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मार्च, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Definition of Political philosophy ?

Political philosophy Definition of Political philosophy ? Some scholars have also addressed this topic as 'Political philosophy'. According to them the nature of our subject is theoretical and philosophical, not practical. Under the study topic, we mainly study the basic facts related to political institutions, not their activities. Under this subject, we study the origins of the states in terms of their development, nature, purpose, human rights and duty and political beliefs, so that the main basis of state-related studies is these principles, hence it should be called political philosophy. The entire world is studied in philosophy and in politics one major part of the world is studied, so it is advisable to call it a political philosophy from an attitude. Just as the basis of philosophy is imagination and logic, not science, in the same way, the basis of this subject is not science but imagination and logic. Confirmation of this opinion also comes from the statement of

Meaning and Content of politics

Question 3- Under the nomenclature of Politics, briefly discuss various names, make it clear that what is the most appropriate name in your opinion? Or interpret the meaning and content of politics, political science, politics theory, politics philosophy and comparative politics. Or explain the differences in political science, political philosophy and comparative politics. And is politics science really science? Explain on the basis of appropriate title? Answer-Well-known scholar, Zeilin, while expressing his opinion regarding the naming of political science, has written, "Politics is not a science other than science, which must have the same requirement as the technical terms." This statement of the Jaalinik Sir seems to be true to a considerable extent in relation to the naming of important topics like politics. At present, the subject related to the political activities of the human beings and institutions is addressed in the name of political science. Since the begi

राजनीतिक सिद्धांत और राजनीति दर्शन Rajnitik siddhant aur Rajniti Darshan

राजनीतिक सिद्धांत     Rajnitik siddhant aur Rajniti Darshan डेविड ईस्टन ने राजनीति शास्त्र में सिद्धान्त की भूमिका और महत्व पर विशेष बल दिया है। ईस्टन को ही यह श्रेय जाता है कि उसने सर्वप्रथम राजनीति सिद्धान्त की आवश्यकताओं की ओर राजनीतिशास्त्रियों को आकर्षित किया। डेविड ईस्टन के अनुसार- "सिद्धान्त का निर्माण राजनीतिशास्त्र को व्यवस्थित विज्ञान बनाने की एक आवश्यक शर्त है और इसके अभाव में राजनीति शास्त्र व्यक्तित्व हीन है। डेविड़ ईस्टन के ही शब्दों में-"मैं यह तर्क  प्रस्तुt करूगा कि सिद्धान्त केकार्य भाग या भूमिका और इसकी संभावना की सचेत जानकारी के बिना,राजनीतिक अनुसंधlन खण्डयुकत और विजातीय होगा और अपने राजनीति विज्ञान अभियान के वचन को पूर्ण असमर्थ रहेगा l  राजनीतिशास्त्र की परिभाषा के अन्तर्गत ‘राजनीति’ शब्द के संकुचित प्रयोग से उत्पन्न स्थिति के फलस्वरूप इसे दो भागों में विभाजित किया गया (1) सैद्धान्तिक राजनीति और व्यवहारिक (2) हल प्रयोगात्मक या प्रयोगात्मक राजनीति। सैद्धान्तिक राजनीति के अन्तर्गत राज्य की आधारभूत समस्याओ का अध्ययन किया जाता है। तात्पर्य यह है कि इमसें

तुलनात्मक राजनीति का महत्व,अर्थ | Tulnatmak Rajneeti Mahattav Arth

तुलनात्मक राजनीति  का महत्व,अर्थ | Tulnatmak Rajneeti Mahattav Arth परिचय  राजनीति एक सर्वव्यापी गतिविधि है जो हमारे चारो तरफ हमको देखने को मिल जाती है। प्रारंभ से ही एक  राजनीति व्यवस्था की तुलना दूसरे राजनीति व्यवस्था से की जाती रही है।किसी एक राजनीतिक व्यवस्था की अन्य राजनीतिक व्यवस्था से तुलना करने  के तरीके को सामान्य तुलनात्मक पद्धति कहते है। वास्तव में तुलनात्मक राजनीति का अर्थ और लक्ष्य विभिन्न देशों के मध्य एक राजनीति समस्याओं विषमताओं समानताओं की जानकारी का अध्ययन करना है। इसे हम तुलनात्मक राजनीति कहते हैं। यह समस्या या वह विभिन्नताओं के मिश्रण का परिपेक्ष से विकास करने का कार्य करता है। तुलनात्मक राजनीति हमारे समानताओं और विभिन्नताओं का अध्ययन करता है  और उसके द्वारा राज्य के विकास का कार्य करता है। तुलनात्मक राजनीति सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि विश्व की सरकार और उनकी क्या परिस्थितियां हैं किस प्रकार से उनका प्रचलन हो रहा है किस प्रकार से सरकारें चल रही हैं। इसके अंतर्गत जो अध्ययन करते हैं पहला राज्य के कार्य दूसरा संगठन, नीति, दबाव समूह का अध्ययन होता है।  अर्थ और

क्या राजनीति विज्ञान वास्तव में विज्ञान है ? kya Rajniti Vastav me vigyan hai ?

