा

 जेन वेन डेल्ट तुलनात्मक राजनीति वर्तमान विश्व में विभिन्न सरकार का अध्ययन है इन के अनुसार हमें विभिन्न देशों के तीन व्यवस्थाओं का अध्ययन करना चाहिए। पहला विद्वान पालिका कार्यपालिका न्यायपालिका  दूसरा राजनीतिक दल का अध्ययन मतदान प्रणाली का अध्ययन  और आर्थिक अध्ययन  तीसरा विधि का अध्ययन यानी संविधान और कानून का अध्ययन।

 ऐड वर्ल्ड फ्रीमैन के अनुसार तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन राजनीतिक संस्थाओं तथा सरकारों के विभिन्न प्रकार के तुलनात्मक विवेचना तथा विश्लेषण करते हैं।

 तुलनात्मक शासन एवं राजनीति का स्वरूप


 इस में विद्वानों में मतभेद दिखाई देता है मुख्यता इसके दो भाग हैं।

१.लंबात्मक तुलना अध्ययन -इसमें हम एक देश के अंदर उसकी जो भी राष्ट्रीय प्रक्रिया है, और शासन प्रणाली की विभिन्न स्तरों पर राष्ट्रीय एवं प्रांतीय प्रक्रियाओं का तुलनात्मक अध्ययन करते हैं।
 विद्वानों ने इस अध्ययन की आलोचना की है उनके अनुसार एक ही देश का तुलनात्मक अध्ययन व्यवहारिक नहीं है।

 १. अंबा आत्मक अध्ययन-देश की राष्ट्रीय की ऐतिहासिक तुलना और विश्व में  प्रचलित विभिन्न राष्ट्रीय सरकारों की तुलना को अंबा आत्मक तुलना अध्ययन कहते हैं।

 तुलनात्मक राजनीति की आवश्यकता

१. तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन हमें स्थानी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो राजनीतिक  घटनाएं हैं  उनके व्यवहार को समझने में मदद करता है।

२. तुलनात्मक विश्लेषण के आधार पर हम तत्व एवं ज्ञान को ढूंढ सकते हैं जो स्थिति बार-बार उत्पन्न होती है।

३. तुलनात्मक राजनीति का लक्ष्य विभिन्न राजनीतिक प्रणालियों में समानताओं  और अंतरों की खोज करना है।

४. तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन से हम घटना व्यवहार एवं प्रणाली को समझने में लाभदायक है।

५. तुलनात्मक राजनीति विश्लेषण के आधार पर हम राजनीति संबंधित प्रश्नों के उत्तर ढूंढ सकते हैं एवं दे सकते हैं।

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