क्या राजनीति विज्ञान वास्तव में विज्ञान है  ?  अनेक विद्वान प्राचीन काल से ही राजनीतिशास्त्र को एक विज्ञान के रूप में स्वीकार करते रहे हैं। राजनीतिशास्त्र के जनक अरस्तु ने सर्वप्रथम राजनीतिशास्त्र को सर्वश्रेष्ठ विज्ञान बतलाया था। अपने राज्य विषयक अध्ययन में आरस्तु ने वैज्ञानिक पद्धतियों का सहारा लिया था। बोदा , हांबस,मोंटेस्कू, लेविस, ब्राइस, सिजविक, गार्नर आदि विद्वानों ने राजनीतिशास्त्र को विज्ञानं के श्रेणी में रखा है। राजनीतिशास्त्र के विज्ञान होने के पक्ष निचे दिए गए है  1. सर्वमान्य तथ्य- राजनीति विज्ञान में सर्वमान्य तब्य अवश्य ही हैं। आचार्य कौटिल्य ने अपने अर्थशास्त्र में इसी प्रकार के सर्वमान्य को प्रतिपादित करते हुए लिखा है कि "यदि दण्ड शक्ति का दरुपयोग किया जाए तो गृहस्थियों की बात ही क्या वानप्रस्थी व संन्यासी लोग भी क्रुद्ध हो जाते हैं और विद्रोह कर बैठते हैं। इसके विपरीत दण्ड शक्ति का ठीक roop में प्रयोग करने पर जनता में सर्वत्र धर्म का राज्य रहता है' ! इसी प्रकार कुछ अन्य बातों पर भी सभी सहमत हैं और अन्य लोक सेवाओं के सदस्य स्थायी आधार पर नियुक्त किये ज

Describe political science as a political system.

Question 1- Define the meaning and definition of political science, consider its area (study area or nature) and nature. Or highlight traditional nature and modern definitions of political science and its nature and nature. Or "Political science begins with the end state." Describe the description of Garner's statement.: Describe political science as a political system. To study the political life of the north-man, it is necessary to get the information of the institutions under which the person started his political career. Through which he is trying to develop his political life. The state is the most prominent among such political institutions. Human beings fulfill all their needs by state or society. Political science also comes under these social sciences, many social sciences were born through these needs of human beings and their social connections. Every social science does not study the overall aspects of social life, but only one aspect, the same applies to p

राजनीतिशास्त्र का अर्थ एवं परिभाषा Rajniti Shastra ka Arth Avem Paribhasha

 राजनीतिशास्त्र का अर्थ एवं परिभाषा  Rajniti Shastra ka Arth Avem Paribhasha  मनुष्य के राजनीतिक जीवन का अध्ययन करने हेतु उन संस्थाओं की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक होता हैं, जिनके अन्तर्गत मनुष्य ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की, जिसके द्वारा वह अपने राजनीतिक जीवन के विकास हेतु प्रयासरत है। इस प्रकार की राजनीतिक संस्थाओं में राज्य सबसे प्रमुख हैं। राज्य अथवा समाज द्वारा मनुष्य अपने समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। मनुष्य की इन आवश्यकताओं तथा उनके सामाजिक सम्बन्धों के माध्यम से अनेक सामाजिक शास्त्रों का जन्म हुआ इन्हीं सामाजिक शास्त्रों के अन्तर्गत अन्तर्गत राजनीतिशास्त्र भी आता हैं। प्रत्येक सामाजिक शास्त्र सामाजिक जीवन के समग्र पहलुओं का अध्ययन नहीं करता वरन् किसी एक पहलु का ही ,यही बात राजनितिशास्त्र पर भी लागु होती है। जहा तक राजनीतिशास्त्र के अध्ययन का सवाल है इसके अन्तर्गत राज्य, सरकार, राजनीतिक संघटन तथा संस्थायें, राजनीतिक क्रिया कलाप तथा राजनीतिक सम्बन्धों सहित राजनीतिक जीवन के समस्त पक्ष आ जाते हैं। इस विषय का जन्मदाता यूनानी चिंतक अरस्तु को माना जाता